
भारत में नई पीढ़ी के छात्र तेजी से सस्टेनेबल एग्रीकल्चर (सतत कृषि) की ओर आकर्षित हो रहे हैं। बदलते जॉब ट्रेंड, जलवायु परिवर्तन की चिंता और एग्री-टेक सेक्टर में उभरते अवसर इसके प्रमुख कारण हैं। शहरों और गांवों के युवा ऑर्गेनिक फार्मिंग और एग्रोइकोलॉजी जैसे कोर्स में दाखिला ले रहे हैं, जहां उन्हें व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ अर्थपूर्ण करियर का रास्ता मिलता है।
क्या है सस्टेनेबल एग्रीकल्चर और क्यों बढ़ रही है इसकी मांग?
सस्टेनेबल एग्रीकल्चर ऐसी खेती प्रणाली है जो वर्तमान पीढ़ी की खाद्य जरूरतों को पूरा करते हुए जमीन, पानी और पर्यावरण को भविष्य के लिए सुरक्षित रखती है। इसमें मिट्टी की सेहत सुधारना, पानी की बचत, रासायनिक दवाओं का कम उपयोग और जैव विविधता को बढ़ावा देना शामिल है।
इसमें फसल चक्र (क्रॉप रोटेशन), प्राकृतिक कीट नियंत्रण, ड्रिप सिंचाई और वर्षा जल संचयन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। भारत में यह पद्धति सूखे की समस्या से निपटने और पैदावार बढ़ाने में सहायक साबित हो रही है। सरकार की योजनाएं जैसे Pradhan Mantri Krishi Sinchayee Yojana पानी के बेहतर प्रबंधन को बढ़ावा देती हैं।
युवाओं में बढ़ती दिलचस्पी
पिछले कुछ वर्षों में सस्टेनेबिलिटी आधारित कृषि पाठ्यक्रमों में दाखिले बढ़े हैं। Shoolini University जैसे संस्थानों में ऑर्गेनिक फार्मिंग कोर्स लोकप्रिय हो रहे हैं। वहीं Tamil Nadu Agricultural University के सर्वे बताते हैं कि जिन छात्रों का पारिवारिक पृष्ठभूमि खेती से जुड़ी है और जिन्हें बाजार तक पहुंच है, वे कृषि करियर को प्राथमिकता दे रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यही रुझान दिखता है। University of California के कैंपसों में ऑर्गेनिक इंटर्नशिप और एग्रोइकोलॉजी कार्यक्रमों में सैकड़ों छात्रों ने नामांकन लिया है। भारत में Lovely Professional University के बीएससी एग्रीकल्चर स्नातक भी पारंपरिक नौकरियों की बजाय सस्टेनेबल विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं।
जलवायु परिवर्तन और फूड सिक्योरिटी की चिंता
कोविड-19 और बदलते मौसम चक्रों ने युवाओं को खाद्य सुरक्षा के महत्व का एहसास कराया है। नो-टिल फार्मिंग, प्राकृतिक कीट नियंत्रण और फसल चक्र जैसी तकनीकें मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद करती हैं। Himachal Pradesh में बड़े स्तर पर चल रही परियोजनाओं ने किसानों की आय और उत्पादन दोनों में सुधार किया है।
नई शिक्षा नीति National Education Policy 2020 भी समग्र शिक्षा पर जोर देती है, जिसमें पर्यावरण और कृषि कौशल को महत्व दिया गया है।
सस्टेनेबल एग्रीकल्चर में करियर के अवसर
आज खेती केवल कम आय वाला पेशा नहीं रह गया है। एग्रीबिजनेस, रिसर्च, एक्सटेंशन सर्विस, एग्री-स्टार्टअप और ग्रीन जॉब्स जैसे कई विकल्प उपलब्ध हैं। ऑर्गेनिक उत्पादों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। कई राज्यों में न्यूनतम समर्थन मूल्य और सरकारी सहायता योजनाएं किसानों को स्थिर आय देती हैं।
Azim Premji University जैसे संस्थान सस्टेनेबल एग्रीकल्चर को ग्रामीण विकास से जोड़कर पढ़ाते हैं, जिससे छात्रों को जमीनी समझ मिलती है।
प्रकृति से जुड़ाव और बेहतर जीवनशैली
कई युवा डेस्क जॉब की सीमाओं से बाहर निकलकर ऐसा काम चाहते हैं जिसका सीधा असर समाज और पर्यावरण पर पड़े। खेती के जरिए वे जमीन, पौधों और पशुओं के साथ जुड़ते हैं। प्रदूषण से जूझते शहरों के युवाओं के लिए यह साफ हवा, नियमित दिनचर्या और उद्देश्यपूर्ण जीवन का अवसर देता है।
कैसे बनें सस्टेनेबल एग्रीकल्चर प्रोफेशनल?
सबसे पहले 12वीं के बाद बीएससी एग्रीकल्चर, हॉर्टिकल्चर या फॉरेस्ट्री में दाखिला लें। Indian Council of Agricultural Research से मान्यता प्राप्त कॉलेजों जैसे Punjab Agricultural University या तमिलनाडु एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर सकते हैं। प्रवेश के लिए ICAR AIEEA-UG जैसी परीक्षाएं देनी होती हैं।
इसके बाद इंटर्नशिप और फील्ड वर्क बेहद जरूरी है। मिट्टी परीक्षण, ड्रिप सिंचाई और प्राकृतिक खेती के प्रयोगों का अनुभव करियर में मदद करता है। आगे एमएससी एग्रोइकोलॉजी या सॉइल साइंस जैसे कोर्स कर सकते हैं।
सरकारी क्षेत्र में बैंक एग्री फील्ड ऑफिसर बनने के लिए IBPS SO AFO परीक्षा दे सकते हैं। निजी कंपनियों और एग्री-स्टार्टअप में भी अवसर हैं। उद्यमिता के इच्छुक छात्र फूड प्रोसेसिंग या ऑर्गेनिक फार्मिंग यूनिट शुरू कर सकते हैं।
चुनौतियां और संभावनाएं
पानी की कमी, कीट प्रबंधन और बाजार की अस्थिरता जैसी चुनौतियां मौजूद हैं, लेकिन सोलर पंप, प्रिसिजन फार्मिंग और सरकारी सहायता योजनाएं इन समस्याओं का समाधान दे रही हैं। महिलाएं भी कृषि क्षेत्र में आगे आ रही हैं और कई सरकारी कार्यक्रम उन्हें सशक्त बना रहे हैं।
संक्षेप में, सस्टेनेबल एग्रीकल्चर उन युवाओं के लिए बेहतरीन विकल्प है जो अर्थपूर्ण काम, पर्यावरण संरक्षण और स्थिर करियर चाहते हैं। हरित तकनीक और कृषि बजट में बढ़ते निवेश के बीच यह क्षेत्र आने वाले वर्षों में और तेजी से बढ़ेगा।




Add comment