
उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों के लिए निपुण भारत मिशन के साथ अब कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों के सीखने के स्तर को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके लिए Learning Enhancement Program (LEP) लागू करने की तैयारी है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों के मौजूदा लर्निंग गैप की पहचान कर उन्हें जरूरी शैक्षणिक सहायता देना और विषयवार दक्षता बढ़ाना है।
LEP के तहत कक्षा 6 से 8 के विद्यार्थियों के सीखने के स्तर का आकलन किया जाएगा। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किन बच्चों को किस विषय और किस स्तर पर अतिरिक्त सहायता की जरूरत है। कमजोर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों के लिए कैचअप शिक्षण की व्यवस्था अपनाई जाएगी, ताकि वे अपनी कक्षा के अपेक्षित सीखने के स्तर तक पहुंच सकें।
दक्षता के आधार पर होगा बच्चों का आकलन
कार्यक्रम में केवल बच्चों के परीक्षा परिणाम पर ध्यान देने के बजाय उनकी विषयवार दक्षता को समझने की कोशिश की जाएगी। इसके लिए तालिका और निपुण एप के माध्यम से दक्षता आधारित आकलन किया जाएगा। आकलन के परिणामों के आधार पर बच्चों की सीखने से जुड़ी कमियों को चिन्हित कर आगे की पढ़ाई की रणनीति तैयार की जाएगी।
इस प्रक्रिया से शिक्षकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि किसी बच्चे को किस विषय में अतिरिक्त अभ्यास की जरूरत है। बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित और प्रोत्साहित करने की योजना भी है, ताकि दूसरे बच्चे भी पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित हों।
विज्ञान और गणित के लिए बनेंगे सर्किल
महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) को कक्षा 6 से 8 के विद्यार्थियों के लिए विज्ञान और गणित सर्किल बनाने के निर्देश दिए हैं। इन सर्किल के जरिए बच्चों को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय गतिविधियों के माध्यम से विषय समझाने पर जोर दिया जाएगा।
विज्ञान और गणित की पढ़ाई में प्रोजेक्ट, मॉडल और विभिन्न शिक्षण किट का इस्तेमाल किया जाएगा। इसका मकसद बच्चों को कठिन लगने वाले विषयों को आसान और व्यावहारिक तरीके से समझाना है। गतिविधि आधारित पढ़ाई से बच्चों की रुचि बढ़ाने के साथ-साथ उनकी विषय समझ को मजबूत करने की कोशिश होगी।
अंग्रेजी पढ़ाने में वीडियो का इस्तेमाल
LEP के तहत अंग्रेजी शिक्षण को भी बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए उपलब्ध शिक्षण वीडियो का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए हैं। शिक्षकों को वीडियो आधारित सामग्री के जरिए बच्चों को अंग्रेजी के जरूरी कौशल समझाने और अभ्यास कराने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
इसके अलावा शिक्षक संकुल की बैठकों में बच्चों के सीखने के स्तर और उनकी जरूरतों के आधार पर प्रभावी शिक्षण रणनीति तैयार की जाएगी। इन बैठकों में यह तय किया जा सकता है कि अलग-अलग स्तर के विद्यार्थियों के लिए किस तरह की अतिरिक्त गतिविधियां और अभ्यास कराए जाएं।
कमजोर बच्चों पर रहेगा खास फोकस
LEP में सबसे महत्वपूर्ण पहल उन बच्चों के लिए होगी जो अपनी कक्षा के अपेक्षित स्तर से पीछे हैं। ऐसे विद्यार्थियों की पहचान के बाद कैचअप शिक्षण प्रक्रिया के जरिए उनकी बुनियादी कमियों को दूर करने पर काम किया जाएगा।
कक्षा 6 से 8 का स्तर बच्चों की आगे की पढ़ाई के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे विषयों में अगर किसी बच्चे की बुनियाद कमजोर रह जाती है तो आगे की कक्षाओं में उसे परेशानी हो सकती है। ऐसे में समय रहते लर्निंग गैप की पहचान और उसे दूर करने की कोशिश बच्चों के शैक्षणिक प्रदर्शन को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।




Add comment