
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET 2026 इस साल केवल पेपर लीक और री-एग्जाम को लेकर ही चर्चा में नहीं है, बल्कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर उठ रहे सवालों की वजह से भी सुर्खियों में है। परीक्षा रद्द होने के बाद लाखों अभ्यर्थियों को दोबारा तैयारी करनी पड़ रही है, जिससे तनाव और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। इसी बीच NEET अभ्यर्थियों से जुड़ी आत्महत्या की घटनाओं ने शिक्षा जगत और अभिभावकों की चिंता को और बढ़ा दिया है।
लाखों छात्र पिछले कई वर्षों से डॉक्टर बनने के सपने को पूरा करने के लिए तैयारी कर रहे थे। परीक्षा संपन्न होने के बाद उन्हें अपने परिणामों का इंतजार था, लेकिन पेपर लीक के आरोपों और उसके बाद परीक्षा रद्द होने के फैसले ने पूरी प्रक्रिया को बदल दिया। अब छात्रों को दोबारा परीक्षा की तैयारी करनी पड़ रही है, जिससे उनके ऊपर मानसिक दबाव और बढ़ गया है।
परीक्षा रद्द होने के बाद क्यों बढ़ी चिंता?
NEET को देश की सबसे प्रतिस्पर्धी और महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं में गिना जाता है। हर साल लाखों छात्र मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए इस परीक्षा में शामिल होते हैं। इस वर्ष भी बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी और कई छात्रों को उम्मीद थी कि उनके प्रदर्शन के आधार पर उन्हें मेडिकल सीट मिल जाएगी।
हालांकि, पेपर लीक के आरोपों के बाद परीक्षा रद्द होने से स्थिति बदल गई। कई छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि लंबे समय तक तैयारी करने के बाद अचानक दोबारा परीक्षा की घोषणा ने छात्रों के आत्मविश्वास और मानसिक स्थिति पर असर डाला है। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी अनिश्चितता कई बार छात्रों में तनाव, चिंता और भावनात्मक दबाव बढ़ा सकती है।
रिपोर्ट में क्या दावा किया गया?
विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि वर्ष 2026 में अब तक NEET से जुड़े कम से कम 14 छात्रों की आत्महत्या के मामले सामने आए हैं। इनमें से कुछ घटनाएं परीक्षा रद्द होने की घोषणा के बाद दर्ज की गईं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, वर्ष 2021 से 2026 के बीच NEET से जुड़े कम से कम 93 छात्रों की आत्महत्या के मामले सामने आए हैं। वहीं, वर्ष 2025 में ऐसे मामलों की संख्या सबसे अधिक बताई गई, जहां 32 छात्रों के जान गंवाने की खबरें सामने आईं।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये आंकड़े विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं। इनकी पुष्टि किसी आधिकारिक सरकारी आंकड़े के रूप में नहीं हुई है। इसलिए इन दावों को अंतिम या आधिकारिक आंकड़ों के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
अलग-अलग राज्यों से सामने आए मामले
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, परीक्षा रद्द होने के बाद देश के कई राज्यों से छात्रों की मौत की खबरें सामने आई हैं। इनमें गोवा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, कर्नाटक और उत्तराखंड जैसे राज्य शामिल हैं।
जून महीने में भी कई घटनाओं की रिपोर्ट सामने आई। राजस्थान के दौसा निवासी अजीत मीणा की मौत की खबर ने लोगों को झकझोर दिया। वहीं, दिल्ली के पालम क्षेत्र में रहने वाली 17 वर्षीय छात्रा रेनू के मामले ने भी काफी ध्यान आकर्षित किया। परिवार के अनुसार, परीक्षा रद्द होने के बाद वह तनाव में थी। इसके अलावा राजस्थान के सीकर और उत्तराखंड के देहरादून से भी NEET अभ्यर्थियों की मौत की खबरें सामने आईं।
मानसिक स्वास्थ्य पर बढ़ती बहस
इन घटनाओं के बाद छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बहस तेज हो गई है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान छात्रों को केवल शैक्षणिक सहायता ही नहीं, बल्कि भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक सहयोग की भी आवश्यकता होती है।
विशेषज्ञ अभिभावकों से भी अपील कर रहे हैं कि वे बच्चों के प्रदर्शन की बजाय उनके मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक स्थिति पर अधिक ध्यान दें। वहीं, शैक्षणिक संस्थानों और कोचिंग केंद्रों को भी छात्रों के लिए काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य सहायता को मजबूत करने की जरूरत बताई जा रही है।
छात्रों और अभिभावकों के लिए संदेश
परीक्षा जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा जरूर है, लेकिन यह किसी छात्र की पूरी पहचान या भविष्य का अंतिम पैमाना नहीं होती। यदि कोई छात्र तनाव, चिंता या मानसिक दबाव महसूस कर रहा है, तो उसे परिवार, शिक्षकों, दोस्तों या पेशेवर काउंसलर से खुलकर बात करनी चाहिए।
NEET 2026 से जुड़ी मौजूदा परिस्थितियों ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के साथ-साथ छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। शिक्षा व्यवस्था, परिवार और समाज को मिलकर ऐसा माहौल बनाना होगा, जहां सफलता और असफलता दोनों को संतुलित नजरिए से देखा जा सके।




Add comment