
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने विपक्षी दलों से देश के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे छात्र आंदोलनों के साथ खड़े होने की अपील की है। उन्होंने खास तौर पर झारखंड के JPSC-JSSC अभ्यर्थियों, हैदराबाद की NALSAR University of Law और English and Foreign Languages University (EFLU) के छात्रों के मुद्दों को उठाने की मांग की है।
बोरा का कहना है कि सांसदों की जिम्मेदारी केवल संसद में बहस करने तक सीमित नहीं है। उन्हें जमीन पर उठ रही जनता और छात्रों की आवाज को संसद तक पहुंचाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस तरह विपक्षी नेताओं ने दिल्ली के जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान छात्रों के मुद्दों पर समर्थन जताया था, उसी तरह दूसरे राज्यों में चल रहे छात्र आंदोलनों पर भी ध्यान देना चाहिए। बोरा की यह अपील ऐसे समय में आई है जब शिक्षा, भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और युवाओं के रोजगार से जुड़े सवाल कई राज्यों में आंदोलन का कारण बने हुए हैं।
Jharkhand में JPSC-JSSC को लेकर क्यों आंदोलन कर रहे छात्र?
झारखंड में छात्र और नौकरी के अभ्यर्थी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। हाल के आंदोलन में JPSC और JSSC की परीक्षाओं से जुड़े सवाल प्रमुख रहे हैं। प्रदर्शनकारी भर्ती प्रक्रिया में सुधार, विवादित परीक्षाओं पर कार्रवाई और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
नेहा बोरा भी रांची में छात्रों के इस आंदोलन में पहुंची थीं। 7 अगस्त को विधानसभा की ओर निकाले गए प्रदर्शन के दौरान उनके ऊपर स्याही फेंके जाने की घटना सामने आई थी। इस मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया और बाद में उसे जमानत मिल गई।
प्रदर्शनकारियों की मांगों में परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना और कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच शामिल है। हालांकि, आंदोलन में बाहरी राजनीतिक या छात्र संगठनों की भूमिका को लेकर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। इसलिए इस पूरे मामले में प्रदर्शनकारियों की अलग-अलग मांगों और रुख को अलग-अलग समझना जरूरी है।
NALSAR के छात्रों का मुद्दा क्या है?
हैदराबाद स्थित NALSAR University of Law के छात्रों का नाम भी नेहा बोरा ने अपनी अपील में शामिल किया है। जुलाई में NALSAR के करीब 100 छात्रों ने दिल्ली के जंतर-मंतर आंदोलन के समर्थन में विश्वविद्यालय परिसर में एक दिन में एक भोजन का सामूहिक सांकेतिक उपवास किया था। छात्रों ने शिक्षा और परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग उठाई थी।
इसके अलावा NALSAR के 2026 बैच के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत को बुलाए जाने को लेकर भी छात्रों के एक वर्ग ने आपत्ति जताई। इस मुद्दे ने बाद में कानूनी शिक्षा और छात्रों के विरोध के अधिकार को लेकर अलग बहस को जन्म दिया। सोशल मीडिया और छात्र समुदाय में इस मामले को लेकर काफी चर्चा हुई है।
बोरा का तर्क है कि विश्वविद्यालय परिसरों में छात्रों की ओर से उठाए जा रहे सवालों को राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों को गंभीरता से लेना चाहिए।
EFLU में विवाद का मामला क्या है?
हैदराबाद की English and Foreign Languages University (EFLU) भी छात्र राजनीति और कैंपस विवादों के कारण चर्चा में रही है। बोरा ने EFLU के छात्रों के मुद्दे को भी व्यापक छात्र आंदोलन से जोड़ते हुए विपक्ष से इस पर ध्यान देने की अपील की है।
हालांकि, EFLU में हालिया घटनाओं को लेकर उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों में अलग-अलग छात्र संगठनों के बीच विवाद और पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामले सामने आते रहे हैं। इसलिए किसी एक संगठन पर सीधे आरोप लगाने के बजाय घटनाक्रम और दर्ज मामलों को आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर देखना जरूरी है।
जंतर-मंतर आंदोलन से कैसे जुड़ा है मामला?
नेहा बोरा खुद 2026 में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए शिक्षा और परीक्षा सुधार से जुड़े आंदोलन का हिस्सा रही हैं। वह AISA के अन्य छात्र कार्यकर्ताओं के साथ लंबे समय तक भूख हड़ताल पर रहीं। आंदोलन में NEET समेत प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, जवाबदेही और शिक्षा व्यवस्था में सुधार जैसे मुद्दे उठाए गए थे।
जंतर-मंतर का प्रदर्शन 20 जून 2026 को शुरू हुआ था और 25 जुलाई को समाप्त हुआ। इस दौरान छात्र संगठनों और अन्य प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा व्यवस्था, बेरोजगारी और शिक्षा नीति से जुड़े व्यापक सवाल उठाए। नेहा बोरा ने बाद में कहा कि आंदोलन का मुद्दा केवल पेपर लीक तक सीमित नहीं था, बल्कि देश में शिक्षा और रोजगार से जुड़े बड़े संकट को लेकर भी युवाओं की नाराजगी सामने आई।
इस आंदोलन के दौरान विपक्षी नेताओं की ओर से भी प्रदर्शनकारियों के प्रति समर्थन सामने आया। बोरा ने बाद में कहा कि छात्र आंदोलनों को आगे बढ़ाने के लिए विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और दूसरे सामाजिक समूहों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत है।
विपक्ष से बोरा की अपील क्यों महत्वपूर्ण है?
नेहा बोरा का कहना है कि छात्रों और युवाओं के मुद्दे केवल कैंपस तक सीमित नहीं हैं। भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी, पेपर लीक, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवाल सीधे देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य से जुड़े हैं।
इसी वजह से वह चाहती हैं कि विपक्षी दल झारखंड, NALSAR और EFLU जैसे अलग-अलग कैंपस और राज्यों में उठ रही आवाजों को संसद में भी उठाएं। उनके मुताबिक सड़क पर होने वाले आंदोलनों और संसद में उठाए जाने वाले सवालों के बीच संवाद होना लोकतांत्रिक व्यवस्था का अहम हिस्सा है।
पटना में ABVP ने भी उठाया शिक्षा और परीक्षा सुधार का मुद्दा
इसी बीच पटना में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की ओर से शिक्षा और परीक्षा सुधार पर सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालयों के कुलपति, प्रोफेसर, शोधार्थी और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हुए। चर्चा का केंद्र शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रक्रिया में सुधार रहा।
ABVP के राष्ट्रीय संगठन मंत्री आशीष चौहान ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में लगातार सुधार की जरूरत है और प्रभावी बदलाव के लिए सरकार, शिक्षण संस्थानों, नियामक संस्थाओं और दूसरे संबंधित पक्षों को साथ काम करना होगा।
इस तरह 2026 में शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों के बीच उठ रहे सवालों का दायरा केवल एक परीक्षा या एक विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं रह गया है। अलग-अलग छात्र संगठन अपने-अपने मुद्दों के साथ पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया, परीक्षा सुधार, जवाबदेही और बेहतर शिक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। यही वजह है कि आने वाले समय में छात्र और युवा मुद्दे राजनीतिक बहस में भी ज्यादा जगह बना सकते हैं।




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