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Questions Raised Again Over NTA: Irregularities in NEET, JEE, and CUET Heighten Student Anxiety

NTA पर फिर उठे सवाल: NEET, JEE और CUET में गड़बड़ियों ने बढ़ाई छात्रों की चिंता

Questions Raised Again Over NTA: Irregularities in NEET, JEE, and CUET Heighten Student Anxiety

देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करने वाली राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी National Testing Agency (NTA) एक बार फिर विवादों में है। नीट, जेईई, सीयूईटी और यूजीसी-नेट जैसी परीक्षाओं में सामने आई गड़बड़ियों ने एजेंसी की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले कुछ वर्षों से लगातार पेपर लीक, आंसर-की में त्रुटियां और परीक्षा प्रबंधन से जुड़ी शिकायतों ने छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है।

देशभर में मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों छात्र एनटीए पर निर्भर हैं। लेकिन हालिया घटनाओं ने यह बहस तेज कर दी है कि क्या एजेंसी इतनी बड़ी परीक्षाओं को निष्पक्ष और सुरक्षित तरीके से आयोजित करने में सक्षम है।

NEET और JEE में लगातार सामने आ रही हैं खामियां

वर्ष 2024 में नीट-यूजी परीक्षा को लेकर बड़े स्तर पर पेपर लीक के आरोप लगे थे। इसके बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाई थी। कई सुझाव भी सामने आए, लेकिन दो साल बाद भी स्थिति में बहुत बड़ा बदलाव दिखाई नहीं देता।

हालांकि नीट-यूजी 2025 अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई थी, लेकिन कई परीक्षा केंद्रों पर बिजली कटौती और तकनीकी समस्याओं के कारण छात्र अदालत तक पहुंचे थे। वहीं इस साल 6 मई को जारी हुई नीट-यूजी प्रोविजनल आंसर-की में फिजिक्स के न्यूमेरिकल सवालों को लेकर छात्रों ने गंभीर आपत्तियां दर्ज कराईं।

इससे पहले Joint Entrance Examination यानी जेईई मेन की आंसर-की में भी बदलाव करना पड़ा था। छात्रों की शिकायतों के बाद केमिस्ट्री सेक्शन में 19 त्रुटियों को सुधारा गया। ऐसे मामलों ने एजेंसी की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल और गहरे कर दिए हैं।

CUET में सेंटर आवंटन को लेकर भी हुआ विवाद

Common University Entrance Test के दौरान भी हजारों छात्रों ने शिकायत की थी कि उन्हें अपने शहर से सैकड़ों किलोमीटर दूर परीक्षा केंद्र दिए गए। कई छात्रों को दूसरे राज्यों तक जाना पड़ा, जिससे आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ा।

हालांकि बाद में एनटीए ने कुछ मामलों में सुधार किया, लेकिन लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने छात्रों के बीच अव्यवस्था और लापरवाही की धारणा को मजबूत किया है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इन गलतियों का असर केवल परीक्षा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और करियर पर भी पड़ता है।

गठन के बाद से विवादों में रही है एजेंसी

2017 में गठन के बाद से एनटीए कई बार सवालों के घेरे में रही है। कभी प्रश्नपत्र छपाई के दौरान लीक होने के आरोप लगे, तो कभी परिवहन व्यवस्था में सुरक्षा में कमी की बातें सामने आईं। कुछ मामलों में प्रश्नपत्र तैयार करने वाली टीम पर भी सवाल उठे।

स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि एजेंसी के अधिकारियों को छात्रों और अभिभावकों से खुद अपील करनी पड़ी कि यदि किसी के पास पेपर लीक से जुड़ी जानकारी हो तो तुरंत एजेंसी को सूचित करें। इससे परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा व्यवस्था पर भी बहस तेज हो गई।

NEET परीक्षा रद्द होने से बढ़ा विवाद

हालिया विवादों में सबसे बड़ा मामला नीट-यूजी परीक्षा से जुड़ा रहा। आरोप लगे कि परीक्षा के कई सवाल पहले से सोशल मीडिया और कुछ गेस पेपर में उपलब्ध थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रश्नपत्र के करीब 120 सवाल परीक्षा से पहले प्रसारित हो चुके थे।

इन आरोपों को गंभीर मानते हुए एजेंसी को परीक्षा रद्द करने का फैसला लेना पड़ा। इससे पहले 2015 में All India Pre-Medical Test परीक्षा भी पेपर लीक के कारण रद्द की गई थी। उस समय सुप्रीम कोर्ट ने ब्लूटूथ और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के जरिए नकल के सबूत मिलने के बाद पूरी परीक्षा दोबारा कराने का आदेश दिया था।

करीब एक दशक बाद फिर उसी तरह की घटनाओं ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

लगातार बदलते नेतृत्व से भी बढ़ी परेशानी

विशेषज्ञ मानते हैं कि एजेंसी में स्थिर नेतृत्व की कमी भी समस्याओं की एक बड़ी वजह हो सकती है। जून 2024 में पेपर लीक विवाद के बाद तत्कालीन महानिदेशक सुबोध कुमार सिंह को हटाया गया था। इसके बाद अंतरिम व्यवस्था के तहत अतिरिक्त प्रभार दिया गया।

फिर आईएएस अधिकारी राजेश लखानी को जिम्मेदारी सौंपी गई, लेकिन बाद में अभिषेक सिंह को नया प्रभार दिया गया। दो वर्षों से कम समय में तीन अलग-अलग अधिकारियों का एजेंसी प्रमुख बनना भी प्रशासनिक अस्थिरता की ओर इशारा करता है।

सुधारों की सिफारिशें अब तक अधूरी

राधाकृष्णन पैनल ने परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे। इनमें मल्टी-सेशन परीक्षा मॉडल, बायोमेट्रिक सत्यापन, एआई आधारित ऑथेंटिकेशन, एन्क्रिप्टेड प्रश्नपत्र, डिजिटल परीक्षा प्रणाली और हाई-स्पीड प्रिंटिंग सिस्टम जैसे प्रस्ताव शामिल थे।

इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों के लिए मोबाइल टेस्टिंग सेंटर और कोचिंग संस्थानों की निगरानी जैसे सुझाव भी दिए गए थे। लेकिन अधिकांश सुधार अब तक पूरी तरह लागू नहीं हो सके हैं।

छात्रों का भरोसा लौटाना सबसे बड़ी चुनौती

शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नई घोषणाओं से स्थिति नहीं सुधरेगी। परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, तकनीकी सुरक्षा और जवाबदेही बढ़ाने की जरूरत है। हर साल लाखों छात्र इन परीक्षाओं के जरिए अपने करियर का भविष्य तय करते हैं, इसलिए छोटी लापरवाही भी बड़े असर छोड़ सकती है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या एनटीए आने वाले समय में छात्रों का भरोसा दोबारा जीत पाएगी या फिर परीक्षा व्यवस्था में किसी बड़े बदलाव की जरूरत पड़ेगी।

 

 

 

 

Asmita Sarkar

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