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NITI Aayog Report: 80% Higher Education Students Cite Lack of Practical Experience and Industry Exposure

NITI Aayog Report: डिग्री के बाद नौकरी के लिए अनुभव जरूरी, 80% छात्रों ने बताई प्रैक्टिकल ट्रेनिंग की कमी

NITI Aayog Report: 80% Higher Education Students Cite Lack of Practical Experience and Industry Exposure

भारत में सिर्फ डिग्री हासिल कर लेना नौकरी की तैयारी के लिए पर्याप्त नहीं रह गया है। कॉलेज और यूनिवर्सिटी की पढ़ाई के साथ छात्रों को वास्तविक काम का अनुभव और इंडस्ट्री की जरूरत के मुताबिक स्किल हासिल करना भी जरूरी है। नीति आयोग की नई रिपोर्ट ‘Reimagining Skilling for Viksit Bharat@2047’ ने शिक्षा, स्किलिंग और रोजगार के बीच मौजूद इस अंतर को सामने रखा है।

रिपोर्ट के अनुसार, उच्च शिक्षा के 80 फीसदी छात्र प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस और इंडस्ट्री एक्सपोजर की कमी को अपनी डिग्री के दौरान बड़ी समस्या मानते हैं। वहीं, औपचारिक क्षेत्र में काम करने वाले 47 फीसदी कर्मचारी नई नौकरी तलाशने में पहले के काम के अनुभव और इंटर्नशिप की कमी को बड़ी चुनौती मानते हैं। नीति आयोग ने 18 अगस्त 2026 को यह रिपोर्ट जारी की है।

रिपोर्ट का मुख्य संदेश यह है कि कॉलेज की पढ़ाई और नौकरी के बीच की दूरी कम करने के लिए छात्रों को पढ़ाई के दौरान ही काम की दुनिया से जोड़ना होगा। इसके लिए इंटर्नशिप, अप्रेंटिसशिप और इंडस्ट्री से जुड़े कोर्स को शिक्षा व्यवस्था का ज्यादा मजबूत हिस्सा बनाने की जरूरत बताई गई है।

डिग्री और नौकरी के बीच क्यों है अंतर?

नीति आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा स्किलिंग व्यवस्था में कई जगह पढ़ाई जरूरत से ज्यादा थ्योरी पर आधारित है। छात्रों को काम की वास्तविक परिस्थितियों का अनुभव, अपने कौशल का प्रमाण और नौकरी के लिए जरूरी तैयारी पर्याप्त रूप से नहीं मिल पाती।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कई इंटर्नशिप और अप्रेंटिसशिप केवल औपचारिकता बनकर रह जाती हैं। छात्रों को वास्तविक काम करने के बजाय कई बार केवल काम को देखने या सीमित गतिविधियों तक रखा जाता है। स्पष्ट जिम्मेदारी, सही मार्गदर्शन और सीखने के तय लक्ष्य नहीं होने से ऐसी इंटर्नशिप का फायदा सीमित रह जाता है।

यही वजह है कि डिग्री पूरी करने के बाद भी कई युवाओं के पास अपनी क्षमता साबित करने के लिए वास्तविक काम का अनुभव नहीं होता। नौकरी देने वाले संस्थानों के लिए भी उम्मीदवार की व्यावहारिक क्षमता का आकलन करना मुश्किल हो जाता है।

अप्रेंटिसशिप में MSME की भागीदारी कम

रिपोर्ट ने अप्रेंटिसशिप के मामले में MSME सेक्टर की कम भागीदारी को भी बड़ी समस्या बताया है। नीति आयोग के अनुसार, देश में करीब 6 करोड़ रजिस्टर्ड MSME हैं, लेकिन इनमें से लगभग 32 हजार ने ही National Apprenticeship Promotion Scheme (NAPS) के तहत अप्रेंटिस रखे थे।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2018 में ITI के केवल 8.5 फीसदी प्रशिक्षुओं ने अप्रेंटिसशिप की। इससे पता चलता है कि बड़ी संख्या में युवाओं को प्रशिक्षण पूरा करने के बाद भी वास्तविक कार्यस्थल का अनुभव नहीं मिल पाता।

नीति आयोग के मुताबिक, समस्या सिर्फ अवसरों की संख्या की नहीं है। छात्रों और नियोक्ताओं के बीच अच्छी और भरोसेमंद अप्रेंटिसशिप की जानकारी भी पर्याप्त नहीं है। अलग-अलग सरकारी योजनाओं और प्लेटफॉर्म के अलग-अलग तरीके से चलने के कारण उम्मीदवारों के लिए सही अवसर तलाशना मुश्किल हो जाता है।

नीति आयोग ने दिया ‘Apprenticeship for All’ का सुझाव

रिपोर्ट में अप्रेंटिसशिप को शिक्षा और रोजगार के बीच मजबूत रास्ते के तौर पर विकसित करने का सुझाव दिया गया है। नीति आयोग ने ‘Apprenticeship for All’ को एक प्रमुख सुधार के रूप में सामने रखा है।

