
नीट यूजी परीक्षा में पिछले वर्ष सामने आए पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पिछली परीक्षा प्रक्रिया में कुछ ऐसे लोग शामिल थे जिन्होंने अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन नहीं किया। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने जिन लोगों पर परीक्षा की गोपनीयता और सुरक्षा बनाए रखने का भरोसा किया था, उनमें से कुछ उस विश्वास पर खरे नहीं उतर सके।
एक प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान को दिए साक्षात्कार में शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य इस बार परीक्षा को पूरी तरह निष्पक्ष, सुरक्षित और पारदर्शी बनाना था ताकि मेहनत करने वाले विद्यार्थियों को किसी भी तरह की अनियमितता का नुकसान न उठाना पड़े।
निष्पक्ष परीक्षा कराना सरकार की प्राथमिकता
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि देशभर के लाखों मेधावी छात्रों का भविष्य प्रवेश परीक्षाओं से जुड़ा होता है। ऐसे में सरकार की पहली जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि सभी अभ्यर्थियों को समान और निष्पक्ष अवसर मिले।
उन्होंने भरोसा जताया कि जिन छात्रों ने मेहनत की है, उन्हें उनके प्रदर्शन के अनुसार परिणाम मिलेगा। उनके अनुसार, इस बार पूरी परीक्षा प्रक्रिया को इस तरह तैयार किया गया कि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या लीक की संभावना को न्यूनतम किया जा सके।
प्रश्नपत्र तैयार करना सबसे बड़ी चुनौती
शिक्षा मंत्री ने बताया कि पुनर्परीक्षा के दौरान सबसे कठिन और संवेदनशील काम प्रश्नपत्र तैयार करना था। इसके लिए विशेषज्ञों की अलग-अलग टीमों का गठन किया गया और प्रश्नपत्र निर्माण की पूरी प्रक्रिया को पहले से अधिक सुरक्षित बनाया गया।
उन्होंने कहा कि कई अलग-अलग प्रश्नपत्र सेट तैयार किए गए थे, लेकिन अंतिम समय तक यह जानकारी बेहद सीमित अधिकारियों के पास ही रखी गई कि परीक्षा में किस सेट का उपयोग किया जाएगा। इससे प्रश्नपत्र की गोपनीयता बनाए रखने में मदद मिली।
शिक्षकों को बाहरी दुनिया से रखा गया अलग
धर्मेंद्र प्रधान के अनुसार, प्रश्नपत्र तैयार करने वाले शिक्षकों और विशेषज्ञों को कई दिनों तक पूरी तरह अलग रखा गया था। इस दौरान उन्हें इंटरनेट, मोबाइल फोन और अन्य बाहरी संपर्क के साधनों से दूर रखा गया ताकि किसी भी प्रकार की जानकारी बाहर न जा सके।
उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल एक था—प्रश्नपत्र की गोपनीयता को पूरी तरह सुरक्षित रखना और परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की सेंध की संभावना को खत्म करना।
री-नीट परीक्षा में बढ़ाए गए सुरक्षा इंतजाम
गौरतलब है कि NEET UG 2026 की पुनर्परीक्षा 21 जून को आयोजित की गई। इससे पहले हुई परीक्षा में पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठे थे। इसी पृष्ठभूमि में सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने इस बार सुरक्षा व्यवस्था को पहले से अधिक मजबूत किया।
अधिकारियों के अनुसार, परीक्षा केंद्रों की निगरानी, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, गोपनीय परिवहन व्यवस्था और विभिन्न स्तरों पर निगरानी तंत्र को और सख्त किया गया ताकि परीक्षा निष्पक्ष और विश्वसनीय तरीके से संपन्न हो सके।
परीक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करने की कोशिश
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है। पिछले वर्ष के विवादों के बाद इस बार अपनाए गए अतिरिक्त सुरक्षा उपायों का उद्देश्य छात्रों और अभिभावकों के बीच परीक्षा प्रणाली पर भरोसा मजबूत करना है।
अब अभ्यर्थियों की नजर आगामी परिणाम और आगे की काउंसलिंग प्रक्रिया पर रहेगी। वहीं, सरकार का कहना है कि भविष्य में भी राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए आवश्यक सुधार जारी रहेंगे।




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