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विदेश में MBBS करने वालों के लिए बड़ी चेतावनी: सरकार ने कहा- गलत कॉलेज चुना तो भारत में नहीं कर पाएंगे डॉक्टरी

विदेश में MBBS करने वालों के लिए बड़ी चेतावनी: सरकार ने कहा- गलत कॉलेज चुना तो भारत में नहीं कर पाएंगे डॉक्टरी

विदेश में MBBS करने वालों के लिए बड़ी चेतावनी: सरकार ने कहा- गलत कॉलेज चुना तो भारत में नहीं कर पाएंगे डॉक्टरी

हर साल हजारों भारतीय छात्र एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए विदेश जाते हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने ऐसे विद्यार्थियों को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। सरकार ने स्पष्ट कहा है कि जो छात्र मानकों को पूरा न करने वाले विदेशी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश ले रहे हैं, वे भारत में डॉक्टर के रूप में पंजीकरण पाने के योग्य नहीं होंगे।

नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने एडवाइजरी में बताया कि कई विदेशी संस्थान—खासतौर पर उज्बेकिस्तान में—कोर्स की अवधि, क्लिनिकल ट्रेनिंग, सिलेबस और पढ़ाई के मोड जैसे मानकों पर खरे नहीं उतरते। कई कॉलेज क्षमता से अधिक दाखिले लेते हैं, जिससे छात्रों को पर्याप्त प्रैक्टिकल ट्रेनिंग नहीं मिल पाती।

एनएमसी का स्पष्ट संदेश: नियम पूरे नहीं, तो भारत में लाइसेंस नहीं

एनएमसी ने विदेशी कॉलेजों में एडमिशन दिलाने का दावा करने वाले एजेंटों से सावधान रहने को कहा है। आयोग ने जोर देकर कहा कि भारत में चिकित्सक के रूप में पंजीकरण के लिए Foreign Medical Graduate Licentiate Regulations, 2021 की शर्तें पूरी करना अनिवार्य है।

इन नियमों के अनुसार छात्रों को 54 महीने की पढ़ाई एक ही संस्थान में, उसी यूनिवर्सिटी में 12 महीने की इंटर्नशिप, सही क्लिनिकल ट्रेनिंग, और अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा पूरी करनी होती है। किसी भी शर्त में कमी होने पर छात्र भारत में चिकित्सा अभ्यास के पात्र नहीं रहेंगे।

उज्बेकिस्तान के इन संस्थानों के बारे में विशेष चेतावनी

एडवाइजरी में उन मेडिकल कॉलेजों का नाम विशेष रूप से शामिल है जिन पर नियमों का पालन न करने के आरोप हैं। इनमें बुखारा स्टेट मेडिकल इंस्टीट्यूट, समरकंद स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी, ताशकंद स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी, टीआईटी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, बैंगलोर (TSMU की टर्मेज शाखा का ऑफ-शोर कैंपस) शामिल हैं। 

एनएमसी ने कहा है कि कुछ एजेंट इन संस्थानों में बिना NEET-UG ‘पक्का एडमिशन’ देने का दावा करते हैं, जबकि विदेश में एमबीबीएस करने के लिए NEET क्वालिफाई करना अनिवार्य है।

हर साल लाखों अभ्यर्थी, लेकिन सीटें सिर्फ 1.28 लाख

भारत में एमबीबीएस सीटों की कमी भी बड़ी वजह है कि छात्र विदेश का रुख करते हैं। हर साल करीब 25 लाख छात्र NEET परीक्षा देते हैं, जिनमें से करीब 13 लाख सफल होते हैं। लेकिन पूरे देश में एमबीबीएस की सीटें सिर्फ 1.28 लाख हैं।

सरकारी कॉलेजों में सीमित सीटें और निजी कॉलेजों की ऊंची फीस के कारण कई विद्यार्थी सस्ती लागत वाले देशों—जैसे यूक्रेन, रूस, उज्बेकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल—में पढ़ाई का विकल्प चुनते हैं। हालांकि, विदेश से MBBS करने के बाद भारत में डॉक्टरी की अनुमति पाने के लिए एफएमजीई (FMGE) परीक्षा पास करना अनिवार्य है।

FMGL नियम 2021 की मुख्य शर्तें

एनएमसी के Foreign Medical Graduate Licentiate Regulations 2021 के तहत भारत में चिकित्सा का अभ्यास करने के लिए विदेशी मेडिकल डिग्री तभी मान्य होगी जब:

– शिक्षा की अवधि न्यूनतम 54 महीने हो और एक ही संस्थान में हुई हो।

– इंटर्नशिप विदेशी विश्वविद्यालय में 12 महीने लगातार पूरी की गई हो।

– माध्यम अंग्रेजी हो।

– क्लिनिकल ट्रेनिंग टुकड़ों में या कई देशों में न हो।

– छात्र ने अनुसूची-I के सभी अनिवार्य विषय पढ़े हों।

जिस देश से डिग्री ली गई है, वहां के नियामक निकाय में पंजीकरण हासिल हो और उस देश में चिकित्सा अभ्यास का अधिकार प्राप्त हो। और सबसे महत्वपूर्ण—NEET-UG क्वालिफाई करना अनिवार्य है।

सरकार की यह एडवाइजरी छात्रों और अभिभावकों के लिए एक मजबूत संदेश है कि विदेश में MBBS का चयन सिर्फ फीस या आसान प्रवेश देखकर न करें। गलत संस्थान में दाखिला न केवल समय और धन की बर्बादी है, बल्कि भारत में डॉक्टर बनने का सपना भी खत्म कर सकता है।

Asmita Sarkar

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