
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने दसवीं और बारहवीं के छात्रों के लिए सर्टिफिकेट सुधार प्रक्रिया को लेकर बड़ा फैसला लिया है। बोर्ड ने नाम, माता-पिता के नाम और जन्मतिथि में संशोधन कराने का शुल्क वर्ष 2026 से एक हजार रुपये से बढ़ाकर पांच हजार रुपये कर दिया है। यह फैसला सीबीएसई की गवर्निंग बॉडी द्वारा परीक्षा समिति की सिफारिशों को मंजूरी देने के बाद लागू किया जाएगा।
स्कूलों को बार-बार सावधानी की सलाह
CBSE का कहना है कि हर साल स्कूलों को ‘लिस्ट ऑफ कैंडिडेट्स’ तैयार करते वक्त अत्यधिक सतर्क रहने की सलाह दी जाती है ताकि छात्रों के नाम, माता-पिता के नाम और जन्मतिथि से जुड़ी कोई गलती न हो। बोर्ड इसके लिए 10 से 15 बार तक रिमाइंडर जारी करता है, लेकिन इसके बावजूद क्षेत्रीय कार्यालयों को बड़ी संख्या में संशोधन के अनुरोध प्राप्त होते रहते हैं।
क्षेत्रीय कार्यालयों पर बढ़ रहा दबाव
पिछले दो वर्षों में CBSE को देशभर से हजारों आवेदन मिले, जिनमें छात्रों ने अपने सर्टिफिकेट में बदलाव की मांग की। आंकड़े बताते हैं कि:
– पंचकुला रीजन: 2,535 आवेदन
– पटना रीजन: 3,340 आवेदन
– प्रयागराज रीजन: 6,411 आवेदन
– अजमेर रीजन: 3,986 आवेदन
– चेन्नई रीजन: 710 आवेदन
बोर्ड का कहना है कि कई बार छात्रों द्वारा जमा किए गए दस्तावेज अधूरे या अस्पष्ट होते हैं, जिससे सुधार प्रक्रिया लंबी हो जाती है। कुछ छात्र तो समाधान न मिलने पर कानूनी रास्ते का सहारा लेते हुए अदालतों तक पहुंच जाते हैं।
क्यों बढ़ाई गई फीस?
CBSE के अनुसार, कम शुल्क की वजह से बड़ी संख्या में छात्र मामूली त्रुटियों के लिए भी सुधार आवेदन करते हैं, जिससे बोर्ड पर प्रशासनिक और तकनीकी भार बढ़ता है। इसी वजह से सुधार शुल्क में वृद्धि का निर्णय लिया गया है, ताकि अनावश्यक आवेदनों पर रोक लगाई जा सके और वास्तविक मामलों को प्राथमिकता से निपटाया जा सके।
2026 से लागू होंगे नए नियम
बोर्ड के नए प्रावधानों के अनुसार 2026 से पास होने वाले छात्रों के लिए सुधार शुल्क ₹5,000 होगा। यदि छात्र पास होने के बाद सुधार में देरी करता है, तो हर अतिरिक्त वर्ष ₹1,000 का अतिरिक्त शुल्क देना होगा। 2025 या उससे पहले पास हुए छात्रों के लिए अभी भी पुरानी ₹1,000 फीस ही लागू रहेगी।
क्या होगा इसका असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ी हुई फीस छात्रों को अधिक सतर्क बनाएगी और स्कूल भी डाटा एंट्री में गलती न करने के लिए जिम्मेदारी से काम करेंगे। हालांकि, कई अभिभावक मानते हैं कि शुल्क में इतनी अधिक बढ़ोतरी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए भारी साबित हो सकती है।
CBSE का तर्क है कि सर्टिफिकेट जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों में सटीकता सुनिश्चित करना जरूरी है और बढ़ा हुआ शुल्क प्रशासनिक प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने में मदद करेगा।




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