
नीट-यूजी परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक विवाद के बाद अब नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) आगामी 21 जून को होने वाली दोबारा परीक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क दिखाई दे रही है। परीक्षा में अब एक महीने से भी कम समय बचा है और एजेंसी इस बार किसी भी तरह की चूक से बचने के लिए ‘जीरो ट्रस्ट’ नीति के तहत काम कर रही है। इसका मतलब है कि सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर अब हर स्तर पर अतिरिक्त निगरानी रखी जा रही है।
पिछली परीक्षा के बाद छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी देखने को मिली थी। पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया पर उठे सवालों ने देशभर में चिंता बढ़ा दी थी। इसी विवाद के बाद दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया था। फिलहाल इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रही है।
कम समय में परीक्षा कराना NTA के लिए बड़ी चुनौती
सूत्रों के मुताबिक, केवल 30 दिनों के भीतर इतने बड़े स्तर पर परीक्षा दोबारा आयोजित करना एजेंसी के लिए आसान नहीं है। आमतौर पर इस स्तर की राष्ट्रीय परीक्षा की तैयारी में कई महीने लगते हैं, लेकिन इस बार समय बेहद सीमित है।
एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि समय तेजी से निकल रहा है और छोटी सी गलती भी बड़ा विवाद खड़ा कर सकती है। यही वजह है कि एजेंसी हर प्रक्रिया की कई स्तरों पर जांच कर रही है ताकि किसी भी तरह की कमी न रह जाए।
एनटीए का मानना है कि छात्रों का भरोसा बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। एजेंसी के सामने सिर्फ परीक्षा कराने की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पूरी प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाना भी उतना ही जरूरी है।
पेपर लीक विवाद के बाद सिस्टम में बड़े बदलाव
विवाद के बाद NTA ने अपने आंतरिक सिस्टम और सुरक्षा प्रोटोकॉल में कई बदलाव किए हैं। सूत्रों के अनुसार, अब हर प्रक्रिया में पहले से ज्यादा क्रॉस-चेकिंग की जा रही है। एजेंसी उन सभी कमजोरियों को दूर करने की कोशिश कर रही है जिनकी वजह से पिछली बार सवाल उठे थे।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, खासकर टेलीग्राम चैनलों पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है। जांच एजेंसियों को शक है कि पेपर लीक में ऐसे प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल किया गया हो सकता है। इसी कारण डिजिटल मॉनिटरिंग को भी मजबूत किया गया है।
निष्पक्ष परीक्षा के लिए गुप्त रणनीति पर काम
सूत्रों का कहना है कि इस बार कई सुरक्षा उपाय ऐसे भी हैं जिन्हें सार्वजनिक नहीं किया जा रहा। एजेंसी का मानना है कि अगर सभी रणनीतियों की जानकारी बाहर आ गई, तो नकल और पेपर लीक गिरोह सिस्टम की कमजोरियों को समझने की कोशिश कर सकते हैं।
अंदरूनी स्तर पर भी अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि लंबे समय से सिस्टम से जुड़े लोग भी कभी-कभी गड़बड़ी में शामिल हो सकते हैं। ऐसे मामलों को रोकना सबसे कठिन होता है, इसलिए इस बार हर स्तर पर जवाबदेही तय की जा रही है।
जांच पूरी होने के बाद सामने आएगा पूरा सच
सूत्रों के मुताबिक, पिछली बार कथित तौर पर प्रश्नपत्र का केवल एक हिस्सा प्रभावित हुआ था। अधिकारियों का दावा है कि यदि लीक प्रिंटिंग प्रेस, बैंक या परीक्षा केंद्र से हुआ होता, तो पूरा प्रश्नपत्र बाहर आ सकता था। हालांकि इस मामले में अंतिम सच CBI जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
NTA फिलहाल जांच प्रक्रिया में हस्तक्षेप किए बिना अपनी तैयारियों पर ध्यान दे रहा है। 21 जून को होने वाली परीक्षा को एजेंसी अपनी विश्वसनीयता और नई सुरक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी परीक्षा मान रही है।
छात्रों और अभिभावकों की नजरें अब 21 जून पर
देशभर के लाखों मेडिकल अभ्यर्थी और उनके परिवार अब दोबारा परीक्षा को लेकर चिंतित भी हैं और उम्मीद भी लगाए बैठे हैं। छात्रों की मांग है कि इस बार परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष, सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से आयोजित हो ताकि मेहनत करने वाले उम्मीदवारों को किसी तरह का नुकसान न उठाना पड़े।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परीक्षा केवल छात्रों के भविष्य से जुड़ी नहीं है, बल्कि देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की विश्वसनीयता से भी जुड़ी हुई है।




Add comment