
कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney ने भारत में नई शैक्षणिक साझेदारियों की घोषणा की है। इस पहल के तहत शोध सहयोग, हाइब्रिड कैंपस मॉडल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़े सेंटर ऑफ एक्सीलेंस सहित कुल 13 नए समझौते किए गए हैं। इन समझौतों का मकसद दोनों देशों के विश्वविद्यालयों के बीच अकादमिक सहयोग को मजबूत करना और छात्रों को वैश्विक स्तर का अनुभव उपलब्ध कराना है।
प्रधानमंत्री कार्नी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि कनाडाई विश्वविद्यालय भारत में नई “टैलेंट पार्टनरशिप” शुरू कर रहे हैं। उनके अनुसार, यह पहल छात्रों को अंतरराष्ट्रीय एक्सपोज़र देगी और भारत तथा कनाडा के विश्वस्तरीय संस्थानों के बीच संबंधों को और मजबूत बनाएगी। उन्होंने इसे प्रशांत क्षेत्र में शैक्षणिक सहयोग को आगे बढ़ाने वाला कदम बताया।
मैकगिल विश्वविद्यालय भारत में स्थापित करेगा एआई सेंटर
इस पहल का प्रमुख आकर्षण McGill University द्वारा भारत में एआई शिक्षा और शोध के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना है। विश्वविद्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, यह घोषणा Universities Canada के नेतृत्व में भारत आए एक शैक्षणिक प्रतिनिधिमंडल की यात्रा के दौरान की गई। इस प्रतिनिधिमंडल में प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और कनाडा की विदेश मंत्री Anita Anand भी शामिल थीं।
योजना के अनुसार, यह एआई सेंटर मई 2027 तक स्थापित किया जाएगा और शरद सत्र 2027 से पहले बैच का दाखिला शुरू होगा। शुरुआती चरण में 50 छात्रों को प्रवेश दिया जाएगा। बाद में इसे बढ़ाकर लगभग 200 छात्रों तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
उद्योग से जुड़े पाठ्यक्रम पर रहेगा जोर
प्रस्तावित एआई सेंटर में मास्टर स्तर का कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। इसमें मजबूत शैक्षणिक आधार के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण और उद्योग से जुड़ा अनुभव शामिल होगा। छात्रों को वास्तविक तकनीकी चुनौतियों और एआई क्षेत्र की बदलती जरूरतों से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर काम करने का अवसर मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारत और कनाडा के बीच शिक्षा एवं शोध सहयोग को नई दिशा दे सकती है। खासकर एआई जैसे उभरते क्षेत्र में संयुक्त कार्यक्रम दोनों देशों के छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए नए अवसर खोल सकते हैं।
हाइब्रिड कैंपस और शोध सहयोग को बढ़ावा
इन 13 समझौतों में हाइब्रिड कैंपस मॉडल और संयुक्त शोध परियोजनाएं भी शामिल हैं। हाइब्रिड मॉडल के तहत छात्र दोनों देशों के संस्थानों के साथ मिलकर पढ़ाई और शोध कर सकेंगे। इससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय पाठ्यक्रम, संकाय और उद्योग नेटवर्क तक पहुंच मिलेगी।
भारत और कनाडा के बीच शिक्षा क्षेत्र में सहयोग पहले से मौजूद है, लेकिन यह नई पहल उसे अधिक संरचित और दीर्घकालिक रूप देने की दिशा में कदम मानी जा रही है।
छात्रों के लिए क्या मायने?
इस घोषणा का सबसे बड़ा लाभ छात्रों को मिलने की उम्मीद है। उन्हें वैश्विक स्तर का पाठ्यक्रम, अंतरराष्ट्रीय एक्सपोज़र और उद्योग से जुड़ा अनुभव एक साथ मिल सकेगा। साथ ही, संयुक्त शोध परियोजनाओं से दोनों देशों के वैज्ञानिक और अकादमिक समुदाय को भी फायदा होगा।
कुल मिलाकर, यह पहल भारत–कनाडा संबंधों में शिक्षा को एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में स्थापित करती है। आने वाले वर्षों में इन समझौतों का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि इन्हें जमीनी स्तर पर किस तरह लागू किया जाता है और छात्र समुदाय तक इनके लाभ कितनी प्रभावी तरीके से पहुंचते हैं।




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