
Rahul Gandhi on Paper Leak: लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में पेपर लीक की घटनाएं अब परीक्षा प्रणाली का हिस्सा बन गई हैं और प्रश्नपत्र कथित तौर पर तय कीमतों पर बेचे जाते हैं। हालांकि, राहुल गांधी ने अपने दावों के समर्थन में कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट या न्यायिक निष्कर्ष पेश नहीं किया। इन आरोपों पर केंद्र सरकार की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
देहरादून में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कई ग्राफिक्स दिखाकर अपने आरोपों को प्रस्तुत किया। उनका कहना था कि लगातार हो रहे पेपर लीक के कारण ईमानदारी से तैयारी करने वाले लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
‘पेपर का रेट’ बताने वाला ग्राफिक दिखाया
अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने “पेपर का रेट” शीर्षक वाला एक ग्राफिक प्रस्तुत किया। इसमें विभिन्न परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों के कथित लीक होने की अनुमानित कीमतें दिखाई गईं।
ग्राफिक के अनुसार, NEET UG 2026 के प्रश्नपत्र की कथित कीमत 40 लाख रुपये, IIT-JEE 2021 और उत्तराखंड पटवारी परीक्षा 2025 की कीमत 15-15 लाख रुपये, बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा 2024 की कीमत 10 लाख रुपये तथा ओडिशा पुलिस सब-इंस्पेक्टर परीक्षा 2025 की कीमत 25 लाख रुपये बताई गई।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल अब पेपर लीक के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के पास बड़ी रकम होती है, वे कथित तौर पर “पेपर लीक के मेन्यू कार्ड” से अपनी पसंद की परीक्षा चुन सकते हैं।
“छात्र चार तरह के अन्याय झेल रहे हैं”
राहुल गांधी ने कहा कि देश के छात्र आज चार बड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। उनके अनुसार, इनमें महंगी शिक्षा, सीमित रोजगार के अवसर, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और पेपर लीक जैसी समस्याएं शामिल हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि देश की शिक्षा व्यवस्था ऐसी स्थिति में पहुंच गई है, जहां पेपर लीक सामान्य बात बनती जा रही है और इसका सबसे अधिक नुकसान मेहनत करने वाले छात्रों को उठाना पड़ रहा है।
“सिस्टम पर कुछ लोगों का कब्जा”
रैली के दौरान राहुल गांधी ने “Paper Leak Epidemic” नाम का एक और ग्राफिक भी दिखाया। इसमें दावा किया गया कि देश में 152 पेपर लीक मामलों से करीब 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित हुए, लेकिन किसी भी मामले में दोषियों को सजा नहीं मिली। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
उन्होंने “System Par Kabza” शीर्षक वाले एक अन्य ग्राफिक के जरिए परीक्षा प्रक्रिया के विभिन्न हिस्सों—जैसे शिक्षा मंत्रालय, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA), वेंडर, प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञ, अनुवादक, प्रिंटर, परिवहन एजेंसियां, कोचिंग संस्थान और परीक्षा केंद्र—का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि कुछ लोग पूरी व्यवस्था का गलत फायदा उठा रहे हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि “एक प्रतिशत लोग सिस्टम का दुरुपयोग कर रहे हैं और उसका नुकसान 99 प्रतिशत ईमानदार और गरीब छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।”
छात्रों के लिए मुआवजा और दोबारा परीक्षा की मांग
राहुल गांधी ने पेपर लीक से प्रभावित अभ्यर्थियों को आर्थिक सहायता और कानूनी सुरक्षा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि जिन परीक्षाओं में पेपर लीक की पुष्टि हो, वहां बिना देरी के दोबारा परीक्षा कराई जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए सुरक्षित प्रश्न बैंक (Secure Question Bank) तैयार किए जाएं और रैंडमाइज्ड प्रश्नपत्र (Randomised Question Papers) की व्यवस्था लागू की जाए, ताकि हर परीक्षा अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बन सके।
“21वीं सदी के अनुरूप परीक्षा प्रणाली की जरूरत”
राहुल गांधी ने कहा कि वर्तमान परीक्षा प्रणाली पुराने ढांचे पर आधारित है और अब समय आ गया है कि इसे 21वीं सदी की जरूरतों के अनुरूप बनाया जाए। उन्होंने परीक्षा व्यवस्था को सरकार-केंद्रित के बजाय छात्र-केंद्रित बनाने की वकालत की।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से पेपर लीक रोकने के मुद्दे पर साझा सहमति बनाने और मिलकर ठोस कदम उठाने की अपील की।




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