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बिहार में PhD के नए नियम लागू, NET या GATE के बिना नहीं मिलेगा दाखिला; रिसर्च पेपर भी होगा अनिवार्य

New PhD rules implemented in Bihar; admission denied without NET or GATE; research paper also mandatory

बिहार के विश्वविद्यालयों में पीएचडी (PhD) की पढ़ाई अब नए नियमों के तहत होगी। राज्यपाल सचिवालय की ओर से ‘बिहार राज्य विश्वविद्यालय पीएचडी अध्यादेश एवं विनियम-2026’ लागू कर दिया गया है। नए नियमों के तहत पीएचडी में प्रवेश, कोर्स वर्क, शोध कार्य, मूल्यांकन और डिग्री प्रदान करने की पूरी प्रक्रिया में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।

इन बदलावों का उद्देश्य शोध की गुणवत्ता बढ़ाना, प्रवेश प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना और विश्वविद्यालयों में शोध कार्य को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप करना है। नए प्रावधानों के तहत शोधार्थियों के लिए रिसर्च पेपर प्रकाशित करना, राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शोध प्रस्तुत करना और अनिवार्य कोर्स वर्क पूरा करना जरूरी होगा। वहीं, पीएचडी गाइड बनने वाले शिक्षकों के लिए भी नई सीमाएं तय की गई हैं।

तीन साल से कम सेवा वाले शिक्षक नहीं ले सकेंगे नए शोधार्थी

नए विनियम के अनुसार जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में तीन वर्ष से कम समय बचा है, वे नए पीएचडी शोधार्थियों का मार्गदर्शन नहीं कर सकेंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शोधार्थियों को पूरे शोधकाल के दौरान नियमित मार्गदर्शन मिल सके।

साथ ही प्रत्येक शिक्षक के लिए शोधार्थियों की अधिकतम संख्या भी तय कर दी गई है। एक प्रोफेसर अधिकतम आठ, एसोसिएट प्रोफेसर छह और असिस्टेंट प्रोफेसर चार पीएचडी शोधार्थियों का ही निर्देशन कर सकेंगे।

अब NET, CSIR-NET या GATE के आधार पर मिलेगा प्रवेश

पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया को भी पहले से अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया गया है। नए नियमों के अनुसार केवल यूजीसी-नेट (UGC-NET), यूजीसी-सीएसआईआर नेट (UGC-CSIR NET) या GATE उत्तीर्ण अभ्यर्थी ही पीएचडी में प्रवेश के पात्र होंगे।

अंतिम मेरिट सूची में 80 प्रतिशत वेटेज NET या GATE स्कोर को दिया जाएगा, जबकि 20 प्रतिशत अंक इंटरव्यू के आधार पर जोड़े जाएंगे। विश्वविद्यालय उपलब्ध सीटों की संख्या के मुकाबले अधिकतम तीन गुना अभ्यर्थियों को ही इंटरव्यू के लिए बुला सकेंगे।

12 क्रेडिट का कोर्स वर्क होगा अनिवार्य

सभी शोधार्थियों को 12 क्रेडिट का अनिवार्य कोर्स वर्क पूरा करना होगा। इसमें रिसर्च मेथडोलॉजी और रिसर्च एंड पब्लिकेशन एथिक्स जैसे विषय शामिल होंगे।

कोर्स वर्क में कम से कम 55 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा शोधार्थियों को आवश्यकता के अनुसार सप्ताह में चार से छह घंटे तक शिक्षण कार्य या रिसर्च असिस्टेंटशिप भी करनी पड़ सकती है। इससे उन्हें शोध के साथ-साथ अकादमिक अनुभव भी मिलेगा।

थीसिस जमा करने से पहले रिसर्च पेपर प्रकाशित करना होगा

नए नियमों के तहत पीएचडी शोधार्थियों को थीसिस जमा करने से पहले कम से कम एक शोध पत्र (रिसर्च पेपर) प्रकाशित करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही उन्हें किसी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में अपने शोध कार्य की प्रस्तुति भी देनी होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस व्यवस्था से शोध कार्य की गुणवत्ता में सुधार होगा और शोधार्थियों को राष्ट्रीय एवं वैश्विक अकादमिक मंचों पर अपनी पहचान बनाने का अवसर मिलेगा।

पटना में बनेगी यूनिवर्सिटी ऑफ फिजिक्स एंड साइंसेज

इस बीच बिहार सरकार ने राज्य में विज्ञान शिक्षा और शोध को बढ़ावा देने के लिए एक नई पहल की घोषणा की है। सरकार ने पटना साइंस कॉलेज परिसर में ‘यूनिवर्सिटी ऑफ फिजिक्स एंड साइंसेज’ स्थापित करने की घोषणा की है।

सरकार के अनुसार यह विश्वविद्यालय विज्ञान, नवाचार और अत्याधुनिक शोध का प्रमुख केंद्र होगा। यहां आधुनिक प्रयोगशालाएं, उन्नत शोध केंद्र और विश्वस्तरीय शैक्षणिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे बिहार में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

शोध की गुणवत्ता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम

नई पीएचडी नीति से बिहार के विश्वविद्यालयों में शोध कार्य की गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की संभावना है। प्रवेश से लेकर डिग्री प्रदान करने तक की पूरी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाया गया है। साथ ही शोधार्थियों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर के शोध मानकों को अपनाने पर भी विशेष जोर दिया गया है।

 

 

Asmita Sarkar

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