
अकाउंटिंग के क्षेत्र में अब केवल चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) या कॉस्ट एंड मैनेजमेंट अकाउंटेंसी (CMA) जैसे पारंपरिक विकल्प ही नहीं, बल्कि बीकॉम या बीबीए के तुरंत बाद अपस्किलिंग कर भी करियर की शुरुआत की जा सकती है। टैली, जीएसटी फाइलिंग, एडवांस्ड एक्सेल जैसे शॉर्ट-टर्म कोर्स करके अकाउंट्स असिस्टेंट या जूनियर अकाउंटेंट की भूमिकाएं निभाई जा सकती हैं। साथ ही टैक्सेशन में भी मांग बढ़ रही है, जिसके लिए जीएसटी प्रैक्टिशनर या इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग जैसे कोर्स उपयोगी हो सकते हैं।
अकाउंटिंग के नए और उभरते क्षेत्र
अब अकाउंटिंग में ग्रीन अकाउंटिंग, सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे क्षेत्र तेजी से उभर रहे हैं। छोटे शहरों में भी बड़ी वित्तीय कंपनियों की मौजूदगी बढ़ने से परंपरागत अकाउंटिंग भूमिकाओं की मांग भी बढ़ी है।
विशेषज्ञों के अनुसार भारत को हर साल लगभग 55,000 से 60,000 नए अकाउंटिंग पेशेवरों की जरूरत होती है, लेकिन फिलहाल देश में केवल 4 लाख सीए उपलब्ध हैं, जबकि आवश्यकता 10 लाख से अधिक की है। अर्नस्ट एंड यंग की रिपोर्ट के मुताबिक कई बहुराष्ट्रीय अकाउंटिंग फर्म्स अब भारत के छोटे शहरों में भी अवसर उत्पन्न कर रही हैं।
एआई और मशीन लर्निंग के साथ अकाउंटिंग में अपस्किलिंग
डेलॉइट के अनुसार 54% अकाउंटिंग फर्म्स ने एआई को अपने काम में शामिल कर लिया है। ऐसे में जरूरी हो गया है कि छात्र फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी और एआई आधारित सॉफ्टवेयर का ज्ञान हासिल करें। इसके लिए कोर्सेरा, Udemy जैसे प्लेटफॉर्म से कोर्स किए जा सकते हैं। प्रमुख सॉफ्टवेयर जिनकी ट्रेनिंग ली जा सकती है:
– Xero, Vic.ai, NetSuite, FreshBooks
– Cube, Anaplan, Vena, IBM जैसे AI टूल्स
– GST और टैक्स फाइलिंग से संबंधित कोर्स: ClearTax, Taxmann Academy, LearnCab, ICA Edu Skills, NIIT आदि द्वारा
औसत प्रारंभिक आय: ₹15,000 प्रतिमाह से शुरुआत संभव है।
अकाउंटिंग के कुछ लोकप्रिय करियर विकल्प
1. चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA):
भारत सरकार का लक्ष्य है कि 2047 तक 30 लाख सीए तैयार किए जाएं। यह कोर्स ICAI द्वारा कराया जाता है।
2. कॉस्ट एंड मैनेजमेंट अकाउंटेंट (CMA):
ICMAI द्वारा संचालित यह कोर्स लागत प्रबंधन, व्यापार विश्लेषण आदि में विशेष होता है।
3. टैक्स कंसल्टेंट:
बीकॉम के बाद CMA या टैक्सेशन में डिप्लोमा करके इस क्षेत्र में प्रवेश कर सकते हैं।
4. फोरेंसिक अकाउंटेंट:
सीए या बीकॉम के साथ फोरेंसिक अकाउंटिंग सर्टिफिकेट, सर्टिफाइड फ्रॉड एग्जामिनर जैसे कोर्स करके यह विशेष भूमिका निभाई जा सकती है।
5. फाइनेंशियल एनालिस्ट:
सीएफए सर्टिफिकेशन, एमबीए फाइनेंस या संबंधित योग्यता के साथ इस क्षेत्र में करियर बन सकता है।
वेतन सीमा: ₹3-4 लाख प्रतिवर्ष से शुरुआत होकर अनुभव के अनुसार कई लाख प्रतिमाह तक।
एक्सपर्ट की राय
मुकुल शर्मा (सीए) कहते हैं, “अब अकाउंटिंग केवल बहीखाते तक सीमित नहीं, बल्कि डिजिटल फाइनेंस, ऑटोमेशन और डेटा एनालिटिक्स से जुड़ गया है। ERP सिस्टम, BI टूल्स और FinTech सॉफ्टवेयर की समझ भी जरूरी है।”
ग्रीन अकाउंटिंग और सस्टेनेबिलिटी
ग्रीन अकाउंटिंग कंपनी की पर्यावरणीय लागत और सुधार से जुड़े खर्चों का लेखा-जोखा है। इस क्षेत्र में करियर के लिए अकाउंटिंग, फाइनेंस या एनवायर्नमेंटल साइंस में डिग्री और GRI Training, Harvard Online, EdX जैसे प्लेटफॉर्म से सस्टेनेबिलिटी कोर्स किए जा सकते हैं।




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