
महाराष्ट्र सरकार ने तकनीकी शिक्षा निदेशालय के अधीन आने वाले सरकारी और अनुदानित डिप्लोमा व डिग्री संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों के लिए करियर एडवांसमेंट स्कीम (CAS) से जुड़ी कई प्रमुख शर्तों में बड़ा बदलाव किया है। लंबे समय से लंबित मांगों के बाद अब शिक्षकों को शैक्षणिक योग्यताओं, प्रशिक्षण और प्रमोशन से जुड़ी कई बाधाओं से राहत मिलेगी।
यह फैसले बुधवार को जारी सरकारी संकल्प (GR) के माध्यम से लागू किए गए। सरकार का यह कदम महाराष्ट्र प्रशासनिक न्यायाधिकरण के 7 फरवरी 2025 के आदेश के बाद आया है, जिसमें जून 2022 के जीआर की कुछ धारणाओं पर आंशिक राहत दी गई थी।
इस मुद्दे पर व्यापक समीक्षा के लिए सरकार ने संयुक्त निदेशक (तकनीकी शिक्षा, मुंबई क्षेत्र) डॉ. प्रमोद नाइक की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति बनाई थी। समिति ने अक्तूबर 2025 में अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसके आधार पर अब CAS के कई नियमों में संशोधन कर शिक्षकों को महत्वपूर्ण राहत प्रदान की गई है।
संविदा से नियमित हुए शिक्षकों को रेट्रोएक्टिव लाभ
सरकार ने 2015-16 में तय व्यवस्था के तहत नियमित किए गए अस्थायी और संविदा व्याख्याताओं के लिए बड़ी राहत की घोषणा की है। पहले ऐसे शिक्षकों को रिफ्रेशर या प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए 31 दिसंबर 2023 तक समय दिया गया था, जो कथित रूप से AICTE द्वारा दिए गए विस्तार के अनुरूप था।
अब नियमों के अनुसार जिन शिक्षकों ने समयसीमा तक प्रशिक्षण पूरा कर लिया है, उन्हें पूर्व प्रभाव (रेट्रोएक्टिव) से CAS लाभ मिलेगा। जो शिक्षक निर्धारित समय के बाद कोर्स पूरा करेंगे, उन्हें पूरा करने की तिथि से लाभ प्रदान किया जाएगा।
पीएचडी की अनिवार्यता समाप्त
सरकार ने एक और महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए 5 मार्च 2010 से पहले नियुक्त व्याख्याताओं के लिए पे बैंड-4 में पदस्थापन हेतु पीएचडी की अनिवार्यता खत्म कर दी है।
जून 2022 के जीआर में छठे वेतन आयोग के तहत यह योग्यता अनिवार्य की गई थी, लेकिन अब पूर्व-2010 नियुक्तियों को इससे छूट मिल गई है।
विज्ञान और मानविकी संकाय के शिक्षकों को बड़ी राहत
2003 और 2004 में विज्ञान एवं मानविकी विषयों में नियुक्त शिक्षकों को अब CAS लाभ उसी योग्यता मानक के आधार पर मिलेगा, जो उनकी नियुक्ति के समय लागू था। यानी उन्हें तब लागू एमए या एमएससी योग्यता के आधार पर लाभ मिलेगा, बाद में जोड़े गए कठोर मानदंड अब उन पर लागू नहीं होंगे।
इसी तरह 2003-04 में नियुक्त संविदा/अस्थायी व्याख्याताओं को एमई/एमटेक की अनिवार्यता से भी छूट दी गई है। जबकि 2003-04 के बाद नियुक्त शिक्षकों को अब भी यह योग्यता तीन वर्षों के भीतर हासिल करनी होगी। योग्यता पूरी न करने पर लाभ रोका जा सकता है, लेकिन पूरा करने पर वित्तीय लाभ पूर्व प्रभाव से दिया जाएगा।
अंग्रेजी विषय के शिक्षकों को भी राहत
2015-16 में नियमित किए गए अंग्रेजी विषय के व्याख्याताओं के लिए भी बड़ा संशोधन किया गया है। अब उन्हें उसी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर CAS लाभ मिलेगा, जो उनकी नियुक्ति के समय लागू थी, न कि बाद में लाए गए कठोर मानकों के आधार पर।
सरकारी फैसले का प्रभाव
इन संशोधनों से हजारों तकनीकी शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है। शैक्षणिक योग्यता और प्रशिक्षण से जुड़ी कड़ाई में ढील के बाद अब कई शिक्षक प्रमोशन एवं उच्च वेतनमान के दायरे में आ सकेंगे।
तकनीकी शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल शिक्षकों की पेशेवर स्थिरता को मजबूत करेगा, बल्कि संस्थानों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करने में भी मदद करेगा। महाराष्ट्र में तकनीकी शिक्षा से जुड़े शिक्षक लंबे समय से CAS प्रक्रिया में सुधार की मांग कर रहे थे, और यह संशोधन उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।




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