इस मॉडल में ज्यादा से ज्यादा छात्रों को पढ़ाई के साथ कार्यस्थल पर सीखने का अवसर देने की बात कही गई है। डिग्री और डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में अप्रेंटिसशिप या दूसरे तरह के work-integrated learning विकल्पों को बढ़ाने की सिफारिश की गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, अप्रेंटिसशिप के अवसर बढ़ाने के लिए MSME को प्रोत्साहन देना जरूरी है। साथ ही राज्य स्तर पर ऐसा साझा प्लेटफॉर्म बनाया जा सकता है, जहां केंद्र और राज्य सरकार की अलग-अलग अप्रेंटिसशिप योजनाओं और अवसरों की जानकारी एक जगह मिले। इसे Skill India Digital Hub (SIDH) जैसे मौजूदा डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने का सुझाव भी दिया गया है।

छात्रों को पढ़ाई के दौरान ही मिलेगा काम का अनुभव

नीति आयोग का प्रस्ताव केवल कॉलेज के अंतिम वर्ष में इंटर्नशिप कराने तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट में शिक्षा और काम के बीच ज्यादा लचीला रास्ता बनाने पर जोर दिया गया है, ताकि छात्र पढ़ाई के साथ-साथ काम का अनुभव भी हासिल कर सकें।

इसके लिए work-integrated degree programmes, apprenticeship-embedded courses और इंडस्ट्री के साथ साझेदारी वाले शिक्षा मॉडल को बढ़ाने की बात कही गई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ऐसे मॉडल छात्रों को अपनी पढ़ाई के साथ वास्तविक काम की समझ विकसित करने में मदद कर सकते हैं।

Skill India Digital Hub से जोड़ने की सिफारिश

अलग-अलग सरकारी योजनाओं और प्लेटफॉर्म के कारण अवसरों की जानकारी बिखरी हुई है। नीति आयोग ने इस समस्या को दूर करने के लिए राज्य स्तर पर एक यूनिफाइड अप्रेंटिसशिप प्लेटफॉर्म बनाने का सुझाव दिया है।

ऐसे प्लेटफॉर्म पर छात्रों को अलग-अलग विभागों और योजनाओं के अवसर एक ही जगह मिल सकेंगे। इससे उम्मीदवारों और कंपनियों के बीच बेहतर संपर्क बनाने में मदद मिल सकती है। Skill India Digital Hub के साथ ऐसी व्यवस्था को जोड़ने से मौजूदा डिजिटल ढांचे का भी इस्तेमाल किया जा सकेगा।

AI और ऑटोमेशन से तेजी से बदल रही नौकरियों की जरूरत

रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और ग्रीन ट्रांजिशन के कारण काम की प्रकृति तेजी से बदल रही है। कई नई नौकरियां और भूमिकाएं सामने आ रही हैं, जबकि कुछ पारंपरिक कामों में बदलाव हो रहा है।

ऐसे माहौल में केवल एक डिग्री या एक बार हासिल की गई स्किल पर निर्भर रहना युवाओं के लिए पर्याप्त नहीं होगा। नीति आयोग ने लाइफलॉन्ग लर्निंग, अपस्किलिंग और रिस्किलिंग को ज्यादा मजबूत बनाने पर जोर दिया है।

रिपोर्ट में स्कूल स्तर से ही रोजगार से जुड़ी बुनियादी स्किल विकसित करने का सुझाव भी दिया गया है। इसमें कक्षा 6 से सामान्य employability और entrepreneurship skills तथा कक्षा 9 से जरूरत और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार vocational tracks शुरू करने का प्रस्ताव शामिल है। नीति आयोग के अनुसार, फिलहाल कक्षा 9-12 के स्तर पर हर 12 में से एक से भी कम सेकेंडरी स्कूल में vocational subjects उपलब्ध हैं।

रोजगार के हिसाब से बदलनी होगी स्किलिंग व्यवस्था

नीति आयोग की रिपोर्ट का जोर इस बात पर है कि स्किलिंग कार्यक्रमों की सफलता केवल इस आधार पर नहीं मापी जानी चाहिए कि कितने लोगों को ट्रेनिंग दी गई। असली सवाल यह होना चाहिए कि प्रशिक्षण के बाद कितने लोगों को रोजगार मिला, उनकी आय में कितना सुधार हुआ और वे आगे कैसे बढ़ सके।

रिपोर्ट में education, skilling और work के बीच ज्यादा आसान और लचीला रास्ता बनाने की जरूरत बताई गई है। इसमें सीखने के दौरान हासिल किए गए क्रेडिट को आगे की पढ़ाई और दूसरे प्रशिक्षण में इस्तेमाल करने की व्यवस्था को भी मजबूत करने की बात कही गई है। इसके लिए National Credit Framework (NCrF) को प्रभावी तरीके से लागू करना महत्वपूर्ण माना गया है।

भारत में हर साल बड़ी संख्या में युवा उच्च शिक्षा और रोजगार की दुनिया में प्रवेश करते हैं। ऐसे में कॉलेज की डिग्री को इंडस्ट्री की जरूरत, वास्तविक काम के अनुभव और लगातार नई स्किल सीखने के अवसरों से जोड़ना आने वाले वर्षों में रोजगार की चुनौती से निपटने के लिए अहम हो सकता है।

 

 

Asmita Sarkar

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