
भारत के उच्च शिक्षा तंत्र में अब रोजगार क्षमता (एम्प्लॉयबिलिटी) पर तेजी से जोर बढ़ रहा है। ऐसे में कैंपस प्लेसमेंट इस बात का अहम पैमाना बनकर उभर रहा है कि शिक्षण संस्थान किस हद तक अपने पाठ्यक्रम को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप ढाल पा रहे हैं। आज कंपनियां ऐसे स्नातकों की तलाश में हैं, जिनके पास सिर्फ तकनीकी ज्ञान ही नहीं, बल्कि बदलते कार्य माहौल के अनुरूप खुद को ढालने और समस्याओं का समाधान निकालने की क्षमता भी हो।
हाल के प्लेसमेंट ट्रेंड्स बताते हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स, क्लाउड कंप्यूटिंग और साइबर सिक्योरिटी जैसे उभरते तकनीकी क्षेत्रों में प्रशिक्षित उम्मीदवारों की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसके साथ ही शिक्षण संस्थान भी इंडस्ट्री के साथ अपने जुड़ाव को मजबूत कर रहे हैं। इसके लिए वे संरचित प्रशिक्षण, इंटर्नशिप और पाठ्यक्रम में व्यावहारिक बदलाव कर रहे हैं, ताकि अकादमिक पढ़ाई और नौकरी की वास्तविक जरूरतों के बीच की दूरी कम की जा सके।
इसी क्रम में पारुल यूनिवर्सिटी ने जानकारी दी कि वर्ष 2026 के ग्रेजुएटिंग बैच के 234 छात्रों को टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज द्वारा आयोजित कैंपस ड्राइव के जरिए नौकरी के अवसर मिले। इन छात्रों को 3.46 लाख रुपये प्रति वर्ष से लेकर 9 लाख रुपये प्रति वर्ष तक के पैकेज ऑफर किए गए। इस भर्ती प्रक्रिया में बीटेक (कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बिग डेटा एनालिटिक्स, ब्लॉकचेन, क्लाउड कंप्यूटिंग और कंप्यूटर इंजीनियरिंग जैसे कोर्स के छात्रों के साथ-साथ एमसीए, एमएससी आईटी, साइबर सिक्योरिटी और फॉरेंसिक स्टडीज जैसे पोस्टग्रेजुएट कार्यक्रमों के छात्र भी शामिल रहे।
संस्थान के अनुसार, इस ड्राइव में बीटेक कंप्यूटर साइंस के तीन छात्रों को 9 लाख रुपये प्रति वर्ष का उच्चतम पैकेज मिला। वहीं, व्यापक प्लेसमेंट सत्र के दौरान 108 छात्रों को रिलायंस इंडस्ट्रीज और 157 छात्रों को कैपजेमिनी में नौकरी के ऑफर मिले। इसके अलावा माइक्रोसॉफ्ट, कॉग्निजेंट, लार्सन एंड टुब्रो, डेलॉयट (हैश्डइन के माध्यम से) और हेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज जैसी कंपनियों ने भी भर्ती में भाग लिया।
कुल मिलाकर, 2026 बैच के 3,500 से अधिक छात्रों को मौजूदा भर्ती सत्र के दौरान प्लेसमेंट मिल चुका है। संस्थान ने यह भी बताया कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों की ओर से 20 लाख रुपये प्रति वर्ष या उससे अधिक के 23 ऑफर दिए गए। इसके अतिरिक्त, लिंक्डइन मेंटरशिप पहल के तहत चार छात्रों ने राष्ट्रीय स्तर पर टॉप 100 लर्नर्स में अपनी जगह बनाई।
इन परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए पारुल यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट डॉ. देवांशु पटेल ने इसे छात्रों की लगातार मेहनत और संस्थान द्वारा इंडस्ट्री के अनुरूप प्रशिक्षण पर दिए गए फोकस का परिणाम बताया।
कुल मिलाकर, ये प्लेसमेंट आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि उच्च शिक्षा में अब प्रैक्टिकल लर्निंग और इंडस्ट्री के साथ करीबी सहयोग को प्राथमिकता दी जा रही है। जैसे-जैसे कंपनियां जॉब-रेडी स्किल्स को महत्व दे रही हैं, वैसे-वैसे शिक्षण संस्थान भी अनुभव आधारित सीखने के मॉडल को अपनाकर छात्रों को बेहतर करियर के लिए तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।




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