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भारत के कोचिंग हब कोटा में क्यों बढ़ रही हैं छात्र आत्महत्या की घटनाएं?

राजस्थान का कोटा शहर भारत का सबसे बड़ा कोचिंग हब है, जहां हर साल लाखों छात्र इंजीनियरिंग (IIT-JEE) और मेडिकल (NEET) की तैयारी के लिए आते हैं। यह शहर देशभर के छात्रों के लिए आशा और सपनों का केंद्र माना जाता है, लेकिन हाल के वर्षों में यहां आत्महत्या के बढ़ते मामलों ने गंभीर चिंता उत्पन्न कर दी है। अत्यधिक प्रतिस्पर्धा, मानसिक तनाव, पारिवारिक दबाव और अकेलापन छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है, जिससे आत्महत्या की घटनाएं बढ़ रही हैं।

बढ़ते आत्महत्या के आंकड़े: चिंताजनक स्थिति
2024 में 17 छात्रों ने आत्महत्या की थी, जबकि 2025 के शुरुआती डेढ़ महीने में ही यह संख्या सात तक पहुंच चुकी है।
हाल के आत्महत्या के मामले (2025)
1. 11 फरवरी: सवाई माधोपुर के 18 वर्षीय NEET अभ्यर्थी अंकुश मीना ने आत्महत्या कर ली।
2. 22 जनवरी: गुजरात की 24 वर्षीय NEET अभ्यर्थी अशफा शेख और असम के 17 वर्षीय JEE अभ्यर्थी ने आत्महत्या की। दोनों घटनाएं दो घंटे के अंतराल में हुईं।
3. 18 जनवरी: ओडिशा के 18 वर्षीय NEET अभ्यर्थी ने आत्महत्या कर ली।
4. 16 जनवरी: ओडिशा के अभिजीत गिरी ने अपने छात्रावास के कमरे में आत्महत्या कर ली।
5. 8 जनवरी: मध्य प्रदेश के 20 वर्षीय अभिषेक ने अपने पीजी रूम में पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली।
6. 7 जनवरी: हरियाणा के नीरज ने अपने हॉस्टल के कमरे में आत्महत्या कर ली।

सबसे ताजा मामला: 11 फरवरी 2025 को 18 वर्षीय अंकुश मीना ने अपने पीजी रूम में फांसी लगा ली। पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला, लेकिन शुरुआती जांच में आत्महत्या की वजह प्रेम प्रसंग मानी जा रही है।

आत्महत्याओं की संख्या पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी है, जो कोटा के शिक्षा मॉडल और छात्रों की मानसिक स्थिति पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।

आत्महत्याओं के पीछे संभावित कारण
1. अत्यधिक प्रतिस्पर्धा और मानसिक दबाव
– IIT-JEE और NEET जैसी परीक्षाओं की कठोर प्रतिस्पर्धा छात्रों पर भारी मानसिक दबाव डालती है।
– छात्र लगातार रैंकिंग की चिंता में रहते हैं, जिससे मानसिक तनाव बढ़ता है।

2. पारिवारिक और सामाजिक दबाव
– माता-पिता की उच्च अपेक्षाएं और समाज का दबाव छात्रों को मानसिक रूप से कमजोर बना सकता है।
– कई छात्र कोटा में पढ़ाई के लिए मजबूर होते हैं, जबकि वे अन्य विकल्पों पर विचार करना चाहते हैं।

3. अकेलापन और भावनात्मक समर्थन की कमी
– हजारों छात्र अपने परिवार से दूर कोटा में रहते हैं, जिससे वे अकेलापन महसूस करते हैं।
– सहपाठियों से तुलना और आत्मसम्मान में कमी से डिप्रेशन की समस्या बढ़ सकती है।

4. असफलता का डर
– परीक्षा में असफल होने का डर छात्रों को मानसिक रूप से कमजोर बना सकता है।
– कई छात्र सोचते हैं कि यदि वे परीक्षा में सफल नहीं हुए, तो उनके करियर और भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

5. पढ़ाई का अत्यधिक दबाव और आराम का अभाव
– छात्रों का दैनिक रूटीन अत्यधिक कठोर होता है, जिसमें पढ़ाई के अलावा अन्य गतिविधियों के लिए बहुत कम समय बचता है।
– पर्याप्त नींद न मिलना और मनोरंजन की कमी से मानसिक थकान बढ़ती है।

प्रशासन द्वारा उठाए गए कदम
छात्र आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए प्रशासन और कोचिंग संस्थानों ने कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:
1. स्प्रिंग-लोडेड पंखों की अनिवार्यता
2023 में कोटा के सभी छात्रावासों और पीजी में स्प्रिंग-लोडेड पंखे लगाने का नियम लागू किया गया, जिससे फांसी लगाने की घटनाओं को रोका जा सके।

2. मानसिक स्वास्थ्य सहायता और काउंसलिंग
– छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के लिए कई कोचिंग संस्थानों में काउंसलिंग सेवाएं और हेल्पलाइन शुरू की गई हैं।
– कोटा प्रशासन ने ‘हेल्पलाइन नंबर’ जारी किया, जहां छात्र अपनी समस्याओं को साझा कर सकते हैं।

3. अनिवार्य स्क्रीनिंग टेस्ट
कमजोर छात्रों की पहचान के लिए स्क्रीनिंग टेस्ट शुरू किया गया है, जिससे उन्हें विशेष मानसिक और शैक्षणिक सहायता दी जा सके।

4. रैंकिंग सिस्टम में बदलाव
कोचिंग संस्थानों में रैंकिंग सिस्टम को वर्णानुक्रम में क्रमबद्ध किया गया है ताकि छात्रों पर मानसिक दबाव कम किया जा सके।

5. मनोरंजन और खेल गतिविधियों को बढ़ावा
– प्रशासन ने कोचिंग छात्रों के लिए योग, ध्यान, और खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कार्यक्रम शुरू किए हैं।
– शिक्षकों को यह निर्देश दिया गया है कि वे छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान दें।

कोटा देश के लाखों छात्रों के लिए शिक्षा का प्रमुख केंद्र है, लेकिन आत्महत्या की घटनाएं इस शहर की एक कड़वी सच्चाई बन गई हैं। अत्यधिक प्रतिस्पर्धा, मानसिक तनाव, पारिवारिक दबाव और असफलता का डर छात्रों को नकारात्मक मानसिकता की ओर धकेल रहा है। हालांकि, प्रशासन और कोचिंग संस्थान विभिन्न उपाय कर रहे हैं, लेकिन यह समस्या केवल कानूनी या प्रशासनिक कदमों से हल नहीं होगी।

छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना, पारिवारिक और सामाजिक समर्थन बढ़ाना, और शिक्षा प्रणाली में बदलाव लाना आवश्यक है। कोटा को सिर्फ एक कोचिंग हब नहीं, बल्कि एक ऐसा स्थान बनाना होगा जहां शिक्षा के साथ-साथ छात्रों का मानसिक और भावनात्मक विकास भी हो सके।

Asmita Sarkar

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