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कर्नाटक में NCERT की कक्षा 6 की कन्नड़ पाठ्यपुस्तक पर विवाद, शीर्षक और सामग्री को लेकर उठे सवाल

कर्नाटक में NCERT की कक्षा 6 की कन्नड़ पाठ्यपुस्तक पर विवाद, शीर्षक और सामग्री को लेकर उठे सवाल

कर्नाटक में NCERT की कक्षा 6 की कन्नड़ पाठ्यपुस्तक पर विवाद, शीर्षक और सामग्री को लेकर उठे सवाल

कर्नाटक में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की कक्षा 6 की R3 कन्नड़ पाठ्यपुस्तक को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। शिक्षा विशेषज्ञों, लेखकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पुस्तक के शीर्षक, पाठ्य सामग्री और राज्य की सांस्कृतिक विविधता के प्रतिनिधित्व को लेकर कई सवाल उठाए हैं।

‘कृष्ण’ नाम से प्रकाशित इस पाठ्यपुस्तक को ऐसे समय में लेकर बहस तेज हुई है, जब केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF-SE) 2023 के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 6 से 10 तक तीन-भाषा नीति (R1, R2, R3) लागू कर रहा है।

आलोचकों का कहना है कि पुस्तक का नामकरण, पोषण संबंधी अध्यायों में शाकाहारी भोजन पर अधिक जोर और कर्नाटक के विभिन्न क्षेत्रों की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत की सीमित उपस्थिति चिंता का विषय है।

पाठ्यपुस्तक के नाम और पौराणिक संदर्भों पर आपत्ति

शिक्षा विशेषज्ञ निरंजनाराध्य वी.पी. ने पुस्तक की सामग्री और शीर्षक को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि शैक्षणिक सामग्री में पौराणिक विषयों का बढ़ता प्रभाव शिक्षा के उद्देश्य से मेल नहीं खाता।

उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा के लिए तैयार की जाने वाली पुस्तकों का उपयोग किसी राजनीतिक या सांस्कृतिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, कक्षा 6 की पुस्तक का नाम ‘कृष्ण’ रखना और उसमें पौराणिक मूल्यों को प्रमुखता देना पाठ्यक्रम को एक विशेष विचारधारा की ओर ले जाने का प्रयास माना जा सकता है।

उनके इन बयानों ने नई शिक्षा नीति के तहत तैयार किए जा रहे पाठ्यक्रमों और शैक्षणिक सामग्री को लेकर चल रही बहस को और तेज कर दिया है।

संतुलित आहार की परिभाषा पर भी विवाद

विवाद का दूसरा बड़ा कारण पुस्तक में भोजन और पोषण से जुड़ी सामग्री को बताया जा रहा है। आलोचकों का दावा है कि पहले की पुस्तकों में संतुलित आहार की चर्चा करते समय शाकाहारी और मांसाहारी दोनों प्रकार के भोजन का उल्लेख किया जाता था, जबकि संशोधित पाठ्यपुस्तक में संतुलित आहार को दूध, हरी सब्जियां, फल और मेवों पर आधारित बताया गया है।

बताया जा रहा है कि पुस्तक में दिए गए चित्रों में रागी मुड्डे, रोटी, चावल, सब्जियां, दूध और फल जैसे खाद्य पदार्थ दिखाए गए हैं। इस पर आपत्ति जताते हुए निरंजनाराध्य वी.पी. ने कहा कि कर्नाटक की बड़ी आबादी मछली, अंडा, चिकन, मटन और अन्य मांसाहारी खाद्य पदार्थों का सेवन करती है, लेकिन इनका उल्लेख पुस्तक में नहीं किया गया है।

उनका आरोप है कि यह राज्य की वास्तविक खाद्य संस्कृति को पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं करता।

क्षेत्रीय संस्कृति और साहित्य की उपेक्षा के आरोप

पाठ्यपुस्तक में कर्नाटक की क्षेत्रीय पहचान और सांस्कृतिक विविधता के प्रतिनिधित्व को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

स्कूल डेवलपमेंट एंड मॉनिटरिंग कमेटी (SDMC) के राज्य अध्यक्ष उमेश जी. गंगावाड़ी ने कहा कि पुस्तक में तटीय कर्नाटक, उत्तर कर्नाटक, मलनाड और पुराने मैसूर क्षेत्र की लोक परंपराओं, साहित्य और सामाजिक जीवन को पर्याप्त स्थान नहीं मिला है।

उनका कहना है कि कक्षा 6 के छात्रों की उम्र और जिज्ञासा को ध्यान में रखते हुए अधिक रोचक गतिविधियां, चित्र, कहानियां और स्थानीय संदर्भ शामिल किए जाने चाहिए थे। उन्होंने यह भी कहा कि कर्नाटक की सांस्कृतिक पहचान राज्य के महान साहित्यकारों और समाज सुधारकों की विरासत से जुड़ी है।

लेखक ने पाठ हटाने की मांग की

प्रख्यात लेखक एस.जी. सिद्धारमैया ने भी पाठ्यपुस्तक की आलोचना करते हुए संबंधित अध्याय को वापस लेने की मांग की है। उन्होंने CBSE छात्रों के लिए तीन-भाषा नीति लागू करने पर भी अपनी असहमति जताई।

उनका कहना है कि किसी देवता के नाम को स्कूल की पाठ्यपुस्तक का शीर्षक बनाना और पाठ्य सामग्री के माध्यम से एक विशेष जीवनशैली को बढ़ावा देना उचित नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार, शिक्षा का उद्देश्य सभी वर्गों और समुदायों का संतुलित प्रतिनिधित्व करना होना चाहिए।

पाठ्यक्रम और सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व पर फिर छिड़ी बहस

इस विवाद ने एक बार फिर स्कूल शिक्षा में पाठ्यक्रम निर्माण, सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व और शैक्षणिक सामग्री की निष्पक्षता पर बहस शुरू कर दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल की पाठ्यपुस्तकों में छात्रों की उम्र के अनुरूप सामग्री होने के साथ-साथ राज्य की भाषाई, सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता का भी समुचित प्रतिनिधित्व होना चाहिए। इतिहास, साहित्य, लोक संस्कृति, खानपान और सामाजिक जीवन जैसे विषयों को संतुलित रूप से शामिल करना शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूत बनाता है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत नई व्यवस्थाओं के लागू होने के बीच NCERT की कक्षा 6 की कन्नड़ पाठ्यपुस्तक को लेकर उठा यह विवाद आने वाले दिनों में कर्नाटक के शिक्षा जगत में चर्चा का प्रमुख विषय बना रह सकता है।

Asmita Sarkar

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