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भारत में बदल रहा है स्टूडेंट स्टार्टअप इकोसिस्टम, अब डीप टेक की ओर बढ़ रहे युवा उद्यमी

भारत में बदल रहा है स्टूडेंट स्टार्टअप इकोसिस्टम, अब डीप टेक की ओर बढ़ रहे युवा उद्यमी

भारत में बदल रहा है स्टूडेंट स्टार्टअप इकोसिस्टम, अब डीप टेक की ओर बढ़ रहे युवा उद्यमी

भारत का स्टूडेंट स्टार्टअप इकोसिस्टम अब पहले की तुलना में तेजी से बदलता नजर आ रहा है। जहां कुछ साल पहले तक छात्र आधारित स्टार्टअप मुख्य रूप से ऐप, एडटेक प्लेटफॉर्म और डिलीवरी सेवाओं तक सीमित थे, वहीं अब युवा उद्यमी डीप टेक (Deep Tech) सेक्टर की ओर बढ़ रहे हैं। यह ऐसा क्षेत्र है जहां बिजनेस केवल डिजिटल सेवाओं पर नहीं, बल्कि रिसर्च, विशेष तकनीकी ज्ञान और लंबे समय तक समस्या समाधान पर आधारित होते हैं।

हाल ही में जारी Campus Fund की रिपोर्ट के अनुसार, डीप टेक अब छात्र-नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स के सबसे तेजी से उभरते क्षेत्रों में शामिल हो चुका है। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि नई पीढ़ी के उद्यमी अब केवल उपभोक्ता आधारित ऐप्स तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स, बायोटेक्नोलॉजी, एडवांस्ड मटेरियल्स, क्लाइमेट टेक्नोलॉजी, क्वांटम कंप्यूटिंग और डिफेंस टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं।

यह बदलाव भारत के कैंपस इनोवेशन कल्चर के परिपक्व होने की ओर भी इशारा करता है। डीप टेक स्टार्टअप शुरू करना सामान्य स्टार्टअप की तुलना में कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण माना जाता है। इसके लिए केवल एक अच्छा बिजनेस आइडिया काफी नहीं होता, बल्कि रिसर्च लैब, तकनीकी मार्गदर्शन, अनुभवी मेंटर्स, बौद्धिक संपदा (IP) सहायता, लंबी अवधि की फंडिंग और इंडस्ट्री सपोर्ट की भी जरूरत पड़ती है।

छात्रों के लिए यह सफर लंबा और जटिल जरूर हो सकता है, लेकिन इसका प्रभाव भी काफी बड़ा हो सकता है। यही कारण है कि अब उच्च शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी पहले से अधिक बढ़ गई है। विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को उद्यमिता को केवल पिच प्रतियोगिताओं या इन्क्यूबेशन कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रखना होगा। उन्हें अकादमिक रिसर्च, छात्र प्रोजेक्ट्स, प्रोटोटाइपिंग सुविधाओं और इंडस्ट्री पार्टनरशिप के बीच मजबूत तालमेल बनाना होगा ताकि कैंपस में विकसित डीप टेक आइडिया वास्तविक बिजनेस में बदल सकें।

भारत का व्यापक स्टार्टअप इकोसिस्टम भी इस बदलाव की चुनौतियों को दिखाता है। Nasscom और Zinnov की ‘India’s Tech Start-Up Report 2025’ के अनुसार, देश के कई स्टार्टअप शुरुआती चरण के बाद बड़े स्तर पर विस्तार करने में कठिनाइयों का सामना करते हैं। डीप टेक स्टार्टअप्स के लिए यह चुनौती और भी बड़ी हो जाती है क्योंकि उन्हें लंबे समय तक निवेश, विशेष प्रतिभा और शुरुआती बाजार पहुंच की जरूरत होती है।

भारत सरकार के नेशनल डीप टेक स्टार्टअप पॉलिसी फ्रेमवर्क ने भी रिसर्च आधारित स्टार्टअप्स को समर्थन देने की आवश्यकता पर जोर दिया है। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि डीप टेक कंपनियों को पारंपरिक डिजिटल बिजनेस की तुलना में परीक्षण, व्यावसायिक उपयोग और विस्तार में अधिक समय लगता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि छात्र उद्यमियों के बीच डीप टेक का बढ़ता रुझान भारतीय उच्च शिक्षा के लिए एक बड़ा अवसर साबित हो सकता है। यदि विश्वविद्यालय रिसर्च को पूंजी, इंडस्ट्री और नीति समर्थन से जोड़ने में सफल रहते हैं, तो छात्र स्टार्टअप केवल छोटे डिजिटल बिजनेस तक सीमित नहीं रहेंगे। वे जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य सेवाएं, रक्षा, विनिर्माण और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी बड़ी राष्ट्रीय चुनौतियों के समाधान में भी अहम भूमिका निभा सकते हैं।

Asmita Sarkar

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