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Higher Education in India: बिहार में उच्च शिक्षा की सबसे बड़ी चुनौती, एक यूनिवर्सिटी पर 10.3 लाख भविष्य के छात्रों का दबाव

भारत में पिछले करीब 25 वर्षों के दौरान उच्च शिक्षा का तेजी से विस्तार हुआ है। यूनिवर्सिटी और कॉलेजों की संख्या में बड़ी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन यह विस्तार देश के अलग-अलग हिस्सों में समान रूप से नहीं हुआ। अब एक नई रिपोर्ट ने इस अंतर को भारत की आने वाली युवा आबादी के संदर्भ में सामने रखा है।

The Geography of Higher Education Report 2026 के अनुसार, जिन राज्यों में आने वाले वर्षों में छात्रों की संख्या ज्यादा रहने वाली है, वहां उच्च शिक्षा संस्थानों की मौजूदा क्षमता पर्याप्त नहीं दिखाई देती। इस अंतर का सबसे बड़ा दबाव बिहार में सामने आया है। रिपोर्ट का अनुमान है कि अगर मौजूदा संस्थागत क्षमता में बदलाव नहीं होता है, तो बिहार में एक यूनिवर्सिटी को भविष्य में करीब 10.3 लाख छात्रों की जरूरत पूरी करनी पड़ सकती है। उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा करीब 6 लाख है। रिपोर्ट को Jetri और Impactica.org ने तैयार किया है।

रिपोर्ट ने देश में उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार को केवल उनकी कुल संख्या से नहीं, बल्कि उनकी भौगोलिक स्थिति और आने वाली छात्र आबादी के साथ जोड़कर देखा है। इसके निष्कर्षों में बिहार के साथ उत्तर प्रदेश और झारखंड को उन राज्यों में रखा गया है जहां भविष्य की छात्र आबादी और उच्च शिक्षा की उपलब्ध क्षमता के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है।

25 साल में तेजी से बढ़ी उच्च शिक्षा की क्षमता

रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2026 तक भारत में करीब 1,405 यूनिवर्सिटी और 53,433 कॉलेज थे। 2001 के बाद उच्च शिक्षा संस्थानों की संख्या में तेज विस्तार हुआ। रिपोर्ट के अनुसार आज की करीब 70 प्रतिशत यूनिवर्सिटीज 2001 के बाद स्थापित हुई हैं। इसी अवधि में 18 से 23 वर्ष की आबादी के प्रति एक लाख युवाओं पर कॉलेजों की संख्या 9 से बढ़कर 37 हो गई।

यह विस्तार अपने आप में बड़ा बदलाव है, लेकिन रिपोर्ट का मुख्य सवाल यह है कि क्या नए संस्थान उन जगहों पर बने हैं जहां आने वाले वर्षों में छात्रों की संख्या सबसे ज्यादा होगी। रिपोर्ट के अनुसार इसका जवाब हर राज्य के लिए एक जैसा नहीं है।

शिक्षा मंत्रालय के AISHE आंकड़े भी बताते हैं कि देश में उच्च शिक्षा का विस्तार जारी है। AISHE 2023-24 के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर उच्च शिक्षा का सकल नामांकन अनुपात यानी GER 30 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो 2014-15 के 23.7 प्रतिशत से ज्यादा है।

बिहार में सबसे बड़ा क्षमता अंतर

रिपोर्ट में बिहार को उच्च शिक्षा की भविष्य की जरूरत और मौजूदा क्षमता के बीच सबसे बड़े अंतर वाले राज्यों में रखा गया है। राज्य में 18 से 23 वर्ष की आबादी के प्रति एक लाख पर करीब 0.2 यूनिवर्सिटी और 9 कॉलेज हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, अगर मौजूदा संस्थागत क्षमता में बदलाव नहीं होता है, तो बिहार में वर्तमान में 3 से 17 वर्ष की उम्र के बच्चों की भविष्य की उच्च शिक्षा जरूरत के लिहाज से एक यूनिवर्सिटी पर करीब 10.3 लाख छात्रों का दबाव हो सकता है। उत्तर प्रदेश में यही अनुपात करीब 6 लाख है।

यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बिहार की युवा आबादी बड़ी है, जबकि उच्च शिक्षा संस्थानों का घनत्व अपेक्षाकृत कम है। राज्य में कॉलेजों की संख्या बढ़ने के बावजूद आबादी के अनुपात में उनकी उपलब्धता अभी भी कम है।

उच्च शिक्षा में नामांकन के स्तर पर भी बिहार राष्ट्रीय औसत से पीछे है। रिपोर्ट के अनुसार 2023-24 में बिहार का GER 17.66 प्रतिशत था। इसी अवधि में झारखंड का GER 19.43 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश का 25.97 प्रतिशत रहा, जबकि देश का राष्ट्रीय GER करीब 30 प्रतिशत था।

उत्तर प्रदेश और झारखंड पर भी बढ़ सकता है दबाव

उत्तर प्रदेश में बिहार की तुलना में कहीं ज्यादा कॉलेज और यूनिवर्सिटी हैं, लेकिन राज्य की बड़ी आबादी और युवा वर्ग के कारण भविष्य की जरूरत भी काफी बड़ी है। रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश में 18 से 23 वर्ष की आबादी के प्रति एक लाख पर करीब 35 कॉलेज और 0.4 यूनिवर्सिटी हैं।

