
यदि आप एग्रीकल्चर के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं, तो मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय (JNKVV) एक बेहतरीन विकल्प है। यह न केवल एशिया की प्रमुख कृषि यूनिवर्सिटियों में गिनी जाती है, बल्कि मध्य प्रदेश की पहली कृषि यूनिवर्सिटी भी है। यहां अच्छे अंकों के साथ-साथ कम अंकों वाले छात्रों को भी एडमिशन का मौका मिलता है—बस जरूरत होती है थोड़ा इंतजार करने की।
PAT परीक्षा के जरिए मिलता है एडमिशन
इस यूनिवर्सिटी में प्रवेश के लिए छात्रों को Pre Agriculture Test (PAT) पास करना होता है। अच्छे अंक लाने वाले छात्रों को प्राथमिकता मिलती है, लेकिन कम अंक वालों के लिए भी दरवाजे बंद नहीं होते। दरअसल, पिछले दो वर्षों से यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए छात्रों की संख्या घटी है, जिससे कई सीटें खाली रह जाती हैं। यही कारण है कि अब अपेक्षाकृत कम नंबर वाले छात्रों को भी दाखिले का बेहतर अवसर मिल रहा है।
नई शिक्षा नीति और प्राइवेट कॉलेजों का असर
यूनिवर्सिटी के डीन डॉ. धीरेंद्र खरे के अनुसार, नई शिक्षा नीति और प्राइवेट कॉलेजों की बढ़ती संख्या के कारण कई कॉलेज अब सीधे 12वीं के अंकों के आधार पर बीएससी एग्रीकल्चर में प्रवेश दे रहे हैं। वहीं JNKVV में PAT परीक्षा अनिवार्य है, जिसकी प्रक्रिया अगस्त-सितंबर में पूरी होती है। इस कारण कुछ छात्र जल्दी एडमिशन लेने के लिए अन्य कॉलेजों का रुख कर लेते हैं।
प्रैक्टिकल के लिए विशाल खेत
इस यूनिवर्सिटी की सबसे बड़ी खासियत है—व्यावहारिक शिक्षा पर ज़ोर। यहां कई एकड़ में फैले खेतों में छात्र स्वयं खेती करते हैं और बारीकियों को सीखते हैं। यही अनुभव उन्हें अन्य कॉलेजों के छात्रों से अलग बनाता है। इसलिए यहां की डिग्री सिर्फ एक कागज़ी प्रमाणपत्र नहीं, बल्कि एक ठोस ज्ञान का प्रतीक होती है।
किफायती फीस और स्टाइपेंड की सुविधा
चार साल के बीएससी एग्रीकल्चर कोर्स की कुल फीस लगभग 2 से 2.25 लाख रुपये होती है, जो अन्य प्राइवेट कॉलेजों की तुलना में काफी कम है, जहां यह कोर्स 5 लाख रुपये तक पहुंच जाता है। इसके साथ ही, यहां पढ़ने वाले छात्रों को ICAR से हर महीने 3000 रुपये का स्टाइपेंड भी मिलता है, जो अन्य कॉलेजों में नहीं मिलता।
8 कॉलेज, 1200 सीटें
वर्तमान में इस यूनिवर्सिटी के अंतर्गत जबलपुर के अलावा रीवा, टीकमगढ़, गंजबसौदा, बालाघाट, नर्मदापुरम, खुरई और पन्ना जिलों में कुल 8 कॉलेज संचालित हो रहे हैं। इनमें एग्रीकल्चर के लिए करीब 1200 सीटें उपलब्ध हैं।
एडमिशन ट्रेंड से समझें बदलाव
2014-15: 40,000+ छात्र PAT में शामिल
2019-20: 15,177 छात्र
2023: 14,243 छात्र
2024: 13,849 छात्र
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि नई शिक्षा नीति और कॉलेज विकल्पों की वजह से यूनिवर्सिटी में एडमिशन की मांग घट रही है, जो कि नए छात्रों के लिए अवसर का द्वार खोलती है।
यदि आप कृषि में भविष्य बनाना चाहते हैं और ठोस ज्ञान के साथ एक किफायती और गुणवत्ता युक्त शिक्षा की तलाश में हैं, तो जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर आपके लिए एक आदर्श स्थान हो सकता है—even with average marks.




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