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B.Ed Teachers Bridge Course: NIOS 6-Month Programme for Primary Teachers, Over 66,000 Applications Approved 

B.Ed Teachers Bridge Course: प्राथमिक शिक्षकों के लिए 6 महीने का कोर्स, 66 हजार से ज्यादा आवेदन स्वीकृत

B.Ed Teachers Bridge Course: NIOS 6-Month Programme for Primary Teachers, Over 66,000 Applications Approved 

प्राथमिक स्कूलों में पढ़ा रहे B.Ed डिग्रीधारी शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण अपडेट है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) इन शिक्षकों के लिए 6 महीने का Certificate Bridge Course in Primary Teacher Education संचालित कर रहा है। इस कोर्स का मकसद ऐसे इन-सर्विस प्राथमिक शिक्षकों को प्राथमिक स्तर पर पढ़ाने के लिए जरूरी प्रशिक्षण देना है, जिनकी नियुक्ति उस अवधि में हुई थी जब B.Ed को प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति के लिए मान्य योग्यता माना गया था।

NIOS के मौजूदा रिकॉर्ड के अनुसार, 5 सितंबर 2026 तक इस ब्रिज कोर्स के लिए कुल 76,731 आवेदन दर्ज हुए हैं। इनमें से 67,529 आवेदन के लिए फीस जमा हुई है और 66,154 आवेदन राज्य स्तर पर स्वीकृत हो चुके हैं। यानी 66,154 का आंकड़ा केवल रजिस्ट्रेशन नहीं, बल्कि अब तक स्वीकृत आवेदनों से जुड़ा है।

उत्तर प्रदेश से सबसे ज्यादा शिक्षक

ब्रिज कोर्स के लिए उत्तर प्रदेश से सबसे ज्यादा आवेदन सामने आए हैं। NIOS के आंकड़ों में प्रयागराज क्षेत्र से ही बड़ी संख्या में आवेदन दर्ज हुए हैं। 5 सितंबर तक प्रयागराज रीजन में 33,055 आवेदन दर्ज थे, जिनमें 31,618 आवेदन राज्य स्तर पर स्वीकृत हो चुके थे।

इसके बाद भोपाल रीजन में 11,373, पटना में 8,290 और रायपुर में 1,503 आवेदन दर्ज किए गए थे। पटना में 7,569 और रायपुर में 1,208 आवेदन राज्य स्तर पर स्वीकृत हो चुके थे।

यह आंकड़े बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लागू किए जा रहे इस ब्रिज कोर्स का असर बड़ी संख्या में पहले से सेवा में कार्यरत प्राथमिक शिक्षकों पर पड़ रहा है।

किन B.Ed शिक्षकों के लिए जरूरी है ब्रिज कोर्स?

NIOS के अनुसार, यह कोर्स उन इन-सर्विस प्राथमिक शिक्षकों के लिए है, जिनके पास B.Ed की योग्यता है और जिनकी नियुक्ति 28 जून 2018 से 11 अगस्त 2023 के बीच हुई थी। यह वही अवधि है जिसमें NCTE की 28 जून 2018 की अधिसूचना के तहत B.Ed को प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति की योग्यता में शामिल किया गया था।

मामला सुप्रीम कोर्ट के Devesh Sharma बनाम Union of India मामले से जुड़ा है। 11 अगस्त 2023 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि कक्षा 1 से 5 तक के प्राथमिक शिक्षकों के लिए आवश्यक योग्यता D.El.Ed है, B.Ed नहीं। इसके साथ ही 28 जून 2018 की वह अधिसूचना भी रद्द हो गई थी, जिसके तहत B.Ed उम्मीदवारों को प्राथमिक शिक्षक पद के लिए योग्य माना गया था।

हालांकि, बाद में 8 अप्रैल 2024 के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने उन B.Ed शिक्षकों को राहत दी, जो फैसले से पहले नियुक्त हो चुके थे। ऐसे शिक्षकों की नियुक्ति को केवल B.Ed योग्यता के आधार पर प्रभावित नहीं करने और उन्हें निर्धारित ब्रिज कोर्स पूरा करने का अवसर देने की व्यवस्था की गई।

