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NEET-UG विवाद पर शशि थरूर का सरकार पर हमला, बोले- परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियां पूरी पीढ़ी के साथ विश्वासघात

NEET-UG विवाद पर शशि थरूर का सरकार पर हमला, बोले- परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियां पूरी पीढ़ी के साथ विश्वासघात

NEET-UG विवाद पर शशि थरूर का सरकार पर हमला, बोले- परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियां पूरी पीढ़ी के साथ विश्वासघात

राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई है। कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG से जुड़े कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रबंधन के मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बार-बार सामने आने वाली ऐसी घटनाएं केवल प्रशासनिक विफलता नहीं हैं, बल्कि देश के लाखों छात्रों के भविष्य और विश्वास के साथ गंभीर अन्याय हैं।

थरूर ने कहा कि जब छात्र महीनों और वर्षों तक कठिन तैयारी करते हैं, तब उन्हें एक निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा प्रक्रिया की उम्मीद होती है। लेकिन यदि परीक्षा के बाद पेपर लीक, अनियमितता, भ्रष्टाचार या परीक्षा रद्द होने जैसी खबरें सामने आती हैं, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान उन छात्रों को होता है जिन्होंने ईमानदारी से मेहनत की है।

उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में छात्रों को दोबारा परीक्षा की तैयारी करनी पड़ती है और उनके मानसिक दबाव के साथ-साथ करियर की योजनाएं भी प्रभावित होती हैं। उनके अनुसार, यह स्थिति किसी भी विकसित और जिम्मेदार परीक्षा प्रणाली के लिए चिंता का विषय है।

अंतरराष्ट्रीय परीक्षा प्रणालियों का दिया उदाहरण

कांग्रेस सांसद ने भारत की परीक्षा व्यवस्था की तुलना दुनिया के अन्य देशों में संचालित होने वाली प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं से भी की। उन्होंने कहा कि कई अंतरराष्ट्रीय परीक्षाएं वर्षों से पारदर्शी और भरोसेमंद तरीके से आयोजित की जाती रही हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि भारत में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं को लेकर बार-बार विवाद क्यों सामने आते हैं।

थरूर ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर ऐसी क्या कमियां हैं, जिनकी वजह से परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता और सुरक्षा पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश के युवाओं का भरोसा बनाए रखना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

केंद्र सरकार और परीक्षा एजेंसियों पर उठाए सवाल

थरूर ने परीक्षा प्रबंधन से जुड़े मुद्दों के लिए केंद्र सरकार, शिक्षा मंत्रालय और परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों की जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि बार-बार एक जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं तो केवल जांच से काम नहीं चलेगा, बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस सुधारात्मक कदम उठाने होंगे।

उनके अनुसार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, तकनीकी सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत किए बिना छात्रों का विश्वास पूरी तरह बहाल नहीं किया जा सकता।

छात्रों में बढ़ी चिंता

देश में मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में हर वर्ष लाखों छात्र हिस्सा लेते हैं। ऐसे में परीक्षा से जुड़ी किसी भी अनियमितता का सीधा असर बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों और उनके परिवारों पर पड़ता है। हाल के वर्षों में विभिन्न राष्ट्रीय परीक्षाओं को लेकर उठे विवादों ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर व्यापक बहस को जन्म दिया है।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाना समय की मांग है, ताकि छात्रों को समान अवसर मिल सके और उनकी मेहनत पर किसी तरह का सवाल न उठे।

परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग तेज

शशि थरूर के बयान ने एक बार फिर परीक्षा सुधारों की जरूरत को राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है। विपक्ष लगातार परीक्षा प्रबंधन में सुधार, जवाबदेही तय करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग कर रहा है।

राजनीतिक बयानबाजी से इतर, विशेषज्ञों का मानना है कि देश की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य दोनों के लिए बेहद जरूरी है। आने वाले समय में सरकार और संबंधित एजेंसियों के कदम इस दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

Asmita Sarkar

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