
सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 के रिजल्ट जारी होने के बाद देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच नाराजगी बढ़ती दिखाई दे रही है। इस बार सबसे ज्यादा सवाल बोर्ड की ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन प्रणाली को लेकर उठ रहे हैं। बड़ी संख्या में छात्र अपने अंकों से असंतुष्ट नजर आ रहे हैं और यही वजह है कि रिकॉर्ड स्तर पर रिचेकिंग और स्कैन कॉपी के लिए आवेदन किए जा रहे हैं। शिक्षा जगत में इसे अब तक का सबसे बड़ा रिव्यू और वेरिफिकेशन संकट माना जा रहा है।
सीबीएसई के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं की करीब 98.60 लाख उत्तर पुस्तिकाओं का डिजिटल मूल्यांकन किया गया। परीक्षा में लगभग 17.68 लाख छात्र शामिल हुए थे। रिजल्ट जारी होने के बाद जैसे ही बोर्ड ने मार्क्स वेरिफिकेशन और स्कैन कॉपी डाउनलोड की सुविधा शुरू की, कुछ ही घंटों में रिकॉर्ड संख्या में आवेदन आने लगे।
जानकारी के मुताबिक पोर्टल खुलने के शुरुआती तीन घंटे के भीतर ही 1.26 लाख से ज्यादा छात्रों ने आवेदन कर दिया, जिससे वेबसाइट पर भारी दबाव बढ़ गया और कई बार सर्वर काम करना बंद कर गया। अब तक चार लाख से अधिक छात्र करीब 11.31 लाख उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी और रिचेकिंग के लिए आवेदन कर चुके हैं। यह कुल परीक्षार्थियों का लगभग 23 प्रतिशत माना जा रहा है। यानी लगभग हर चौथा छात्र अपने परिणाम को लेकर दोबारा जांच की मांग कर रहा है।
पिछले साल की तुलना में इस बार रिचेकिंग आवेदन में बड़ा उछाल देखा गया है। वर्ष 2025 में लगभग 1.31 लाख छात्रों ने 2.82 लाख कॉपियों की जांच और वेरिफिकेशन के लिए आवेदन किया था। वहीं इस बार आवेदनों की संख्या चार लाख के पार पहुंच चुकी है। एक साल में यह बढ़ोतरी करीब 238 प्रतिशत मानी जा रही है। इसी वजह से सोशल मीडिया और शिक्षा क्षेत्र में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या सीबीएसई को मूल्यांकन प्रक्रिया में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं। हालांकि फिलहाल बोर्ड की ओर से दोबारा परीक्षा कराने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
रिचेकिंग प्रक्रिया शुरू होने के बाद से सीबीएसई का पोर्टल लगातार तकनीकी दबाव झेल रहा है। कई छात्रों ने शिकायत की है कि वेबसाइट पर बार-बार “Service Not Available” का संदेश दिखाई दे रहा है। कुछ छात्रों का कहना है कि एक पेज खोलने के लिए कई बार रिफ्रेश करना पड़ रहा है। कई अभिभावकों ने यह भी बताया कि देर रात के समय पोर्टल कुछ देर के लिए सही तरीके से काम करता है, जिसके कारण छात्र रातभर जागकर आवेदन करने को मजबूर हो रहे हैं। कुछ मामलों में छात्रों के बैंक खातों से शुल्क कट गया लेकिन आवेदन सफल नहीं हो पाया।
इस बार छात्र तीन स्तर पर अपनी आपत्तियां दर्ज करा रहे हैं। पहले चरण में मार्क्स वेरिफिकेशन के जरिए टोटलिंग और डेटा एंट्री की जांच कराई जा रही है। दूसरे चरण में छात्र स्कैन कॉपी मांग रहे हैं ताकि यह देखा जा सके कि किसी उत्तर का मूल्यांकन छूटा तो नहीं या अंक गलत तरीके से तो नहीं काटे गए। तीसरे चरण में छात्र चुनिंदा प्रश्नों के पुनर्मूल्यांकन की मांग कर रहे हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी सीबीएसई से पूरी रिपोर्ट मांगी है। मंत्रालय ने सर्वर क्रैश, गलत स्कैन कॉपी और धुंधली उत्तर पुस्तिकाओं से जुड़ी शिकायतों पर विस्तृत जानकारी तलब की है। सूत्रों के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया में शामिल बाहरी आईटी एजेंसियों की जिम्मेदारी तय करने को लेकर भी चर्चा चल रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि छात्रों की बढ़ती संख्या और डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली के बढ़ते इस्तेमाल के बीच सीबीएसई को तकनीकी ढांचे और मूल्यांकन प्रक्रिया दोनों को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि छात्रों का भरोसा बना रहे और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।




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