
देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन परीक्षाओं में गिनी जाने वाली सिविल सेवा परीक्षा में इस बार तमिलनाडु से एक दिलचस्प सफलता की कहानी सामने आई है। राज्य सरकार की ‘नान मुधलवन’ योजना के तहत प्रशिक्षण लेने वाले 56 अभ्यर्थियों ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 में सफलता हासिल की है। इनमें से दो उम्मीदवार देश के शीर्ष 10 में भी शामिल रहे हैं। इस परिणाम के बाद यह योजना एक बार फिर चर्चा में आ गई है और इसे राज्य के युवाओं को बड़े प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने वाली महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
तमिलनाडु सरकार की यह योजना युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी नौकरियों के लिए बेहतर तैयारी का अवसर देने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। इसके तहत छात्रों को UPSC समेत अन्य प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुफ्त कोचिंग दी जाती है। साथ ही उन्हें पढ़ाई से जुड़ा स्टडी मटेरियल, अनुभवी मेंटरशिप, रेजिडेंशियल ट्रेनिंग और जरूरत पड़ने पर आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है। सरकार का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि प्रतिभाशाली छात्र केवल संसाधनों की कमी के कारण पीछे न रह जाएं।
राज्य के ऑल इंडिया सिविल सर्विसेज कोचिंग सेंटर के अनुसार इस साल नान मुधलवन योजना के तहत प्रशिक्षण लेने वाले 56 उम्मीदवारों ने UPSC 2025 की परीक्षा पास की है। राज्य के प्रतियोगी परीक्षा विभाग का कहना है कि पहले UPSC में तमिलनाडु के उम्मीदवारों की सफलता दर करीब 3 प्रतिशत के आसपास रहती थी, लेकिन इस बार यह बढ़कर लगभग 6 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इससे संकेत मिलता है कि सरकारी पहल का असर धीरे-धीरे दिखाई देने लगा है।
इस साल के परिणाम में तमिलनाडु के कई उम्मीदवारों ने शानदार प्रदर्शन किया है। राजेश्वरी सुवे एम ने ऑल इंडिया रैंक 2 हासिल की, जबकि एआर राजा मोहीदीन को रैंक 7 और श्रीथि आर को रैंक 18 मिली। इन सफल उम्मीदवारों में से कई को नान मुधलवन योजना के तहत प्रशिक्षण और मार्गदर्शन मिला था।
ऑल इंडिया दूसरी रैंक हासिल करने वाली राजेश्वरी सुवे एम ने अपनी सफलता का श्रेय इस योजना और चेन्नई के निजी आईएएस संस्थानों से मिले मार्गदर्शन को दिया है। उन्होंने समाजशास्त्र को अपना वैकल्पिक विषय चुना था। फिलहाल वह पहले से ही तमिलनाडु पब्लिक सर्विस कमीशन (TNPSC) परीक्षा पास कर डिप्टी कलेक्टर ट्रेनी के रूप में काम कर रही हैं। उनके अनुसार सही दिशा और पर्याप्त संसाधन मिलने से तैयारी काफी आसान हो जाती है।
वहीं UPSC में 184वीं रैंक हासिल करने वाली किरुथिका एम की कहानी भी प्रेरणादायक है। वह चेन्नई कॉरपोरेशन स्कूल की एक शिक्षिका की बेटी हैं। शादी के बाद उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की और नान मुधलवन योजना के तहत कोचिंग प्राप्त की। किरुथिका का कहना है कि परिवार का सहयोग और सही प्रशिक्षण उनकी सफलता की बड़ी वजह बना।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसी योजनाओं को सही ढंग से लागू किया जाए, तो यह उन छात्रों के लिए बड़ा सहारा बन सकती हैं जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। तमिलनाडु की यह पहल अब अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण के रूप में देखी जा रही है।




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