
केंद्र सरकार ने भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कोचिंग सेंटरों पर कार्रवाई तेज कर दी है। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी ने लोकसभा में स्पष्ट किया कि सरकार लोगों के हितों की रक्षा के लिए लगातार कदम उठा रही है, खासकर उन संस्थानों के खिलाफ जो छात्रों और अभिभावकों को गुमराह करने वाले दावे करते हैं।
लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों का जवाब देते हुए मंत्री ने बताया कि कई कोचिंग संस्थानों को नोटिस जारी किए गए हैं। भ्रामक विज्ञापन देने वाले संस्थानों पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है। सरकार का उद्देश्य साफ है—लोग झूठे वादों के जाल में न फंसें और उन्हें सही, पारदर्शी जानकारी मिले।
प्रल्हाद जोशी ने कहा कि कोचिंग सेक्टर में गलत दावों और बढ़ा-चढ़ाकर किए जाने वाले प्रचार पर नजर रखी जा रही है। ऐसे विज्ञापन अक्सर छात्रों के भविष्य और अभिभावकों की मेहनत की कमाई से जुड़े फैसलों को प्रभावित करते हैं। इसे देखते हुए संबंधित एजेंसियों को सख्ती से नियम लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
मंत्री के मुताबिक, हाल के महीनों में कई मामलों में कार्रवाई की गई है, जिससे ऐसे विज्ञापनों में कमी आई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा सरकार की प्राथमिकता है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आगे भी कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।
विशेषज्ञ मानते हैं कि शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने और छात्रों को सही जानकारी उपलब्ध कराने के लिए ऐसी सख्ती जरूरी है। इससे न सिर्फ भ्रामक दावों पर रोक लगेगी, बल्कि भरोसेमंद संस्थानों को भी बढ़ावा मिलेगा।




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