
कर्नाटक सरकार ने स्कूल स्तर से ही छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नई तकनीकों की जानकारी देने की दिशा में बड़ा कदम उठाने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कहा कि राज्य के स्कूलों में कक्षा 6 से AI शिक्षा शुरू करने की योजना है। इसके लिए सरकार ने ‘AI अक्षरा अभियान’ और ‘कोडिंग गुरुकुल’ जैसे कार्यक्रमों की घोषणा की है।
मुख्यमंत्री ने बेंगलुरु के फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ परेड ग्राउंड में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान कहा कि दुनिया तेजी से तकनीक के नए दौर में प्रवेश कर रही है और कर्नाटक के युवाओं को इस बदलाव के लिए अभी से तैयार करना जरूरी है। उन्होंने कहा, “हम अब एक नए तकनीकी दौर में प्रवेश कर रहे हैं। AI अभियान और कोडिंग गुरुकुल—यह आपका दौर है, एक नया दौर है।”
कक्षा 6 से शुरू होगी AI की पढ़ाई
शिवकुमार के अनुसार, सरकार का लक्ष्य छात्रों को शुरुआती स्तर से ही नई तकनीक और AI से परिचित कराना है, ताकि वे आगे की पढ़ाई और रोजगार के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें। उन्होंने कहा कि ‘AI अक्षरा अभियान और कोडिंग गुरुकुल’ इसी दिशा में सरकार का महत्वपूर्ण कार्यक्रम होगा।
हालांकि, सरकार की ओर से अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कक्षा 6 से AI के तहत कौन-कौन से विषय पढ़ाए जाएंगे, पाठ्यक्रम कैसा होगा और इसे सभी सरकारी स्कूलों में किस चरण में लागू किया जाएगा। इसलिए फिलहाल इसे AI शिक्षा शुरू करने की सरकारी घोषणा के रूप में देखा जाना चाहिए।
बेंगलुरु में AI यूनिवर्सिटी की भी तैयारी
कर्नाटक सरकार की AI योजना केवल स्कूली शिक्षा तक सीमित नहीं है। शिवकुमार ने बेंगलुरु में भारत की पहली सरकार-प्रेरित AI यूनिवर्सिटी स्थापित करने की योजना भी दोहराई है।
जुलाई 2026 में मुख्यमंत्री ने AI यूनिवर्सिटी के साथ एक AI Hub विकसित करने की घोषणा की थी। प्रस्तावित AI यूनिवर्सिटी का उद्देश्य AI के क्षेत्र में प्रतिभा तैयार करना, रिसर्च को बढ़ावा देना और विश्वविद्यालयों, उद्योग तथा सरकार के बीच सहयोग को मजबूत करना है। सरकार ने यह भी कहा है कि यूनिवर्सिटी में उद्योग की भागीदारी पर जोर दिया जाएगा।
एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रस्तावित AI यूनिवर्सिटी के लिए बेंगलुरु में 100 एकड़ का कैंपस और राज्य के कुछ अन्य शहरों में क्षेत्रीय कैंपस की योजना भी बताई गई है।
गांवों के छात्रों तक भी पहुंचेगी AI शिक्षा
सरकार की योजना में ग्रामीण छात्रों को भी AI शिक्षा से जोड़ने पर जोर है। जुलाई में शिवकुमार ने कहा था कि प्रस्तावित AI यूनिवर्सिटी और इससे जुड़े कार्यक्रमों के जरिए ग्रामीण छात्रों को कक्षा 6 से AI शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा।
यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि AI और डिजिटल तकनीक से जुड़ी शिक्षा अभी भी शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में समान रूप से उपलब्ध नहीं है। स्कूल स्तर पर शुरुआती प्रशिक्षण मिलने से छात्रों को आगे चलकर कंप्यूटर साइंस, डेटा साइंस, AI, रोबोटिक्स और दूसरी तकनीकी पढ़ाई के लिए मजबूत आधार मिल सकता है।
AI शिक्षा के साथ स्कूलों की गुणवत्ता पर भी जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल नई तकनीक की पढ़ाई शुरू करना पर्याप्त नहीं है। स्कूलों और कॉलेजों की शिक्षा व्यवस्था और गुणवत्ता में भी सुधार करना जरूरी है। सरकार का लक्ष्य युवाओं को ऐसे कौशल देना है, जिनकी जरूरत तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था और वैश्विक रोजगार बाजार में होगी।
कर्नाटक सरकार पहले ही राज्य को AI के क्षेत्र में आगे ले जाने के लिए कई योजनाओं की घोषणा कर चुकी है। इनमें AI यूनिवर्सिटी, AI Hub और AI से जुड़ी शिक्षा के साथ-साथ तकनीकी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की योजनाएं शामिल हैं। सरकार ने AI के लिए ग्रीन डेटा सेंटर विकसित करने की दिशा में भी योजनाएं सामने रखी हैं।
छात्रों के लिए क्या बदलेगा?
अगर कक्षा 6 से AI शिक्षा की योजना प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो छात्रों को कम उम्र में ही कंप्यूटर, कोडिंग, डेटा और AI जैसी तकनीकों की बुनियादी समझ मिल सकती है। इससे आगे चलकर वे Computer Science, Artificial Intelligence, Machine Learning, Robotics और Data Science जैसे क्षेत्रों में करियर के विकल्पों को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे।
हालांकि, इस योजना की सफलता केवल घोषणा पर निर्भर नहीं करेगी। इसके लिए प्रशिक्षित शिक्षक, बेहतर कंप्यूटर लैब, इंटरनेट सुविधा, गुणवत्तापूर्ण पाठ्यक्रम और ग्रामीण तथा सरकारी स्कूलों में समान संसाधन उपलब्ध कराना भी जरूरी होगा।
कर्नाटक सरकार की मौजूदा योजनाओं से संकेत मिलता है कि राज्य AI को केवल उच्च शिक्षा और उद्योग तक सीमित रखने के बजाय स्कूल स्तर से लेकर रिसर्च और रोजगार तक एक व्यापक व्यवस्था तैयार करना चाहता है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि ‘AI अक्षरा अभियान’ और ‘कोडिंग गुरुकुल’ को जमीन पर किस तरह लागू किया जाता है और राज्य के कितने छात्रों तक इसका लाभ पहुंचता है।




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