झारखंड में यह उपलब्धता करीब 10 कॉलेज और 0.8 यूनिवर्सिटी प्रति लाख है। रिपोर्ट ने पश्चिम बंगाल को भी उन राज्यों में शामिल किया है जहां युवा आबादी की तुलना में उच्च शिक्षा संस्थानों की उपलब्धता अपेक्षाकृत कम है।

यहां केवल कुल कॉलेजों की संख्या देखना पर्याप्त नहीं है। उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश में संस्थानों की कुल संख्या बड़ी है, लेकिन राज्य की आबादी इतनी ज्यादा है कि प्रति युवा उपलब्धता कई छोटे राज्यों की तुलना में कम रह जाती है।

AISHE के आधिकारिक आंकड़े भी राज्यों के बीच इस अंतर को समझने में मदद करते हैं। शिक्षा मंत्रालय ने जुलाई 2026 में 2022-23 और 2023-24 की AISHE रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें संस्थानों, छात्रों, शिक्षकों और अन्य उच्च शिक्षा संकेतकों का विस्तृत आंकड़ा दिया गया है।

कर्नाटक, तेलंगाना जैसे राज्यों में कॉलेज घनत्व ज्यादा

रिपोर्ट के आंकड़ों में कुछ राज्यों की तस्वीर बिल्कुल अलग दिखाई देती है। कर्नाटक में 18 से 23 वर्ष की आबादी के प्रति एक लाख पर करीब 79 कॉलेज हैं। तेलंगाना में यह आंकड़ा 63, आंध्र प्रदेश में 58, केरल में 54, राजस्थान में 51 और महाराष्ट्र में 48 है।

इससे यह समझ आता है कि किसी राज्य में कुल कितने कॉलेज या यूनिवर्सिटी हैं, यह अकेला पैमाना नहीं हो सकता। यह देखना भी जरूरी है कि वहां की युवा आबादी के मुकाबले उच्च शिक्षा की सीटों और संस्थानों की उपलब्धता कितनी है।

यही वजह है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में कॉलेजों की कुल संख्या अधिक होने के बावजूद भविष्य की जरूरत को लेकर दबाव बना रह सकता है।

20 जिलों में देश की 28% यूनिवर्सिटीज

रिपोर्ट ने उच्च शिक्षा के भौगोलिक केंद्रीकरण पर भी ध्यान दिया है। इसके अनुसार देश की करीब 28 प्रतिशत यूनिवर्सिटीज केवल 20 जिलों में केंद्रित हैं। इसका मतलब यह है कि उच्च शिक्षा का विस्तार पूरे देश में एक समान नहीं हुआ है और कुछ खास शहरी या शिक्षा केंद्रों में संस्थानों का जमावड़ा ज्यादा है।

रिपोर्ट का एक और महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि भारत में शिक्षा से जुड़ी करीब 83 प्रतिशत आवाजाही अपने ही राज्य के भीतर होती है। इसका अर्थ है कि अधिकांश छात्र उच्च शिक्षा के लिए राज्य से बाहर जाने के बजाय अपने राज्य में ही विकल्प तलाशते हैं। ऐसे में स्थानीय स्तर पर अच्छे कॉलेज और यूनिवर्सिटी उपलब्ध होना छात्रों की पहुंच के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।

भविष्य के छात्रों के लिए अभी से बढ़ानी होगी क्षमता

रिपोर्ट के अनुसार देश की 3 से 17 वर्ष की आबादी का बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में है। इनमें मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र ने युवा आबादी के साथ उच्च शिक्षा की क्षमता भी बढ़ाई है, जबकि बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में भविष्य की जरूरत और मौजूदा क्षमता के बीच अंतर ज्यादा दिखाई देता है।

इसका सीधा असर आने वाले वर्षों में कॉलेज एडमिशन, सीटों की उपलब्धता और छात्रों की शिक्षा के लिए होने वाली आवाजाही पर पड़ सकता है। खासकर बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में सिर्फ नए संस्थान खोलना ही पर्याप्त नहीं होगा। संस्थानों की गुणवत्ता, शिक्षकों की उपलब्धता, कोर्स की विविधता, बुनियादी सुविधाएं और रोजगार से जुड़ी शिक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होंगी।

The Geography of Higher Education Report 2026 का मूल संदेश यही है कि भारत ने पिछले 25 वर्षों में उच्च शिक्षा का बड़ा विस्तार किया है, लेकिन अब अगली चुनौती केवल ज्यादा यूनिवर्सिटी और कॉलेज बनाना नहीं, बल्कि उन्हें उन जगहों पर विकसित करना है जहां आने वाली पीढ़ियों के छात्रों की जरूरत सबसे ज्यादा होगी।

बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड के आंकड़े इस चुनौती को खास तौर पर सामने लाते हैं। आने वाले वर्षों में उच्च शिक्षा की योजना बनाते समय युवा आबादी का भूगोल, स्थानीय मांग और छात्रों की वास्तविक पहुंच को ध्यान में रखना देश की शिक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण होगा।

Raish Ahmed

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