
शिक्षा व्यवस्था को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। शिक्षा मंत्रालय ने मार्च 2026 के लिए स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (SMC) से जुड़ी नई गाइडलाइंस जारी की हैं। इन दिशानिर्देशों का मकसद स्कूलों और स्थानीय समुदाय के बीच बेहतर तालमेल बनाना, पारदर्शिता बढ़ाना और छात्रों के हितों को केंद्र में रखकर निर्णय प्रक्रिया को मजबूत करना है।
एक महीने में अनिवार्य होगा SMC गठन
नई व्यवस्था के तहत हर स्कूल को शैक्षणिक सत्र शुरू होने के एक महीने के भीतर SMC का गठन करना होगा। समिति का गठन लोकतांत्रिक और पारदर्शी तरीके से किया जाएगा, ताकि अभिभावकों, शिक्षकों और स्थानीय समुदाय की बराबर भागीदारी सुनिश्चित हो सके। इससे स्कूल प्रबंधन में लोगों की सीधी भागीदारी बढ़ेगी।
हर महीने बैठक, 50% उपस्थिति जरूरी
गाइडलाइंस में यह भी साफ किया गया है कि SMC की बैठक अब कम से कम महीने में एक बार आयोजित करना अनिवार्य होगा। बैठक को प्रभावी बनाने के लिए कम से कम 50 प्रतिशत सदस्यों की उपस्थिति जरूरी रखी गई है। इससे लिए गए फैसलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है।
तीन साल का स्कूल डेवलपमेंट प्लान
हर स्कूल को अब तीन साल का स्कूल डेवलपमेंट प्लान (SDP) तैयार करना होगा, जिसे हर साल अपडेट किया जाएगा। इस योजना के जरिए स्कूल अपने शैक्षणिक और बुनियादी ढांचे से जुड़े लक्ष्यों को तय कर सकेंगे और योजनाबद्ध तरीके से विकास कर पाएंगे।
अलग-अलग क्षेत्रों के लिए उप-समितियां
स्कूलों को सलाह दी गई है कि वे अकादमिक, बुनियादी ढांचे और अन्य जरूरी क्षेत्रों के लिए उप-समितियां बनाएं। इससे खास मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर सुधार करना आसान होगा और काम की निगरानी बेहतर तरीके से हो सकेगी।
संसाधन जुटाने में SMC की सक्रिय भूमिका
नई गाइडलाइंस के अनुसार SMC को केवल निगरानी तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि उसे संसाधन जुटाने में भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। इसके लिए अभिभावकों, पूर्व छात्रों, स्वयंसेवकों और स्थानीय संस्थाओं को जोड़ने पर जोर दिया गया है। साथ ही CSR के माध्यम से भी सहयोग लेने की बात कही गई है, जिससे स्कूलों को अतिरिक्त संसाधन मिल सकें।
सरकारी योजनाओं की निगरानी पर जोर
SMC को अब प्रमुख सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी की जिम्मेदारी भी दी गई है। इसमें समग्र शिक्षा अभियान, पीएम पोषण योजना, उल्लास योजना और पीएम श्री योजना जैसी योजनाएं शामिल हैं। इसके अलावा छात्रावास और छात्र कल्याण से जुड़े कार्यों पर भी नजर रखी जाएगी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप बदलाव
ये सभी गाइडलाइंस राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप तैयार की गई हैं। इसका उद्देश्य बालवाटिका से लेकर कक्षा 12 तक शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है। साथ ही छात्रों की उपस्थिति, शिक्षकों की भागीदारी और शैक्षणिक प्रदर्शन की नियमित निगरानी भी सुनिश्चित की जाएगी।
SMC की संरचना क्या होगी
SMC में अभिभावकों, शिक्षकों, स्थानीय प्रतिनिधियों और शिक्षा विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा। समिति में सदस्यों की संख्या स्कूल में छात्रों की संख्या के आधार पर 12 से 25 के बीच तय की गई है, ताकि संतुलित और प्रभावी निर्णय लिए जा सकें।
क्या बदलेगा जमीनी स्तर पर
नई गाइडलाइंस के लागू होने से स्कूलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है। निर्णय प्रक्रिया में अभिभावकों और समुदाय की भागीदारी बढ़ेगी, जिससे छात्रों की जरूरतों को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा।
कुल मिलाकर, यह पहल शिक्षा व्यवस्था को केवल प्रशासनिक ढांचे तक सीमित रखने के बजाय उसे सामुदायिक भागीदारी के साथ जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।




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