एक साल के भीतर पूरा करना होगा कोर्स

NIOS का यह ब्रिज कोर्स 6 महीने का है। आधिकारिक निर्देशों के अनुसार, शिक्षकों को NIOS द्वारा कोर्स शुरू किए जाने के बाद निर्धारित समयसीमा के भीतर इसे पूरा करना होगा। मौजूदा NIOS पोर्टल के अनुसार, कोर्स को शुरू होने की तारीख से एक साल के भीतर पूरा करना जरूरी है।

अगर संबंधित शिक्षक निर्धारित समय में कोर्स पूरा नहीं करते हैं, तो उनकी नियुक्ति अमान्य हो सकती है। NIOS ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह ब्रिज कोर्स भविष्य में प्राथमिक शिक्षक की नई नौकरी पाने के लिए मान्य योग्यता नहीं होगा। इसका उद्देश्य पहले से सेवा में मौजूद पात्र B.Ed शिक्षकों को अपनी मौजूदा नियुक्ति बनाए रखने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण देना है।

ऑनलाइन और दूरस्थ शिक्षा के जरिए होगी पढ़ाई

NIOS इस कार्यक्रम को Open and Distance Learning (ODL) mode में संचालित करेगा। कोर्स में केवल ऑनलाइन पढ़ाई ही नहीं, बल्कि प्राथमिक स्कूल में स्कूल एक्सपीरियंस और संपर्क कक्षाओं का भी प्रावधान है।

NIOS के कार्यक्रम विवरण के अनुसार, प्रशिक्षण में कम से कम 20 दिन का स्कूल एक्सपीरियंस और इसके अलावा कम से कम 10 दिन की contact classes शामिल होंगी। स्कूल एक्सपीरियंस के दौरान न्यूनतम 80 प्रतिशत उपस्थिति भी जरूरी बताई गई है।

इस प्रशिक्षण में प्राथमिक बच्चों की सीखने की प्रक्रिया, अलग-अलग स्तर के बच्चों के लिए पढ़ाने के तरीके, कक्षा में विविधता, मूल्यांकन और प्राथमिक शिक्षा से जुड़े अन्य पहलुओं पर ध्यान दिया जाएगा।

आवेदन और सत्यापन की प्रक्रिया क्या है?

NIOS की व्यवस्था के अनुसार, शिक्षक द्वारा आवेदन जमा करने के बाद उसके विवरण की जांच स्कूल के प्रधानाचार्य या Head of School स्तर पर की जाती है। इसके बाद राज्य के Nodal Officer की ओर से अंतिम पुष्टि की जाती है।

NIOS पोर्टल पर ऐसे शिक्षकों के लिए अलग व्यवस्था भी दी गई है जिनकी नियुक्ति निर्धारित अवधि से बाहर है, लेकिन उन्हें किसी अदालत से इस संबंध में राहत मिली है। ऐसे उम्मीदवारों को Court Order Registration के तहत आवेदन करना होता है और Affidavit, Writ Petition तथा Court Order की कॉपी जैसे अतिरिक्त दस्तावेज देने होते हैं।

शिक्षकों को अब किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

इस ब्रिज कोर्स से जुड़े शिक्षकों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे NIOS की आधिकारिक सूचना और अपने राज्य के शिक्षा विभाग के निर्देशों पर नजर रखें। आवेदन हो जाने के बाद केवल रजिस्ट्रेशन पर्याप्त नहीं है; आवेदन का सत्यापन और राज्य स्तर पर पुष्टि भी महत्वपूर्ण है।

NIOS ने ब्रिज कोर्स के लिए अलग पोर्टल बनाया है, जहां पात्रता, आवेदन, सत्यापन और कोर्स से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। कोर्स की शुरुआत और आगे की शैक्षणिक गतिविधियों से संबंधित आधिकारिक सूचना भी इसी माध्यम से जारी की जाएगी।

यह मामला सिर्फ एक प्रशिक्षण कार्यक्रम तक सीमित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद B.Ed और D.El.Ed की प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति में भूमिका को लेकर जो कानूनी स्थिति बनी, यह ब्रिज कोर्स उसी संक्रमण को संभालने का रास्ता है। ऐसे में पात्र शिक्षकों के लिए समय पर कोर्स पूरा करना उनकी मौजूदा सेवा जारी रखने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।

 

Asmita Sarkar

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