
देश में उच्च शिक्षा के नाम पर कई ऐसे संस्थान सक्रिय हैं जो खुद को विश्वविद्यालय बताकर छात्रों को गुमराह कर रहे हैं। ऐसे मामलों को रोकने के लिए University Grants Commission (यूजीसी) हर साल फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची जारी करता है। आयोग ने साफ किया है कि सूची में शामिल संस्थानों को डिग्री देने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है और यहां से प्राप्त डिग्री न तो उच्च शिक्षा में मान्य होगी और न ही सरकारी या अधिकांश निजी नौकरियों में स्वीकार की जाएगी।
यूजीसी अधिनियम 1956 के मुताबिक केवल वही संस्थान डिग्री प्रदान कर सकते हैं जो केंद्र या राज्य कानून के तहत स्थापित हों, या जिन्हें अधिनियम की धारा 3 के तहत ‘डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी’ का दर्जा मिला हो। इसके अलावा संसद के विशेष अधिनियम से स्थापित संस्थान ही वैध रूप से डिग्री दे सकते हैं। ऐसे में छात्रों और अभिभावकों के लिए यह बेहद जरूरी है कि वे एडमिशन से पहले संस्थान की मान्यता की जांच करें।
इन राज्यों में मिले फर्जी विश्वविद्यालय
यूजीसी की ताजा सूची के अनुसार दिल्ली, उत्तर प्रदेश, केरल, महाराष्ट्र, पुडुचेरी, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में कई ऐसे संस्थान पाए गए हैं जो नियमों का उल्लंघन करते हुए खुद को विश्वविद्यालय के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। इन संस्थानों से जारी डिग्री को सरकारी मान्यता नहीं मिलती और अधिकतर मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय भी इन्हें स्वीकार नहीं करते।
दिल्ली में सूचीबद्ध फर्जी संस्थान
राष्ट्रीय राजधानी में जिन संस्थानों को फर्जी घोषित किया गया है, उनमें ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एंड फिजिकल हेल्थ साइंस (अलीपुर), कमर्शियल यूनिवर्सिटी लिमिटेड (दरियागंज), यूनाइटेड नेशनल यूनिवर्सिटी, वोकेशनल यूनिवर्सिटी, एडीआर-सेंट्रिक ज्यूरिडिकल यूनिवर्सिटी (राजेंद्र प्लेस), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड इंजीनियरिंग, विश्वकर्मा ओपन यूनिवर्सिटी फॉर सेल्फ एम्प्लॉयमेंट, आध्यात्मिक विश्वविद्यालय (रोहिणी), वर्ल्ड पीस ऑफ यूनाइटेड नेशन यूनिवर्सिटी (पीतमपुरा) और इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड इंजीनियरिंग (कोटला मुबारकपुर) शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश में सूचीबद्ध संस्थान
उत्तर प्रदेश में गांधी हिंदी विद्यापीठ, प्रयाग; नेताजी सुभाष चंद्र बोस ओपन यूनिवर्सिटी, अलीगढ़; भारतीय शिक्षा परिषद, लखनऊ; और महामाया टेक्निकल यूनिवर्सिटी, नोएडा को फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची में रखा गया है।
अन्य राज्यों की स्थिति
केरल में सेंट जॉन्स यूनिवर्सिटी, किशनट्टम और इंटरनेशनल इस्लामिक यूनिवर्सिटी ऑफ प्रोफेटिक मेडिसिन, कोझीकोड को सूचीबद्ध किया गया है। महाराष्ट्र में राजा अरबी यूनिवर्सिटी, नागपुर को फर्जी घोषित किया गया है। पुडुचेरी में श्री बोधि एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन का नाम सूची में शामिल है।
पश्चिम बंगाल में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव मेडिसिन और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव मेडिसिन एंड रिसर्च, दोनों कोलकाता स्थित संस्थान, फर्जी पाए गए हैं। आंध्र प्रदेश में बाइबल ओपन यूनिवर्सिटी ऑफ इंडिया और क्राइस्ट न्यू टेस्टामेंट डीम्ड यूनिवर्सिटी, गुंटूर का नाम सूची में है।
एडमिशन से पहले क्या करें?
विशेषज्ञों का कहना है कि छात्र किसी भी संस्थान में दाखिला लेने से पहले उसकी मान्यता की जानकारी यूजीसी की आधिकारिक वेबसाइट पर जरूर जांचें। संस्थान का नाम केंद्रीय या राज्य विश्वविद्यालयों की सूची में है या नहीं, इसकी पुष्टि करना जरूरी है। यदि कोई संस्थान यूजीसी से मान्यता प्राप्त नहीं है, तो वहां से डिग्री लेना भविष्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
उच्च शिक्षा में सही चुनाव ही करियर की मजबूत नींव रखता है। ऐसे में केवल आकर्षक विज्ञापन या नाम से प्रभावित होने के बजाय, कानूनी मान्यता की पुष्टि करना सबसे जरूरी कदम है।




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