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कृषि में AI क्रांति: स्मार्ट खेती की ओर भारत का बड़ा कदम

The AI ​​Revolution in Agriculture: India's Big Step Towards Smart Farming

जलवायु परिवर्तन, मिट्टी का क्षरण, छोटी होती जोत और वित्तीय समस्याएं आज भारत के कृषि क्षेत्र के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। दूसरी ओर, तकनीकी नवाचार इस क्षेत्र में तेजी से प्रवेश कर रहे हैं, जो इन समस्याओं से निपटने की नई संभावनाएं खोल रहे हैं। इन्हीं में से एक है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) — जो भारतीय खेती की उत्पादकता, स्थिरता और लचीलापन (Resilience) बढ़ाने में गेम-चेंजर बनता जा रहा है।

 

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) ने भारत सरकार और BCG X के सहयोग से जारी अपनी रिपोर्ट — ‘भारत में भविष्य की खेती: कृषि में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बढ़ाने के लिए प्लेबुक’ — में कृषि क्षेत्र में AI के उपयोग का रोडमैप पेश किया है। इस रिपोर्ट का केंद्र तीन स्तंभों वाला फ्रेमवर्क है — इनेबल, क्रिएट और डिलीवर, जो किसान-केंद्रित इनोवेशन पर ज़ोर देता है।

 

तेलंगाना के ‘सागु बागू प्रोजेक्ट’ जैसे उदाहरण बताते हैं कि कैसे AI खेती की पैदावार बढ़ाने, लागत घटाने और छोटे किसानों को सशक्त बनाने में मददगार है। रिपोर्ट में यह भी अपील की गई है कि सरकार, स्टार्टअप्स और अकादमिक जगत मिलकर काम करें ताकि भारत के 15 करोड़ किसान डिजिटल कृषि क्रांति का लाभ उठा सकें।

 

खेतों में AI के सफल प्रयोग

तेलंगाना के सागु बागू प्रोजेक्ट में 7,000 छोटे मिर्च किसानों ने AI-आधारित एप्लिकेशन का उपयोग किया। नतीजे चौंकाने वाले थे— पैदावार में 21% बढ़ोतरी, उत्पादों की कीमत में 11% की वृद्धि, और उर्वरक व कीटनाशक उपयोग में 9% की कमी।

 

हर सीजन में किसानों की प्रति एकड़ आय में लगभग 800 डॉलर की बढ़ोतरी हुई।

इसी तरह, आंध्र प्रदेश में AI आधारित सीडिंग एडवाइजरी से उत्पादन में 30% सुधार और पेस्ट-प्रीडिक्शन मॉडल से 3,000 किसानों को कीट प्रबंधन में मदद मिली।

 

ये सफलताएं बताती हैं कि AI खेती को सशक्त, लाभदायक और टिकाऊ बनाने में कितनी प्रभावी भूमिका निभा सकता है।

 

चुनौतियां: अब भी सीमित है अपनाने की रफ्तार

फिलहाल 20% से भी कम भारतीय किसान किसी न किसी डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। इसका कारण है— सीमित आय, छोटी और बिखरी जमीनें, वित्तीय संसाधनों की कमी, और कमजोर डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर।

 

रिपोर्ट में कहा गया है कि AI को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग टूल नहीं, बल्कि एक समग्र इकोसिस्टम बनाना जरूरी है।

 

AI अपनाने में रुकावटें और IMPACT फ्रेमवर्क

WEF की रिपोर्ट में यह माना गया है कि कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा क्वालिटी की समस्या और किफायती विकल्पों की कमी, छोटे किसानों के बीच AI के प्रसार को धीमा करती हैं।

 

इन्हें दूर करने के लिए रिपोर्ट में IMPACT AI Framework सुझाया गया है, जो तीन स्तंभों पर आधारित है —

  1. इनेबल: सरकारें नीति, नियमन और डेटा शेयरिंग फ्रेमवर्क मजबूत करें।
  2. क्रिएट: स्टार्टअप्स, शोध संस्थान और निजी क्षेत्र मिलकर नवाचार को बढ़ावा दें।
  3. डिलीवर: सुनिश्चित किया जाए कि AI के लाभ हर किसान तक पहुंचें।

 

AI के चार प्रमुख उपयोग

रिपोर्ट के अनुसार, भारत के लिए सबसे उपयोगी चार AI एप्लिकेशन हैं —

  1. फसल की स्मार्ट प्लानिंग: कीमतों, मिट्टी की सेहत और मौसम के डेटा के आधार पर सही फसल का चयन।
  2. मिट्टी की सेहत का रियल-टाइम विश्लेषण: पोषण संतुलन और नमी के स्तर का पता लगाकर रीजेनेरेटिव खेती को बढ़ावा।
  3. कीट अनुमान और नियंत्रण: AI-पावर्ड सिस्टम से 36 अरब डॉलर के सालाना नुकसान को घटाने की दिशा में कदम।
  4. स्मार्ट मार्केटप्लेस: किसानों को खरीदारों से जोड़ने वाले AI-आधारित प्लेटफॉर्म जो पारदर्शी दाम और गुणवत्ता सुनिश्चित करें।

 

सीख और आगे की राह

रिपोर्ट के अनुसार, AI अपनाने से जुड़ी तीन मुख्य सीख हैं —

  1. इंटीग्रेशन जरूरी है: मिट्टी, फसल, कीट और बाजार डेटा को जोड़ना सबसे अधिक प्रभावी है।
  2. बुनियादी ढांचे की जरूरत: डेटा एक्सचेंज, फाइनेंसिंग और लास्ट-माइल डिलीवरी नेटवर्क को मज़बूत करना होगा।
  3. साझेदारी ही सफलता की कुंजी है: सरकार, उद्योग, शिक्षा जगत और किसान संगठनों का संयुक्त प्रयास ही स्थायी सफलता देगा।

WEF की यह रिपोर्ट सिर्फ भारत के लिए नहीं, बल्कि उन सभी विकासशील देशों के लिए मॉडल साबित हो सकती है जो कृषि में स्थिरता और उत्पादकता बढ़ाना चाहते हैं।

भारत के पास IndiaAI Mission, Agri Stack और VISTAAR जैसे कार्यक्रमों की मदद से AI को खेती के हर पहलू में एकीकृत करने का सुनहरा अवसर है।

 

यदि नीति, बाजार और अनुसंधान की ताकतें एकजुट हुईं, तो भारत न केवल AI-संचालित खेती में वैश्विक लीडर बन सकता है, बल्कि यह साबित कर सकता है कि तकनीक और परंपरा मिलकर भविष्य की खेती को नया रूप दे सकती हैं।

 

एडइनबॉक्स टीम

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