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A new initiative to promote library culture: a daily 30-minute reading period in Delhi's government schools

दिल्ली के सरकारी स्कूलों में अब रोज 30 मिनट का रीडिंग पीरियड, लाइब्रेरी संस्कृति को बढ़ावा देने की नई पहल

A new initiative to promote library culture: a daily 30-minute reading period in Delhi's government schools

दिल्ली के सरकारी स्कूलों में अब छात्रों की पढ़ाई के साथ-साथ उनकी पढ़ने की आदतों (Reading Habits) को विकसित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप दिल्ली शिक्षा निदेशालय (DoE) ने सभी सरकारी स्कूलों को निर्देश जारी कर छात्रों के लिए प्रतिदिन 30 मिनट का अनिवार्य रीडिंग पीरियड निर्धारित करने को कहा है। इस पहल का मकसद छात्रों में किताबें पढ़ने की रुचि बढ़ाना, भाषा कौशल को मजबूत करना और स्कूल लाइब्रेरी के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित करना है।

शिक्षा विभाग के अनुसार, स्कूलों में पढ़ने की संस्कृति विकसित करने के लिए पूरे शैक्षणिक वर्ष का एक विस्तृत गतिविधि कैलेंडर तैयार किया गया है। इसके तहत केवल रीडिंग पीरियड ही नहीं, बल्कि लाइब्रेरी आधारित कई रचनात्मक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि छात्र किताबों से अधिक जुड़ सकें।

रोजाना होगा 30 मिनट का रीडिंग पीरियड

नए निर्देशों के तहत प्रत्येक स्कूल दिवस पर छात्रों के लिए 30 मिनट का रीडिंग पीरियड आयोजित किया जाएगा। इस दौरान छात्र शांत वातावरण में अपनी पसंद की किताबें पढ़ सकेंगे। इसके साथ ही किताबों पर चर्चा, पुस्तक समीक्षा और पढ़ने से जुड़ी अन्य गतिविधियां भी कराई जाएंगी।

महत्वपूर्ण बात यह है कि स्कूलों को इस रीडिंग पीरियड के लिए किसी अन्य विषय या कक्षा के समय में कटौती करने की अनुमति नहीं होगी। स्कूलों को अपने समय-सारणी में अलग से व्यवस्था करनी होगी। इसके अलावा प्रतिदिन 10 से 15 मिनट का “ड्रॉप एवरीथिंग एंड रीड” (DEAR) सत्र भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें छात्र और शिक्षक कुछ समय केवल पढ़ने के लिए समर्पित करेंगे।

लाइब्रेरी को बनाया जाएगा अधिक सुलभ

शिक्षा विभाग ने स्कूल लाइब्रेरी को छात्रों के लिए अधिक उपयोगी और आकर्षक बनाने पर भी जोर दिया है। निर्देशों के अनुसार लंच ब्रेक के दौरान भी लाइब्रेरी खुली रखी जाएगी, ताकि इच्छुक छात्र अवकाश के समय किताबें पढ़ सकें।

इसके साथ ही स्कूल परिसरों में रीडिंग कॉर्नर और रीडिंग वॉल विकसित किए जाएंगे। रीडिंग वॉल पर छात्र अपनी पसंदीदा किताबों की समीक्षा, प्रेरक उद्धरण, चित्र और पुस्तक संबंधी सुझाव साझा कर सकेंगे। इससे छात्रों को अपनी पढ़ने की यात्रा दूसरों के साथ साझा करने का अवसर मिलेगा।

हर छात्र के लिए कम से कम 20 किताबों की व्यवस्था

नई व्यवस्था के तहत स्कूल लाइब्रेरी में प्रति छात्र कम से कम 20 पुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। लाइब्रेरियन को नई पुस्तकों को प्रमुखता से प्रदर्शित करने, नियमित रूप से पुस्तकें जारी करने और छात्रों के पढ़ने का रिकॉर्ड बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इसके अलावा उन छात्रों की पहचान करने के भी निर्देश दिए गए हैं जिनकी पढ़ने में रुचि कम है। ऐसे छात्रों को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि वे भी पुस्तक संस्कृति से जुड़ सकें।

साल भर चलेंगी रीडिंग आधारित गतिविधियां

रीडिंग अभियान को केवल लाइब्रेरी पीरियड तक सीमित नहीं रखा जाएगा। स्कूलों में पूरे वर्ष विभिन्न गतिविधियों का आयोजन होगा। इनमें बुक डिस्कशन, रीड-अलाउड सेशन, बुक टॉक, स्टोरी टेलिंग और पुस्तक समीक्षा जैसी गतिविधियां शामिल हैं।

हर महीने रीडिंग असेंबली आयोजित करने का सुझाव भी दिया गया है। इसके अलावा रीडिंग चैलेंज, पुस्तक प्रदर्शनी, बुक डोनेशन ड्राइव और वार्षिक रीडिंग फेस्टिवल जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। कुछ छात्रों को “रीडिंग एंबेसडर” की जिम्मेदारी दी जा सकती है, जो अपने साथियों को किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे।

परिवारों की भी होगी भागीदारी

शिक्षा विभाग की योजना केवल स्कूल परिसर तक सीमित नहीं है। छात्रों में पढ़ने की आदत को घर तक पहुंचाने के लिए साल में दो बार फैमिली रीडिंग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से अभिभावकों को भी बच्चों के साथ पढ़ने और चर्चा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

इसके अलावा स्कूलों को “रीडिंग पासपोर्ट” जैसी व्यवस्था अपनाने का सुझाव दिया गया है, जिसके जरिए छात्रों की पढ़ने से जुड़ी गतिविधियों और प्रगति का नियमित रिकॉर्ड रखा जा सकेगा।

क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित रूप से किताबें पढ़ने से भाषा कौशल, शब्द भंडार, समझने की क्षमता और रचनात्मक सोच का विकास होता है। डिजिटल युग में जहां बच्चों का समय स्क्रीन पर अधिक बीत रहा है, वहीं यह पहल उन्हें पुस्तकों से जोड़ने और पढ़ने की संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

दिल्ली सरकार की यह नई पहल न केवल छात्रों में पढ़ने की आदत विकसित करेगी, बल्कि उन्हें बेहतर संवाद कौशल, आलोचनात्मक सोच और आत्मविश्वास विकसित करने में भी मदद करेगी। आने वाले समय में इसका सकारात्मक प्रभाव छात्रों के शैक्षणिक प्रदर्शन और समग्र व्यक्तित्व विकास पर भी देखने को मिल सकता है।

 

Asmita Sarkar

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