
अगर आप छोटे बच्चे के माता-पिता हैं या प्राथमिक कक्षा में पढ़ाते हैं, तो अब शुरुआती शिक्षा को आसान और रोचक बनाने के लिए नई सुविधा उपलब्ध है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने शिक्षा मंत्रालय के तहत 3 से 8 वर्ष के बच्चों के लिए ‘ई-मैजिक बॉक्स’ (e-Magic Box) नाम से डिजिटल एप शुरू किया है।
यह पहल उस आयु वर्ग पर केंद्रित है जिसे सीखने की बुनियाद का दौर माना जाता है। इसी उम्र में भाषा, सोचने की क्षमता और जिज्ञासा तेजी से विकसित होती है। नई एप का उद्देश्य बच्चों को कहानी, गतिविधियों और संवाद के जरिए सीखने से जोड़ना है, साथ ही माता-पिता और शिक्षकों को भी मार्गदर्शन देना है।
क्या है ‘ई-मैजिक बॉक्स’ की खासियत
ई-मैजिक बॉक्स में तीन डिजिटल बॉट शामिल किए गए हैं, जो अलग-अलग जरूरतों के अनुसार काम करते हैं। ‘कथा सखी’ बच्चों को कहानियां और रचनात्मक सामग्री उपलब्ध कराती है। ‘पैरेंट तारा’ माता-पिता को यह समझने में मदद करती है कि वे घर पर बच्चे की सीखने की प्रक्रिया को कैसे बेहतर बना सकते हैं। वहीं ‘टीचर तारा’ शिक्षकों को कक्षा में संवाद और गतिविधियों से जुड़ी सलाह देती है।
उपयोगकर्ता अपने सवाल टाइप कर सकते हैं और तुरंत जवाब पा सकते हैं। इस तरह यह प्लेटफॉर्म घर और स्कूल, दोनों जगह सीखने की प्रक्रिया को सहयोग देता है।
‘किंगडम ऑफ लर्निंग एंड लर्निंग’ अभियान की शुरुआत
एप लॉन्च के साथ ही एनसीईआरटी ने ‘किंगडम ऑफ लर्निंग एंड लर्निंग’ नाम से एक अभियान भी शुरू किया है। इस अभियान का मकसद माता-पिता और शिक्षकों को इन डिजिटल साधनों से जोड़ना और शुरुआती शिक्षा में उनकी सक्रिय भागीदारी बढ़ाना है।
कई माध्यमों से उपलब्ध सुविधा
एनसीईआरटी ने इस सेवा को केवल मोबाइल एप तक सीमित नहीं रखा है। इसे अलग-अलग माध्यमों से इस्तेमाल किया जा सकता है।
एप एंड्रॉयड सहित अन्य प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। इसके अलावा व्हाट्सऐप और टेलीग्राम जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर भी बॉट की सुविधा दी गई है, जिससे उपयोगकर्ता सीधे संदेश के जरिए जानकारी ले सकते हैं।
जिन परिवारों के पास स्मार्टफोन या इंटरनेट की सुविधा नहीं है, उनके लिए आईवीआरएस सेवा भी शुरू की गई है। टोल-फ्री नंबर 1800-212-0173 या 15108 डायल कर ‘स्टोरी ऑफ द डे’, ‘सॉन्ग ऑफ द डे’ और ‘क्वेश्चन ऑफ द डे’ जैसी सामग्री अपनी भाषा में सुनी जा सकती है।
शुरुआती शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में कदम
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि 3 से 8 वर्ष की उम्र में बच्चों को सही वातावरण और संसाधन मिलना बेहद जरूरी है। ऐसे में ई-मैजिक बॉक्स जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म माता-पिता और शिक्षकों को सहयोग देकर बच्चों की बुनियादी सीख को मजबूत बनाने में मदद कर सकते हैं।
डिजिटल साधनों के बढ़ते इस्तेमाल के बीच यह पहल खास तौर पर उन परिवारों के लिए उपयोगी हो सकती है जो घर पर भी बच्चों की पढ़ाई को बेहतर बनाना चाहते हैं।




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