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ISRO की ‘रॉकेट वुमन’ नंदिनी हरिनाथ की साड़ी पहुंची अमेरिका के मशहूर म्यूजियम में, मंगलयान मिशन से जुड़ी है खास कहानी

ISRO की ‘रॉकेट वुमन’ नंदिनी हरिनाथ की साड़ी पहुंची अमेरिका के मशहूर म्यूजियम में, मंगलयान मिशन से जुड़ी है खास कहानी

ISRO की ‘रॉकेट वुमन’ नंदिनी हरिनाथ की साड़ी पहुंची अमेरिका के मशहूर म्यूजियम में, मंगलयान मिशन से जुड़ी है खास कहानी

अमेरिका के वॉशिंगटन डीसी स्थित दुनिया के प्रतिष्ठित संग्रहालयों में शामिल स्मिथसोनियन नेशनल एयर एंड स्पेस म्यूजियम में इन दिनों एक भारतीय साड़ी चर्चा का विषय बनी हुई है। यह कोई साधारण साड़ी नहीं, बल्कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की वरिष्ठ वैज्ञानिक नंदिनी हरिनाथ की साड़ी है, जिसे अब संग्रहालय की प्रदर्शनी में शामिल किया गया है।

इस खबर के सामने आने के बाद लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इस साड़ी में ऐसा क्या खास है कि उसे दुनिया के सबसे बड़े एयर एंड स्पेस म्यूजियम में जगह मिली। दरअसल, यह साड़ी भारत के ऐतिहासिक मंगलयान मिशन की सफलता और उसमें महिलाओं की भूमिका का प्रतीक मानी जा रही है।

मंगलयान मिशन से जुड़ी है यह साड़ी

स्मिथसोनियन म्यूजियम में प्रदर्शित यह साड़ी नंदिनी हरिनाथ ने उस दौरान पहनी थी जब वे भारत के मार्स ऑर्बिटर मिशन यानी मंगलयान मिशन में अहम जिम्मेदारी निभा रही थीं।

नंदिनी हरिनाथ मिशन की डेप्युटी ऑपरेशंस डायरेक्टर थीं और उन्होंने मिशन की योजना से लेकर संचालन तक कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली थीं। भारत का मंगलयान मिशन साल 2013 में लॉन्च हुआ था और 2014 में सफलतापूर्वक मंगल की कक्षा में पहुंचा था। इस उपलब्धि के साथ भारत पहली कोशिश में मंगल तक पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश बना था। साथ ही भारत मंगल ग्रह तक पहुंचने वाला पहला एशियाई देश और दुनिया का चौथा देश बना था।

आठ साल तक सक्रिय रहा था मंगलयान

मिशन को शुरुआत में लगभग छह से दस महीने तक चलाने की योजना बनाई गई थी, लेकिन मंगलयान ने उम्मीद से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया। यह अंतरिक्ष यान करीब आठ वर्षों तक मंगल की कक्षा में सक्रिय रहा और ग्रह की सतह तथा वातावरण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां भेजता रहा।

स्मिथसोनियन म्यूजियम ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में भी इस उपलब्धि का जिक्र किया है। संग्रहालय के अनुसार यह साड़ी केवल एक परिधान नहीं, बल्कि भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों और अंतरिक्ष अनुसंधान में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का प्रतीक है।

क्यों खास मानी जा रही है यह प्रदर्शनी

म्यूजियम में साड़ी को एक डमी पर प्रदर्शित किया गया है। लाल और नीले रंग की डिजाइन वाली इस साड़ी के साथ ब्लाउज भी रखा गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रदर्शनी भारतीय वैज्ञानिकों, खासकर महिला वैज्ञानिकों के योगदान को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलने का बड़ा उदाहरण है। अंतरिक्ष विज्ञान जैसे क्षेत्र में महिलाओं की सफलता को दर्शाने के लिए यह प्रदर्शनी काफी अहम मानी जा रही है।

कौन हैं नंदिनी हरिनाथ?

नंदिनी हरिनाथ भारत की प्रमुख अंतरिक्ष वैज्ञानिकों में गिनी जाती हैं। उनका पालन-पोषण ऐसे परिवार में हुआ जहां शिक्षा को काफी महत्व दिया जाता था। उनके पिता इंजीनियर थे जबकि उनकी मां गणित की शिक्षिका थीं।

उन्होंने इंजीनियरिंग में स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई की और बाद में ISRO से जुड़ गईं। नंदिनी हरिनाथ ने अपने करियर में 14 से अधिक अंतरिक्ष मिशनों में योगदान दिया है। हालांकि उन्हें सबसे ज्यादा पहचान मंगलयान मिशन से मिली, जिसके बाद उन्हें भारत की “रॉकेट वुमन” के रूप में जाना जाने लगा।

भारत की वैज्ञानिक ताकत का प्रतीक बनी साड़ी

स्मिथसोनियन जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय में किसी भारतीय वैज्ञानिक की साड़ी को प्रदर्शित किया जाना भारत के लिए सम्मान की बात माना जा रहा है। यह केवल एक कपड़ा नहीं, बल्कि उस ऐतिहासिक पल की याद है जब भारत ने अंतरिक्ष विज्ञान में दुनिया को अपनी ताकत दिखाई थी।

यह प्रदर्शनी आने वाली पीढ़ियों, खासकर विज्ञान और अंतरिक्ष क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देखने वाली लड़कियों के लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत बन सकती है।

Asmita Sarkar

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