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AICTE Innovation and Entrepreneurship Doctoral Fellowship 2026: ₹10 Lakh Grant, Stipend and PhD Research Opportunities 

AICTE की नई पहल: अब स्टार्टअप, इंडस्ट्री और समाज की समस्याओं पर होगी PhD, 5 साल तक मिलेगी फेलोशिप

AICTE Innovation and Entrepreneurship Doctoral Fellowship 2026: ₹10 Lakh Grant, Stipend and PhD Research Opportunities 

देश में PhD रिसर्च को सिर्फ अकादमिक शोध और शोध पत्रों तक सीमित रखने के बजाय उसे इंडस्ट्री, स्टार्टअप और समाज की वास्तविक जरूरतों से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) ने AICTE Innovation and Entrepreneurship Doctoral Fellowship Programme (AIEDFP) शुरू किया है। इस योजना के तहत ऐसी PhD रिसर्च को बढ़ावा दिया जाएगा, जिसका इस्तेमाल वास्तविक समस्याओं के समाधान, नए प्रोडक्ट, तकनीक, सेवाओं, पेटेंट, स्टार्टअप और सामाजिक बदलाव के लिए किया जा सके।

AICTE ने इस कार्यक्रम के लिए पांच वर्षों में ₹245 करोड़ का वित्तीय प्रावधान किया है और इसके तहत 150 PhD फेलोशिप दी जाएंगी। कार्यक्रम को AICTE के चेयरमैन प्रो. योगेश सिंह और सदस्य सचिव प्रो. श्यामा रथ ने लॉन्च किया। योजना का मुख्य उद्देश्य रिसर्च को प्रयोगशाला और थीसिस तक सीमित रखने के बजाय उसे जमीन पर लागू होने वाले समाधान से जोड़ना है।

स्टार्टअप और इंडस्ट्री से जुड़ेगी PhD रिसर्च

नई फेलोशिप में ऐसे शोध को प्राथमिकता दी जाएगी, जिसमें किसी समस्या की पहचान कर उसका व्यावहारिक समाधान तैयार किया जा सके। इसमें इंडस्ट्री की जरूरतों, स्टार्टअप, रिसर्च संस्थानों और इनक्यूबेटर्स के साथ सहयोग पर भी जोर रहेगा।

रिसर्च का परिणाम केवल शोध पत्र प्रकाशित करना नहीं होगा। इसके तहत प्रोटोटाइप, पेटेंट, नई तकनीक, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, कमर्शियलाइजेशन, स्टार्टअप और सामाजिक प्रभाव जैसे परिणामों को भी महत्व दिया जाएगा।

इंडस्ट्री पार्टनर रिसर्च के लिए समस्या या जरूरत बता सकते हैं और जरूरत के अनुसार संसाधन, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने में सहयोग कर सकते हैं। चयनित शोधार्थियों के लिए 6 से 12 महीने तक इंडस्ट्री एक्सपोजर का विकल्प भी रखा गया है।

5 साल तक मिलेगी फेलोशिप

AIEDFP के तहत चयनित शोधार्थियों को अधिकतम पांच वर्षों तक वित्तीय सहायता दी जाएगी। पहले तीन वर्षों में ₹60,000 प्रति माह के साथ लागू HRA दिया जाएगा। चौथे और पांचवें वर्ष में यह राशि बढ़कर ₹70,000 प्रति माह के साथ लागू HRA हो जाएगी। यह सहायता निर्धारित पात्रता और संतोषजनक अकादमिक व रिसर्च प्रगति की शर्तों पर निर्भर होगी।

इसके अलावा प्रत्येक शोधार्थी को ₹10 लाख तक का Innovation Grant मिल सकता है। इसका इस्तेमाल प्रोटोटाइप तैयार करने, टेस्टिंग और वैलिडेशन, फील्ड ट्रायल, डेटा कलेक्शन, जरूरी सामग्री, रिसर्च से जुड़े खर्च और यात्रा जैसी गतिविधियों के लिए किया जा सकता है। इसका मकसद रिसर्च के नतीजे को वास्तविक इस्तेमाल के लायक समाधान में बदलने में मदद करना है।

