
ऑस्ट्रेलिया उन कुछेक देशों में शामिल है जो भारतीय छात्रों को हमेशा से अपनी ओर आकर्षित करता रहा है। ऑस्ट्रेलिया में स्टडी के लिए बड़ी तादाद में भारतीय छात्र जाते रहे हैं, लेकिन अब भारतीयों को वहां स्टडी वीजा के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। हालत यह है कि इस साल भारतीय छात्रों के ऑस्ट्रेलिया आने में 30 प्रतिशत की गिरावट आई है। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों की संख्या घटने के पीछे वजह है, यहां लागू की गई नई इमिग्रेशन पॉलिसी।
गौरतलब है कि ऑस्ट्रेलिया की नई इमिग्रेशन पॉलिसी बीते साल दिसंबर में लागू की गई थी। इस पॉलिसी में विदेशी छात्रों की संख्या और उनके विस्तार के संबंध में कई प्रतिबंध लगाए गए हैं। यही वजह है कि इस नई इमिग्रेशन पॉलिसी के कारण भारतीय छात्रों के ऑस्ट्रेलिया आने में 30 प्रतिशत की गिरावट आई है। इस गिरावट से भारतीय छात्रों को तो निराशा हुई ही है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है। कारण, शिक्षा क्षेत्र का ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था में एक बड़ा योगदान है।
नई इमिग्रेशन पॉलिसी के लागू होने से पहले बीते साल जनवरी से अप्रैल तक ऑस्ट्रेलिया ने 104,808 भारतीय स्टूडेंट्स को स्टडी वीजा दिया था। लेकिन मौजूदा साल के शुरुआती चार महीने कुछ अलग ही कहानी बयां कर रहे हैं। इस बार यह आंकड़ा महज 74,421 ही है। ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई के लिए जाने वाले छात्रों की संख्या में 30 फीसद की कमी देखी गई है। भारतीय छात्रों की संख्या में इससे पहले इतनी गिरावट कोरोना महामारी के समय देखी गई थी। 2019-20 और 2020-21 के दौरान यह गिरावट 53 फीसद के करीब थी।
स्टडी वीजा न मिलने से भारतीय छात्रों में निराशा जरूर है लेकिन इसका बुरा असर ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे सकता है। ऑस्ट्रेलिया में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई दिग्गज सरकार को अपने फैसले पर दोबारा विचार करने की सलाह दे रहे हैं।जानकारों का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था में शिक्षा क्षेत्र का बड़ा योगदान है।
पिछले साल शिक्षा क्षेत्र से ऑस्ट्रेलिया को 48 बिलियन डॉलर की आय हुई थी। जानकारों का कहना है कि कई सालों की मेहनत के बाद ऑस्ट्रेलिया ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण के क्षेत्र में अपना अलग मुकाम हासिल किया है। सरकार की गलत पॉलिसीयों के कारण इस मेहनत पर पानी फिर सकता है।
दरअसल, ऑस्ट्रेलिया द्वारा अपनी वीजा पॉलिसी को काफी सख्त करने के पीछे वे छात्र हैं जो पढ़ाई के नाम पर वहां जाकर पार्ट टाइम जॉब करते रहे हैं। इसलिए ऑस्ट्रेलिया ने सालाना इमिग्रेशन को आधा कर दिया है। ऑस्ट्रेलिया पढ़ने जाने वाले छात्रों में भारतीय छात्रों की तादाद दूसरे नंबर पर सबसे ज़्यादा है। कठिन वीज़ा शर्तों के रहते ऑस्ट्रेलियाई संस्थानो भी काफी सख्त हो गए हैं और कुछ संस्थानों ने तो भारतीय छात्रों को एडमिशन देने से भी इनकार कर दिया है।
इस साल की शुरुआत में ऑस्ट्रेलिया में अध्ययन करने के लिए आने वाले लोगों के लिए नियमों को कड़ा करने और माइग्रेशन के स्तर को कम करने के लिए कई बदलाव किए गए थे लेकिन 1 जुलाई से सरकार दो रास्ते बंद कर देगी जिसके तहत विजिटर वीजा और अस्थायी स्नातक वीजा धारक अब ऑनशोर स्टूडेंट वीजा के लिए आवेदन नहीं कर पाएंगे। पहले लोग टूरिस्ट वीजा हासिल करते थे और वहां पर जाकर इसको स्टडी वीजा में बदलवा लेते थे। एक जुलाई 2023 से मई 2024 के अंत तक 36,000 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं जिन्होंने टूरिस्ट वीजा लेकर ऑस्ट्रेलिया की धरती पर कदम रखा और बाद में वहां पर किसी छोटे मोटे कॉलेज में दाखिला लेकर स्टडी वीजा हासिल कर लिया।




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