
सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली से जुड़े ठेके और COEMPT Edutech को अनुबंध दिए जाने पर उठ रहे सवालों को खारिज करते हुए कहा है कि पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत और पारदर्शी तरीके से पूरी की गई थी।
CBSE मुख्यालय की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में बोर्ड ने साफ कहा कि एजेंसी को ठेका देने में सामान्य वित्तीय नियमों (General Financial Rules) का पूरी तरह पालन किया गया। बोर्ड के अनुसार, 2026 की बोर्ड परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन के लिए 28 अगस्त 2025 को केंद्रीय सार्वजनिक खरीद पोर्टल पर निविदा (RFP) जारी की गई थी। इसके बाद पात्र बोलीदाता को तय प्रक्रिया के अनुसार अनुबंध दिया गया।
क्या है ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली?
CBSE पिछले कुछ वर्षों से उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में डिजिटल प्रक्रिया को बढ़ावा दे रहा है। ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली के तहत उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करके परीक्षकों को ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाता है। इससे मूल्यांकन प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और रिकॉर्ड आधारित बनाने का दावा किया जाता है। बोर्ड का कहना है कि इस प्रणाली से परिणाम तैयार करने में समय की बचत होती है और मानवीय त्रुटियों को कम किया जा सकता है।
हालांकि हाल के दिनों में इसी प्रणाली को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक स्तर पर कई सवाल उठाए गए हैं।
राहुल गांधी ने उठाई स्वतंत्र जांच की मांग
यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने CBSE की OSM प्रणाली और COEMPT Edutech को दिए गए ठेके पर केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने इस मामले में स्वतंत्र न्यायिक जांच और विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने की मांग की।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि COEMPT Edutech पहले “Globarena” नाम से काम करती थी और उसका नाम तेलंगाना में 2019 और 2023 के बोर्ड परीक्षा विवादों में सामने आया था। उन्होंने दावा किया कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग से जुड़ी कथित गड़बड़ियों के कारण तेलंगाना में कई छात्रों को गंभीर मानसिक दबाव का सामना करना पड़ा था।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कंपनी का पुराना रिकॉर्ड सार्वजनिक होने के बावजूद उसे CBSE का ठेका क्यों दिया गया। साथ ही यह पूछा कि अनुबंध प्रक्रिया में किन मानकों का पालन किया गया और क्या किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी हुई।
CBSE ने आरोपों को बताया भ्रामक
CBSE ने इन आरोपों को तथ्यहीन और भ्रामक बताते हुए कहा कि बोर्ड की खरीद प्रक्रिया पूरी तरह संस्थागत नियमों के अनुसार की गई थी। बोर्ड के मुताबिक निविदा प्रक्रिया खुली और प्रतिस्पर्धात्मक थी, जिसमें पात्र कंपनियों को भाग लेने का अवसर दिया गया।
बोर्ड ने यह भी संकेत दिया कि सोशल मीडिया पर चल रही कई जानकारियां अधूरी या संदर्भ से हटकर पेश की जा रही हैं। हालांकि CBSE ने तेलंगाना से जुड़े आरोपों पर अलग से विस्तृत टिप्पणी नहीं की।
छात्रों और अभिभावकों के बीच बढ़ी चिंता
ऑन-स्क्रीन मार्किंग को लेकर चल रही बहस के बीच छात्रों और अभिभावकों में भी चिंता बढ़ी है। कई लोग यह जानना चाहते हैं कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली कितनी सुरक्षित और भरोसेमंद है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीक आधारित मूल्यांकन भविष्य की जरूरत है, लेकिन इसके साथ पारदर्शिता, डेटा सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि बोर्ड परीक्षाओं जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाली तकनीकी प्रणालियों की नियमित ऑडिटिंग और स्वतंत्र समीक्षा जरूरी होनी चाहिए ताकि छात्रों का भरोसा बना रहे।
आगे क्या?
फिलहाल CBSE ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है, लेकिन राजनीतिक आरोपों और सार्वजनिक बहस के बाद यह मुद्दा आने वाले दिनों में और चर्चा में रह सकता है। यदि जांच की मांग तेज होती है तो केंद्र सरकार या संबंधित एजेंसियां इस मामले पर आगे कोई निर्णय ले सकती हैं।
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल, डिजिटल मूल्यांकन की पारदर्शिता और सरकारी ठेकों की प्रक्रिया को राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बना दिया है।




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