
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET UG) 2024 से जुड़े कथित पेपर लीक विवाद और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) व्यवस्था को लेकर संसद की एक स्थायी समिति ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) और CBSE से कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे हैं। समिति ने दोनों संस्थानों से विस्तृत लिखित जवाब मांगे हैं और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता, जवाबदेही तथा तकनीकी प्रक्रियाओं की गहन समीक्षा शुरू कर दी है।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर देश की प्रमुख परीक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्थाओं को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। खासतौर पर NEET UG 2024 परीक्षा को लेकर उठे विवादों के बाद परीक्षा संचालन और डेटा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर निगरानी बढ़ गई है।
NTA से पूछा गया, आखिर पेपर लीक की परिभाषा क्या है?
संसदीय समिति ने NTA से सबसे अहम सवाल यह पूछा है कि उसकी नजर में “पेपर लीक” की स्पष्ट परिभाषा क्या है। साथ ही एजेंसी से यह भी पूछा गया है कि वर्ष 2018 से अब तक उसके द्वारा आयोजित किसी परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक होने की कोई घटना सामने आई है या नहीं।
सूत्रों के अनुसार, यह सवाल पिछले सप्ताह हुई उस बैठक के बाद उठाया गया, जिसमें NTA अधिकारियों ने समिति के सामने अपना पक्ष रखा था। अधिकारियों का दावा था कि एजेंसी के सिस्टम से किसी भी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ। उनका कहना था कि कुछ प्रश्न कथित तौर पर “गेस पेपर” या अन्य माध्यमों से पहले से प्रसारित हो सकते हैं, लेकिन इसे तकनीकी रूप से पेपर लीक नहीं कहा जा सकता।
समिति अब इस दावे पर विस्तृत और लिखित स्पष्टीकरण चाहती है।
NEET UG 2024 मामले में स्वतंत्र जांच हुई या नहीं?
कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने NTA से यह भी पूछा है कि NEET UG 2024 में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच के अलावा एजेंसी ने कोई स्वतंत्र जांच कराई थी या नहीं।
इसके साथ ही समिति ने पिछले तीन वर्षों में NTA के कर्मचारियों की संख्या, 2022 के बाद हुई नई नियुक्तियों और उच्च शिक्षा विभाग को भेजी गई वार्षिक रिपोर्ट से जुड़ी जानकारी भी मांगी है। समिति यह समझना चाहती है कि बढ़ती परीक्षा जिम्मेदारियों के बीच एजेंसी की संस्थागत क्षमता कितनी मजबूत हुई है।
राधाकृष्णन समिति की 101 सिफारिशों पर मांगा गया अपडेट
NEET विवाद के बाद केंद्र सरकार द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट भी जांच के दायरे में है। पूर्व ISRO प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली समिति ने NTA की कार्यप्रणाली, परीक्षा संचालन, साइबर सुरक्षा और पारदर्शिता में सुधार के लिए 101 सिफारिशें दी थीं।
संसदीय समिति ने NTA से प्रत्येक सिफारिश पर अब तक की गई कार्रवाई का विस्तृत ब्योरा मांगा है। समिति यह जानना चाहती है कि सुझाए गए सुधारों को किस स्तर तक लागू किया गया है और किन सिफारिशों पर अभी काम बाकी है।
CBSE के OSM सिस्टम पर भी उठे कई सवाल
दूसरी ओर CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली भी संसदीय जांच के दायरे में आ गई है। समिति ने बोर्ड से पूछा है कि OSM परियोजना के लिए जारी विभिन्न टेंडर दस्तावेजों में समय-समय पर क्या बदलाव किए गए और इन बदलावों की आवश्यकता क्यों पड़ी।
समिति ने विशेष रूप से यह जानने में रुचि दिखाई है कि OSM का ठेका देने से पहले संबंधित कंपनी की पृष्ठभूमि की जांच किस स्तर पर की गई थी। सूत्रों के मुताबिक, COEMPT EduTeck से जुड़े कई सवाल भी बोर्ड के सामने रखे गए हैं।
टेंडर शर्तों में बदलाव पर मांगा गया स्पष्टीकरण
संसदीय समिति ने OSM अनुबंध से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण बदलावों पर भी सवाल उठाए हैं। इनमें उन शर्तों को हटाने का कारण पूछा गया है, जिनके तहत खराब प्रदर्शन का रिकॉर्ड रखने वाली कंपनियों को अयोग्य घोषित किया जाता था।
इसके अलावा पहले ब्लैकलिस्ट की जा चुकी कंपनियों को बाहर रखने वाले प्रावधान में बदलाव, न्यूनतम 50 करोड़ रुपये के वार्षिक कारोबार की शर्त और पात्रता मानदंडों में किए गए संशोधनों पर भी जवाब मांगा गया है।
समिति ने तकनीकी मानकों से जुड़े बदलावों की भी जानकारी मांगी है। इनमें उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग प्रक्रिया, डेटा सेंटर व्यवस्था, रोबोटिक स्कैनर की अनिवार्यता हटाने, स्कैनिंग रिजॉल्यूशन को 300 DPI से घटाकर 200 DPI करने और बड़े स्तर की परियोजनाओं के अनुभव संबंधी पात्रता शर्तों में बदलाव जैसे मुद्दे शामिल हैं।
पहले मांगे गए दस्तावेज अब तक नहीं मिले
सूत्रों के अनुसार, समिति ने फरवरी, मई और अगस्त 2025 में जारी OSM टेंडर से जुड़े दस्तावेज पहले भी मांगे थे। हालांकि अभी तक ये रिकॉर्ड समिति को उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
इसके अलावा OSM ड्राई रन के दौरान नियुक्त पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट, उनकी टिप्पणियों और उन पर की गई कार्रवाई की जानकारी भी मांगी गई है। इससे यह संकेत मिलता है कि समिति केवल टेंडर प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि सिस्टम के परीक्षण और क्रियान्वयन की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा कर रही है।
8 और 10 जून तक मांगे गए जवाब
संसदीय समिति ने CBSE को 8 जून तक और NTA को 10 जून तक अपने लिखित जवाब जमा करने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल दोनों संस्थानों की ओर से इन सवालों पर कोई आधिकारिक सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि समिति की यह पहल देश की प्रमुख परीक्षा प्रणालियों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। आने वाले दिनों में NTA और CBSE के जवाबों से यह स्पष्ट होगा कि परीक्षा सुरक्षा, डेटा संरक्षण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर एजेंसियां किस तरह सुधारात्मक कदम उठा रही हैं।




Add comment