
देश के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की पहुंच बढ़ाने और सामाजिक रूप से वंचित वर्गों की भागीदारी मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार लगातार प्रयास कर रही है। शिक्षा मंत्रालय द्वारा लोकसभा में साझा किए गए ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि IIT, IIM, IISER और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में छात्रों का नामांकन बढ़ा है। वहीं अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के विद्यार्थियों की भागीदारी में भी पिछले एक दशक के दौरान उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
हालांकि, नामांकन में बढ़ोतरी के साथ-साथ बजटीय आवंटन के आंकड़े एक मिश्रित तस्वीर पेश करते हैं। जहां IIT और केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए फंडिंग बढ़ी है, वहीं IIM और IISER को मिलने वाले आवंटन में कमी दर्ज की गई है।
केंद्रीय विश्वविद्यालयों में करीब 8 लाख छात्र
लोकसभा में दिए गए एक लिखित उत्तर में शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने बताया कि अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण (AISHE) 2023-24 के अनुसार देश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों में लगभग 7.95 लाख छात्र नामांकित हैं। इनमें करीब 4.11 लाख पुरुष और 3.84 लाख महिला छात्र शामिल हैं।
इसके अलावा देश के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) में लगभग 1.49 लाख छात्र, भारतीय प्रबंधन संस्थानों (IIMs) में करीब 23 हजार छात्र और भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थानों (IISERs) में लगभग 11,600 विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं।
SC, ST और OBC छात्रों की भागीदारी में बढ़ोतरी
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, उच्च शिक्षा संस्थानों में सामाजिक न्याय और समावेशिता को बढ़ावा देने के प्रयासों का असर नामांकन आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है।
वर्ष 2014-15 में इन प्रमुख संस्थानों में SC छात्रों की हिस्सेदारी लगभग 11 प्रतिशत थी, जो 2023-24 में बढ़कर 13 प्रतिशत हो गई। इसी अवधि में ST छात्रों की भागीदारी 4 प्रतिशत से बढ़कर 5 प्रतिशत और OBC छात्रों की हिस्सेदारी 14 प्रतिशत से बढ़कर 20 प्रतिशत तक पहुंच गई।
मंत्रालय का कहना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का प्रमुख उद्देश्य उच्च शिक्षा को अधिक समावेशी बनाना और सभी सामाजिक वर्गों के छात्रों को समान अवसर उपलब्ध कराना है।
पिछले दशक में बढ़ा उच्च शिक्षा का दायरा
सरकार ने बताया कि 2014 के बाद उच्च शिक्षा के विस्तार के लिए कई नए संस्थानों की स्थापना की गई है। इस अवधि में देश में 16 नए IIIT, 8 केंद्रीय विश्वविद्यालय, 8 IIM, 7 IIT, 2 IISER, 1 NIT और 12 AIIMS स्थापित किए गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि नए संस्थानों की स्थापना से न केवल सीटों की संख्या बढ़ी है, बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अधिक अवसर भी मिले हैं।
IIT के लिए बढ़ा बजट, नई सीटों का रास्ता साफ
सरकार ने जानकारी दी कि बजट 2025-26 के तहत पांच नए IIT में रिसर्च पार्क और शैक्षणिक ढांचे के विस्तार के लिए 11,828.79 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। इस निवेश से करीब 6,500 अतिरिक्त छात्रों के लिए नई सीटें उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
इसके अलावा बजट 2026-27 में पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप विकसित करने और देश के प्रत्येक जिले में STEM शिक्षा प्राप्त करने वाली छात्राओं के लिए एक विशेष गर्ल्स हॉस्टल स्थापित करने की घोषणा की गई है। इसका उद्देश्य विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) विषयों में लड़कियों की भागीदारी बढ़ाना है।
फंडिंग के आंकड़ों में दिखा अंतर
शिक्षा मंत्रालय द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, IITs के लिए बजटीय आवंटन लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2025-26 में IITs को मिलने वाली राशि बढ़कर 11,381.21 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इसी तरह केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए आवंटन बढ़कर लगभग 16,730 करोड़ रुपये हो गया।
हालांकि, IIMs और IISERs के लिए तस्वीर अलग रही। IIMs को मिलने वाली फंडिंग 2024-25 के 319.40 करोड़ रुपये से घटकर 2025-26 में 278.65 करोड़ रुपये रह गई। यानी लगभग 40.75 करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई।
इसी तरह IISERs के लिए बजटीय आवंटन 1,459.30 करोड़ रुपये से घटकर 1,328.54 करोड़ रुपये रह गया, जो लगभग 130.76 करोड़ रुपये की कमी को दर्शाता है। लोकसभा में दिए गए उत्तर में इन कटौतियों का उल्लेख किया गया है, हालांकि इनके पीछे कोई विशेष कारण नहीं बताया गया।
आरक्षण और छात्रवृत्ति योजनाओं पर जोर
शिक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में SC, ST और OBC वर्गों के लिए क्रमशः 15 प्रतिशत, 7.5 प्रतिशत और 27 प्रतिशत आरक्षण लागू है। इसके अलावा छात्रवृत्ति, फीस में रियायत, छात्र सहायता योजनाओं और अन्य वित्तीय सहयोग कार्यक्रमों के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों के छात्रों को उच्च शिक्षा से जोड़ने का प्रयास जारी है।
उच्च शिक्षा में समावेशिता पर फोकस
ताजा आंकड़े संकेत देते हैं कि देश में उच्च शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने और सामाजिक रूप से वंचित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में प्रगति हुई है। नामांकन में वृद्धि और नए संस्थानों की स्थापना इस दिशा में सकारात्मक संकेत हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को मजबूत करने के लिए सभी प्रमुख संस्थानों में संतुलित निवेश और संसाधनों की उपलब्धता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।




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