
दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे छात्रों और यहां दाखिला लेने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए राहत भरी खबर है। दिल्ली विश्वविद्यालय अब छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव देने के लिए नई पहल पर काम कर रहा है। इसके तहत छात्र अपनी पढ़ाई का एक हिस्सा विदेश में पूरा कर सकेंगे और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए अतिरिक्त क्रेडिट भी हासिल कर पाएंगे।
यूनिवर्सिटी की एग्जीक्यूटिव काउंसिल ने “Semester Away Programme (SAP)” शुरू करने के प्रस्ताव पर विचार के लिए एक समिति गठित करने का फैसला लिया है। इस कार्यक्रम के लागू होने के बाद छात्र अपने डिग्री कोर्स का एक सेमेस्टर किसी विदेशी विश्वविद्यालय में पढ़ सकेंगे। इससे उन्हें अलग-अलग शिक्षा प्रणालियों को समझने और वैश्विक माहौल में सीखने का मौका मिलेगा।
यह पहल Undergraduate Curriculum Framework 2022 का हिस्सा है, जिसे हाल ही में अकादमिक काउंसिल की मंजूरी मिली है। इसका उद्देश्य छात्रों को केवल किताबों तक सीमित न रखते हुए उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर की पढ़ाई और स्किल्स से जोड़ना है।
इसके साथ ही यूनिवर्सिटी ने ऑनलाइन पढ़ाई को भी बढ़ावा देने का फैसला किया है। छात्र अब SWAYAM और अन्य MOOCs प्लेटफॉर्म के जरिए कोर्स कर सकेंगे और इसके बदले उन्हें अकादमिक क्रेडिट दिए जाएंगे। यह व्यवस्था खास तौर पर उन छात्रों के लिए फायदेमंद होगी, जो अपनी पढ़ाई के साथ अतिरिक्त स्किल्स भी सीखना चाहते हैं।
क्रेडिट सिस्टम के तहत चार साल के अंडरग्रेजुएट कोर्स में अधिकतम 8 क्रेडिट, दो साल के पोस्टग्रेजुएट कोर्स में 4 क्रेडिट और एक साल के पीजी कोर्स में 2 क्रेडिट अर्जित किए जा सकेंगे। वहीं पीएचडी करने वाले छात्रों को अधिकतम 4 क्रेडिट तक की सुविधा मिलेगी। इससे छात्रों को अपनी पढ़ाई को अधिक लचीले तरीके से पूरा करने का विकल्प मिलेगा।
यूनिवर्सिटी ने 2026-27 सत्र के लिए BA प्रोग्राम में विषय संयोजन में बदलाव को भी मंजूरी दी है। जिन विषयों में कम दाखिले हो रहे हैं, उन्हें उर्दू, अरबी, फारसी, बंगाली और तेलुगु जैसे विषयों के साथ जोड़ा जाएगा, ताकि सीटों का बेहतर उपयोग हो सके और छात्रों को अधिक विकल्प मिल सकें।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल से छात्रों को न सिर्फ वैश्विक एक्सपोज़र मिलेगा, बल्कि उनकी रोजगार क्षमता भी बढ़ेगी। बदलते समय में जहां इंटरनेशनल अनुभव और मल्टी-स्किलिंग की मांग बढ़ रही है, वहां दिल्ली यूनिवर्सिटी का यह कदम छात्रों के लिए नए अवसर खोल सकता है।




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