
NEET UG 2026 Re-Exam Result को लेकर एक बार फिर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) विवादों में घिरती नजर आ रही है। कर्नाटक की एक छात्रा ने आरोप लगाया है कि उसकी OMR उत्तर पुस्तिका में गंभीर त्रुटियां हुई हैं, जिसके कारण उसे अपेक्षित अंकों की बजाय बेहद कम अंक मिले। छात्रा का दावा है कि मूल्यांकन में हुई कथित गड़बड़ी ने उसके मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के सपनों को प्रभावित किया है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब देशभर में NEET UG 2026 री-एग्जाम के परिणामों को लेकर पहले से ही कई छात्र और अभिभावक सवाल उठा रहे हैं।
OMR शीट और रिजल्ट में अंतर का आरोप
कर्नाटक के हावेरी जिले के हंगल तालुक की रहने वाली बिंदुश्री जगदीश पवार ने आरोप लगाया है कि परीक्षा के बाद NTA द्वारा उपलब्ध कराई गई OMR शीट उस शीट से मेल नहीं खाती, जिस पर उन्होंने परीक्षा के दौरान उत्तर भरे थे।
छात्रा का कहना है कि आधिकारिक रिकॉर्ड में कई ऐसे उत्तर दर्ज दिखाई दे रहे हैं, जिन्हें उन्होंने कभी चुना ही नहीं था। उनके अनुसार, यदि उनके वास्तविक उत्तरों का सही मूल्यांकन किया जाता तो उन्हें लगभग 668 अंक प्राप्त होते। लेकिन घोषित परिणाम में उनका स्कोर इससे पूरी तरह अलग दिखाया गया और उन्हें नकारात्मक अंक मिलने की स्थिति का सामना करना पड़ा।
बिंदुश्री ने यह भी दावा किया है कि NTA के रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने बहुत कम समय में बड़ी संख्या में प्रश्नों के उत्तर दर्ज किए हैं। छात्रा के मुताबिक, रिकॉर्ड में यह दर्शाया गया है कि उन्होंने लगभग एक मिनट के भीतर 41 प्रश्नों के उत्तर दिए, जो व्यवहारिक रूप से संभव नहीं लगता। इसी आधार पर उन्होंने OMR डेटा में संभावित त्रुटि की आशंका जताई है।
शिकायत के बावजूद जवाब नहीं मिलने का दावा
छात्रा का कहना है कि उन्होंने परिणाम जारी होने के बाद कई बार NTA की हेल्पलाइन और संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया। उन्होंने अपनी मार्कशीट और OMR रिकॉर्ड की दोबारा जांच की मांग भी की, लेकिन अब तक उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है।
उनका आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने के बावजूद एजेंसी की ओर से मामले पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी गई, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई है।
अन्य छात्रों और अभिभावकों ने भी उठाए सवाल
यह विवाद केवल एक छात्रा तक सीमित नहीं है। कर्नाटक के कई अन्य छात्रों और अभिभावकों ने भी री-एग्जाम के परिणामों को लेकर सवाल उठाए हैं। कुछ उम्मीदवारों का दावा है कि अंतिम आंसर की के आधार पर उनके द्वारा निकाले गए अंकों और घोषित परिणाम में अंतर दिखाई दे रहा है।
कई छात्रों का कहना है कि उनके स्कोर में 10 से 25 अंकों तक का अंतर आया है। प्रतियोगी परीक्षाओं में इतने अंकों का अंतर ऑल इंडिया रैंक पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है और मेडिकल कॉलेज में प्रवेश की संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है।
कुछ अभ्यर्थियों ने यह भी आरोप लगाया है कि NTA की वेबसाइट पर अपलोड की गई OMR शीट उनके वास्तविक उत्तरों से मेल नहीं खाती। इन आरोपों के बाद मूल्यांकन प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच और पारदर्शिता बढ़ाने की मांग भी उठने लगी है।
NTA का क्या है पक्ष?
इन आरोपों के बीच NTA पहले भी सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ दावों को खारिज कर चुकी है। एजेंसी का कहना रहा है कि परीक्षा परिणाम और मूल्यांकन केवल मूल OMR शीट के आधार पर किए जाते हैं और सोशल मीडिया पर प्रसारित कई दावे भ्रामक या तथ्यहीन हो सकते हैं।
हालांकि, कर्नाटक की छात्रा बिंदुश्री जगदीश पवार के आरोपों पर NTA की ओर से अभी तक कोई सार्वजनिक या आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में मामले की सच्चाई और संभावित तकनीकी त्रुटियों को लेकर सवाल बने हुए हैं।
मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में OMR रिकॉर्ड, उत्तर कुंजी और परिणामों की सटीकता बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि किसी छात्र के अंक या उत्तरों में वास्तविक त्रुटि पाई जाती है, तो उसका सीधा असर रैंक, काउंसलिंग और मेडिकल सीट आवंटन पर पड़ सकता है।
फिलहाल छात्र और अभिभावक NTA से मामले की पारदर्शी जांच और स्पष्ट जवाब की मांग कर रहे हैं। यदि आरोपों की संख्या बढ़ती है, तो यह मुद्दा NEET UG 2026 काउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान भी चर्चा का विषय बन सकता है।




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