
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 के परिणाम इस बार चर्चा का विषय बने हुए हैं। इस साल घोषित रिजल्ट में गिरावट दर्ज की गई है और शुरुआती आंकड़ों के अनुसार यह पिछले सात वर्षों का सबसे कम प्रदर्शन माना जा रहा है। इसी के साथ बोर्ड की नई ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली भी विवादों के केंद्र में आ गई है।
दिल्ली के सरकारी स्कूलों में रिजल्ट गिरने के बाद कई शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने की खबर सामने आई है। इस कार्रवाई का गवर्नमेंट स्कूल टीचर्स एसोसिएशन (GSTA) ने विरोध किया है और इसे शिक्षकों के साथ अन्याय बताया है।
क्या है पूरा मामला?
CBSE ने इस साल पहली बार बड़े स्तर पर ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम लागू किया। इस प्रणाली में परीक्षकों को छात्रों की स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं को ऑनलाइन माध्यम से जांचना होता है। बोर्ड का उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया को तेज और अधिक पारदर्शी बनाना था।
हालांकि, कई शिक्षकों और मूल्यांकनकर्ताओं का कहना है कि इस नई व्यवस्था को बिना पर्याप्त तैयारी और परीक्षण के लागू कर दिया गया। उनका दावा है कि तकनीकी समस्याओं की वजह से मूल्यांकन प्रभावित हुआ, जिसका असर सीधे छात्रों के अंकों और रिजल्ट पर पड़ा।
GSTA ने उठाए सवाल
गवर्नमेंट स्कूल टीचर्स एसोसिएशन (GSTA) ने दिल्ली के शिक्षा मंत्री Ashish Sood को पत्र लिखकर मांग की है कि रिजल्ट में गिरावट के लिए शिक्षकों को जिम्मेदार ठहराना गलत है। संगठन ने उन सभी कारण बताओ नोटिसों को तुरंत वापस लेने की मांग की है जो शिक्षकों को जारी किए गए हैं।
GSTA के महासचिव अजय वीर यादव का कहना है कि संगठन ने पहले ही सुझाव दिया था कि OSM सिस्टम को पहले पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाए। इसके बाद उसके परिणामों और व्यवहारिक चुनौतियों का मूल्यांकन करके ही पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए था।
मूल्यांकन में आई तकनीकी दिक्कतें
शिक्षकों के अनुसार ऑन स्क्रीन मार्किंग के दौरान कई तकनीकी समस्याएं सामने आईं। कई मामलों में उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी धुंधली दिखाई दी, कुछ जगह गलत कॉपियां अपलोड होने की शिकायत मिली, जबकि कई उत्तर पुस्तिकाओं के पेज गायब होने जैसी समस्याएं भी सामने आईं।
इसके अलावा, डिजिटल स्कैन में छात्रों की लिखावट पढ़ने में भी दिक्कत हुई। शिक्षकों का कहना है कि इन समस्याओं के कारण परीक्षकों ने बेहद सावधानी के साथ नंबर दिए, जिससे छात्रों के अंक प्रभावित हुए।
क्या रिजल्ट पर पड़ा असर?
GSTA का दावा है कि OSM की तकनीकी खामियों की वजह से इस साल रिजल्ट में गिरावट देखने को मिली। संगठन का कहना है कि मूल्यांकन प्रक्रिया में आई दिक्कतों को नजरअंदाज कर केवल शिक्षकों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
शिक्षक संगठन ने मांग की है कि CBSE 12वीं रिजल्ट 2026 का विश्लेषण OSM प्रणाली की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए किया जाए और शिक्षकों को भेजे गए सभी शो-कॉज नोटिस व मेमोरेंडम वापस लिए जाएं।
डिजिटल मूल्यांकन पर बढ़ी बहस
इस पूरे विवाद के बाद शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक आधारित मूल्यांकन भविष्य की जरूरत हो सकती है, लेकिन इसे लागू करने से पहले पर्याप्त परीक्षण और प्रशिक्षण जरूरी है।
छात्रों और शिक्षकों दोनों के लिए यह जरूरी है कि नई प्रणालियां पारदर्शी होने के साथ-साथ व्यवहारिक भी हों, ताकि परीक्षा परिणामों की विश्वसनीयता बनी रहे।




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