
देशभर के केंद्रीय विद्यालयों में पढ़ने वाले लाखों छात्रों के लिए भाषा शिक्षा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है। केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से नई भाषा व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। इसके तहत कक्षा 6 और कक्षा 9 में संस्कृत विषय का चयन करने वाले छात्रों के लिए प्रत्येक केंद्रीय विद्यालय में कम से कम एक अलग सेक्शन उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।
यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की भावना के अनुरूप माना जा रहा है, जिसमें भारतीय भाषाओं के संरक्षण और छात्रों को भाषा चयन में अधिक विकल्प देने पर जोर दिया गया है।
छात्रों को मिलेगा तीसरी भाषा चुनने का अवसर
नई व्यवस्था के अनुसार छात्रों को तीसरी भाषा के रूप में संस्कृत या निर्धारित क्षेत्रीय भाषा चुनने का विकल्प दिया जाएगा। हालांकि यह भाषा उनकी पहली भाषा हिंदी और दूसरी भाषा अंग्रेजी से अलग होनी चाहिए। इसका उद्देश्य छात्रों को भारतीय भाषाओं से जोड़ना और उनकी भाषाई समझ को मजबूत बनाना है।
केंद्रीय विद्यालय संगठन का मानना है कि भाषा के अधिक विकल्प मिलने से छात्रों को अपनी रुचि और भविष्य की शैक्षणिक जरूरतों के अनुसार विषय चुनने में सुविधा होगी।
ट्रांसफर वाले परिवारों के बच्चों को मिलेगी राहत
केंद्रीय विद्यालयों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां बड़ी संख्या में ऐसे छात्र पढ़ते हैं जिनके माता-पिता केंद्र सरकार, रक्षा सेवाओं, अर्धसैनिक बलों या अन्य स्थानांतरण वाली नौकरियों में कार्यरत हैं। लगातार शहर बदलने के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका रहती है।
नई भाषा व्यवस्था से ऐसे छात्रों को काफी लाभ मिलेगा। देश के विभिन्न हिस्सों में स्थित केंद्रीय विद्यालयों में एक समान भाषा ढांचा होने से छात्रों को स्कूल बदलने के बाद भी पढ़ाई जारी रखने में परेशानी नहीं होगी।
अभिभावकों और छात्रों की राय के आधार पर बनेगी व्यवस्था
KVS ने सभी विद्यालयों को निर्देश दिया है कि वे छात्रों और उनके अभिभावकों से तीसरी भाषा को लेकर उनकी पसंद की जानकारी जुटाएं। इसी आधार पर स्कूलों में सेक्शन का गठन किया जाएगा और आगे की शैक्षणिक व्यवस्था तय होगी।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भाषा चयन छात्रों की वास्तविक रुचि और आवश्यकता के अनुरूप हो।
शिक्षकों और संसाधनों का होगा पुनर्मूल्यांकन
नई व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सभी केंद्रीय विद्यालयों को निर्धारित समय सीमा के भीतर आवश्यक जानकारी पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। इस डेटा के आधार पर विभिन्न विद्यालयों में शिक्षकों और अन्य संसाधनों की जरूरत का आकलन किया जाएगा।
कुछ विद्यालयों में क्षेत्रीय भाषाओं के शिक्षकों की कमी सामने आ सकती है। ऐसी स्थिति को देखते हुए केंद्रीय विद्यालय संगठन ने जरूरत पड़ने पर संविदा शिक्षकों की नियुक्ति और चरणबद्ध तरीके से व्यवस्था लागू करने की योजना बनाई है।
छात्रों की संख्या के अनुसार बनेंगे सेक्शन
KVS ने विद्यालयों को स्थानीय जरूरतों और छात्रों की संख्या के आधार पर सेक्शन बनाने की अनुमति दी है। जहां छात्रों की संख्या कम होगी वहां संयुक्त सेक्शन बनाए जा सकते हैं, जबकि अधिक संख्या होने पर अलग-अलग सेक्शन संचालित किए जाएंगे।
हालांकि संगठन ने स्पष्ट किया है कि कक्षा 6 और कक्षा 9 में संस्कृत विषय के लिए कम से कम एक अलग सेक्शन उपलब्ध कराना सभी विद्यालयों के लिए अनिवार्य होगा।
भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने की दिशा में कदम
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल छात्रों के बीच भारतीय भाषाओं के प्रति रुचि बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती है। साथ ही, संस्कृत जैसी प्राचीन भाषा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और भाषाई विविधता को बढ़ावा देने के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी।
आने वाले शैक्षणिक सत्र से लागू होने वाली यह व्यवस्था केंद्रीय विद्यालयों में भाषा शिक्षा के स्वरूप में एक महत्वपूर्ण बदलाव मानी जा रही है, जिसका लाभ देशभर के लाखों छात्रों को मिल सकता है।




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