
भारत अब सिर्फ अपनी संस्कृति, खान-पान और त्योहारों के लिए ही नहीं, बल्कि बेहतर और किफायती शिक्षा के लिए भी दुनिया में तेजी से पहचान बना रहा है। नेपाल, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, अफ्रीकी देशों और कई एशियाई देशों के छात्र बड़ी संख्या में भारत आकर पढ़ाई करना पसंद कर रहे हैं। मेडिकल, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट और आईटी जैसे प्रोफेशनल कोर्स भारत में अपेक्षाकृत कम खर्च में उपलब्ध होने के कारण विदेशी छात्रों का रुझान लगातार बढ़ रहा है।
शिक्षा से जुड़ी रिपोर्टों और सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर साल 70 हजार से ज्यादा विदेशी छात्र उच्च शिक्षा के लिए आते हैं। साल 2025 में देश के अलग-अलग कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में करीब 72,218 विदेशी छात्र पढ़ाई कर रहे थे। ये छात्र लगभग 200 देशों से आए हैं। भारतीय शिक्षा संस्थानों में आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई और बहुसांस्कृतिक माहौल विदेशी छात्रों को आकर्षित कर रहा है।
विदेशों की तुलना में भारत में शिक्षा का खर्च काफी कम माना जाता है। अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में जहां उच्च शिक्षा पर लाखों रुपये खर्च होते हैं, वहीं भारत में उसी स्तर की पढ़ाई कम लागत में पूरी की जा सकती है। यही वजह है कि आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यम वर्गीय विदेशी छात्र भारत को एक बेहतर विकल्प के रूप में देख रहे हैं।
भारत सरकार भी विदेशी छात्रों को आकर्षित करने के लिए कई स्कॉलरशिप योजनाएं चला रही है। Indian Council for Cultural Relations (ICCR) Scholarship के तहत हर साल हजारों विदेशी छात्रों को भारत में पढ़ाई का अवसर दिया जाता है। इसके अलावा Atal Bihari Vajpayee General Scholarship Scheme के माध्यम से 100 से अधिक देशों के छात्रों को भारतीय कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति उपलब्ध कराई जाती है।
मेडिकल और टेक्निकल शिक्षा के क्षेत्र में भारत की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। कई विदेशी छात्रों का कहना है कि भारत में उन्हें पढ़ाई के साथ परिवार जैसा माहौल मिलता है। यहां की संस्कृति, खान-पान और लोगों का व्यवहार उन्हें जल्दी अपनापन महसूस कराता है। यही कारण है कि पढ़ाई के साथ-साथ सांस्कृतिक अनुभव भी विदेशी छात्रों के लिए भारत को खास बनाता है।
हालांकि दूसरी ओर बड़ी संख्या में भारतीय छात्र भी विदेशों में पढ़ाई के लिए जा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2024 में करीब 13.35 लाख भारतीय छात्र विदेशों में शिक्षा हासिल कर रहे थे। कनाडा, अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी भारतीय छात्रों की सबसे पसंदीदा मंजिल बने हुए हैं। कनाडा में करीब 4.27 लाख भारतीय छात्र पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि अमेरिका में 3.37 लाख से ज्यादा भारतीय छात्र मौजूद हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर नौकरी, वैश्विक अनुभव और प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में पढ़ाई की इच्छा भारतीय युवाओं को विदेश की ओर आकर्षित करती है। लेकिन अब भारत में भी तेजी से आधुनिक शिक्षा सुविधाएं, रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर और अंतरराष्ट्रीय स्तर के संस्थान विकसित हो रहे हैं, जिससे आने वाले वर्षों में तस्वीर बदल सकती है।
नई शिक्षा नीति, डिजिटल लर्निंग और रिसर्च पर बढ़ते फोकस के कारण भारत अब दुनिया के बड़े शिक्षा केंद्र के रूप में उभर रहा है। विदेशी छात्रों की बढ़ती संख्या यह संकेत देती है कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था पर वैश्विक भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आने वाले समय में भारत रिसर्च, इनोवेशन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर और ध्यान देता है, तो दुनिया के और अधिक छात्र यहां पढ़ाई के लिए आ सकते हैं।




Add comment