
Nasscom Foundation द्वारा आयोजित और Cisco के सहयोग से हुए एक समिट में सामाजिक चुनौतियों के समाधान में छात्रों की बढ़ती भूमिका को प्रमुखता से सामने रखा गया। कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि शिक्षा, तकनीक और उद्यमिता के बीच मजबूत तालमेल बनाना समय की बड़ी जरूरत है।
समिट के दौरान हुई चर्चाओं में सामने आया कि देश के शैक्षणिक संस्थान अब छात्रों को सिर्फ सैद्धांतिक पढ़ाई तक सीमित नहीं रख रहे, बल्कि उन्हें कृषि, स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में तकनीक आधारित व्यावहारिक समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। यह बदलाव उच्च शिक्षा के ढांचे में एक नई दिशा की ओर इशारा करता है।
कार्यक्रम में शामिल विशेषज्ञों ने कहा कि मेंटरशिप, इंडस्ट्री से जुड़ाव और सहयोगात्मक प्लेटफॉर्म तक पहुंच अब छात्रों के लिए बेहद जरूरी हो गई है। यही तत्व छात्रों के आइडिया को वास्तविक समाधान में बदलने में मदद करते हैं।
सरकार और उद्योग जगत से जुड़े वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि इनोवेशन से जुड़े संसाधनों को सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रखना चाहिए। टियर-2 और टियर-3 शहरों के छात्रों तक भी इन अवसरों का विस्तार करना जरूरी है, ताकि देशभर में प्रतिभा को समान अवसर मिल सके। इसके साथ ही, भविष्य की जरूरतों को देखते हुए एआई-रेडी वर्कफोर्स तैयार करने के लिए लगातार सीखने और संस्थागत सहयोग पर भी बल दिया गया।
इस आयोजन में छात्र टीमों ने वास्तविक समस्याओं पर आधारित अपने प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए। इससे यह स्पष्ट हुआ कि अब उच्च शिक्षा में अनुभव आधारित सीखने (एक्सपीरिएंशियल लर्निंग) और उद्यमिता को तेजी से शामिल किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर छात्रों को शुरुआती स्तर पर ही नवाचार के लिए सही माहौल मिले, तो वे सैद्धांतिक ज्ञान से आगे बढ़कर ऐसे समाधान विकसित कर सकते हैं, जो समाज के लिए उपयोगी और बड़े स्तर पर लागू किए जा सकें।
Harish Krishnan, मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ पॉलिसी ऑफिसर, Cisco इंडिया और साउथईस्ट एशिया ने कहा कि यह देखना प्रेरणादायक है कि छात्र जेनरेटिव एआई और इंटेलिजेंट ऑटोमेशन जैसी तकनीकों का उपयोग कर जटिल सामाजिक समस्याओं का समाधान खोज रहे हैं। उन्होंने कहा कि एआई की संभावनाएं बहुत व्यापक हैं और इस तरह के कार्यक्रम शिक्षा और उद्यमिता के बीच की दूरी को कम कर रहे हैं, जिससे युवा नौकरी तलाशने वालों से आगे बढ़कर नौकरी देने वाले बन सकते हैं।
वहीं Jyoti Sharma, सीईओ, Nasscom Foundation ने कहा कि आज के दौर में कई प्रभावी तकनीकी समाधान युवा नवाचारकों से आ रहे हैं, जो उन समस्याओं को करीब से समझते हैं जिनका वे समाधान करना चाहते हैं। उन्होंने जोर दिया कि ऐसे नवाचारों को आगे बढ़ाने के लिए सही इकोसिस्टम—जैसे मेंटर, इंडस्ट्री इनसाइट और प्लेटफॉर्म—तक पहुंच बेहद जरूरी है।
यह समिट इस बात का संकेत है कि भारत में शिक्षा और तकनीक का मेल अब तेजी से बदल रहा है और आने वाले समय में छात्र-आधारित नवाचार देश के सामाजिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।




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