पर्यावरण से लेकर सामाजिक न्याय तक समस्याओं पर शोध

इस कार्यक्रम में केवल इंजीनियरिंग और तकनीकी विषयों को ही महत्व नहीं दिया गया है। AICTE ने तकनीकी और गैर-तकनीकी दोनों क्षेत्रों में बहुविषयक और अंतर-विषयक शोध को बढ़ावा देने की बात कही है।

इसका दायरा पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन, गरीबी, सामाजिक न्याय, महिला सशक्तीकरण और दूसरी राष्ट्रीय व वैश्विक प्राथमिकताओं से जुड़े मुद्दों तक हो सकता है। सामाजिक विज्ञान से जुड़े शोध में भी केवल तकनीकी उत्पाद को सफलता का आधार नहीं माना जाएगा। नीति पर प्रभाव, समुदाय स्तर पर बदलाव, गुणात्मक शोध और सामाजिक नवाचार जैसे परिणामों को भी महत्व दिया जाएगा।

PhD के बाद नौकरी ही नहीं, स्टार्टअप का भी रास्ता

इस योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि शोधार्थियों को अपनी रिसर्च को आगे बढ़ाकर बाजार या समाज तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा। किसी शोध से उपयोगी प्रोटोटाइप तैयार होने के बाद उसे इंडस्ट्री को ट्रांसफर किया जा सकता है, उसका पेटेंट कराया जा सकता है या आगे चलकर उससे स्टार्टअप भी शुरू किया जा सकता है।

AICTE का लक्ष्य उच्च शिक्षा संस्थानों में ऐसा माहौल तैयार करना है, जहां शोध का सीधा संबंध इनोवेशन, रोजगार, उद्योग और समाज की जरूरतों से हो। इससे PhD करने वाले युवाओं के लिए अकादमिक करियर के साथ-साथ इंडस्ट्री और उद्यमिता के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है।

किन संस्थानों में हो सकेगी ऐसी PhD?

AICTE के नए कार्यक्रम का उद्देश्य ऐसे उच्च शिक्षा संस्थानों में शोध को बढ़ावा देना है, जहां मजबूत रिसर्च और इनोवेशन की सुविधा उपलब्ध हो। उपलब्ध जानकारी में कार्यक्रम के तहत संस्थागत पात्रता और चयन से जुड़े नियमों को निर्धारित शर्तों के अनुसार लागू किया जाना है।

इसलिए केवल किसी कॉलेज या विश्वविद्यालय की NIRF रैंकिंग देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि वहां AIEDFP के तहत PhD अपने आप शुरू हो जाएगी। संस्थान और शोधार्थी दोनों को AICTE की निर्धारित पात्रता और कार्यक्रम की शर्तों को पूरा करना होगा।

क्यों महत्वपूर्ण है AICTE का यह कार्यक्रम?

भारत में बड़ी संख्या में PhD शोध होते हैं, लेकिन हर शोध का व्यावहारिक इस्तेमाल नहीं हो पाता। AIEDFP इसी अंतर को कम करने की कोशिश है। इसमें रिसर्च को समस्या की पहचान से लेकर प्रोटोटाइप, परीक्षण, इंडस्ट्री सहयोग, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और संभावित कमर्शियलाइजेशन तक ले जाने पर जोर है।

पांच वर्षों में ₹245 करोड़ के बजट और 150 फेलोशिप के साथ यह कार्यक्रम संख्या के लिहाज से सीमित है, लेकिन इसका फोकस ऐसे शोध पर है जिसका असर अकादमिक क्षेत्र से बाहर भी दिखाई दे। AICTE के अनुसार इसका व्यापक उद्देश्य देश में इनोवेशन और उद्यमिता आधारित मजबूत रिसर्च माहौल तैयार करना है।

 

Asmita Sarkar

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