
अगर आप शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे हैं, तो आपके पास दो मुख्य विकल्प हैं – सरकारी संस्थानों में शिक्षक बनना या प्राइवेट संस्थानों में। दोनों ही क्षेत्रों के लिए अलग-अलग नियम और परीक्षाएं तय हैं। आइए इन्हें विस्तार से समझते हैं।
सरकारी स्कूलों में शिक्षक भर्ती
भारत में केंद्र और राज्य सरकारें शिक्षक भर्ती के लिए विभिन्न परीक्षाओं का आयोजन करती हैं।
CTET (सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट):
केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय और आर्मी पब्लिक स्कूल में कक्षा 1 से 8 तक के शिक्षक पदों पर भर्ती के लिए यह परीक्षा होती है। साल में दो बार CBSE द्वारा आयोजित की जाती है।
पेपर 1: कक्षा 1–5 के लिए
पेपर 2: कक्षा 6–8 के लिए
KVS (केंद्रीय विद्यालय संगठन) भर्ती:
इसके माध्यम से PRT, TGT और PGT पदों पर नियुक्तियां होती हैं।
NVS (नवोदय विद्यालय समिति) भर्ती:
TGT, PGT और अन्य शिक्षकों की भर्ती के लिए यह परीक्षा आयोजित होती है।
राज्य TET (टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट):
हर राज्य का अपना TET होता है। जैसे—UPTET, BTET, MPTET, HTET।
पेपर 1: प्राथमिक शिक्षक (कक्षा 1–5)
पेपर 2: उच्च प्राथमिक शिक्षक (कक्षा 6–8)
राज्य लोक सेवा आयोग (PSC) परीक्षाएं:
PGT और अन्य उच्च स्तर के पदों के लिए राज्य PSC परीक्षाएं आयोजित करते हैं, जैसे UPPSC, BPSC, HPSC।
कॉलेज/यूनिवर्सिटी शिक्षक भर्ती
UGC NET: विश्वविद्यालय और कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए अनिवार्य परीक्षा।
State SET: राज्य स्तर पर विश्वविद्यालय/कॉलेज शिक्षक भर्ती के लिए आयोजित होती है।
PhD धारक उम्मीदवारों को अतिरिक्त प्राथमिकता दी जाती है।
सरकारी भर्ती का सारांश
प्राथमिक/माध्यमिक शिक्षक: CTET + राज्य TET, KVS/NVS भर्ती
PGT (कक्षा 12 तक): राज्य PSC या KVS/NVS भर्ती
कॉलेज/यूनिवर्सिटी शिक्षक: UGC NET / State SET
प्राइवेट संस्थानों में शिक्षक भर्ती
प्राइवेट स्कूल और कॉलेज अपनी भर्ती प्रक्रिया स्वयं तय करते हैं।
प्राइवेट स्कूल:
PRT: D.El.Ed + CTET/STET (अक्सर आवश्यक)
TGT/PGT: पोस्टग्रेजुएशन + B.Ed.
– चयन प्रक्रिया में इंटरव्यू, डेमो क्लास और कभी-कभी लिखित परीक्षा शामिल होती है।
– CTET/STET सर्टिफिकेट अतिरिक्त लाभ देता है।
प्राइवेट कॉलेज/यूनिवर्सिटी:
न्यूनतम योग्यता: पोस्टग्रेजुएशन + UGC NET
PhD धारकों को प्राथमिकता मिलती है।
कुल मिलाकर, सरकारी संस्थानों में भर्ती कड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं के जरिए होती है, जबकि प्राइवेट संस्थानों में चयन प्रक्रिया अधिक लचीली होती है और मुख्य रूप से संस्थान की नीतियों पर निर्भर करती है।




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