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AI और ग्रीन टेक्नोलॉजी के युग में कैसे बदल रही है इंजीनियरिंग शिक्षा? 

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ग्रीन टेक्नोलॉजी और तेज़ डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन ने इंजीनियरिंग की दुनिया को पूरी तरह बदल दिया है। अब केवल तकनीकी ज्ञान या प्रोग्रामिंग स्किल्स ही काफी नहीं हैं। आने वाले इंजीनियरों को सिस्टम थिंकर, एथिकल डिजाइनर और इंटरडिसिप्लिनरी कोलेबोरेटर के रूप में खुद को तैयार करना होगा।
AI के कारण एंट्री-लेवल इंजीनियरिंग जॉब्स कम हो रही हैं। ऐसे में सवाल यह है कि अगले पाँच वर्षों में किस तरह के इंजीनियरों की मांग होगी और आज के B.Tech छात्र किन स्किल्स के साथ ग्रेजुएट होंगे।

AI, ऑटोमेशन और नया इंजीनियरिंग कोर
शूलिनी यूनिवर्सिटी की ट्रस्टी और निदेशक निष्ठा शुक्ला आनंद बताती हैं कि अब हर सेक्टर में AI का उपयोग हो रहा है—चाहे ऑटोमोटिव हो या हेल्थकेयर। आने वाले समय में कंपनियों को ऐसे इंजीनियर चाहिए होंगे जो AI को इंजीनियरिंग सॉल्यूशंस में सही तरह से लागू कर सकें।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, AI स्किल्स वाले कर्मचारियों को बिना AI स्किल्स वाले साथियों की तुलना में करीब 23% ज्यादा सैलरी मिलती है।

सस्टेनेबिलिटी और सिस्टम थिंकिंग
जलवायु परिवर्तन, संसाधनों की कमी और नेट-जीरो के लक्ष्यों ने सस्टेनेबिलिटी को इंजीनियरिंग की मुख्य प्राथमिकता बना दिया है।
निष्ठा शुक्ला आनंद के अनुसार, “जो इंजीनियर रिन्यूएबल एनर्जी सिस्टम में विशेषज्ञता हासिल करेंगे और सर्कुलर इकॉनमी को समझेंगे, वही भविष्य की वैश्विक चुनौतियों का हल निकाल पाएंगे।”

भविष्य के इंजीनियरों को:
– तकनीक के साथ पर्यावरण विज्ञान, जीवविज्ञान और सामाजिक विज्ञान को जोड़ना होगा।
– कोडिंग से आगे बढ़कर सॉल्यूशन आर्किटेक्ट की भूमिका निभानी होगी।
– डिग्री से ज्यादा अहम होंगे उनके GitHub प्रोजेक्ट्स, प्रोटोटाइप और वास्तविक केस स्टडीज़।

B.Tech: कोर्स नहीं, स्किल्स की यात्रा
आने वाले वर्षों में B.Tech सिर्फ एक डिग्री नहीं, बल्कि स्किल्स हासिल करने की यात्रा होगी।

पहला वर्ष: सिस्टम्स थिंकिंग, नैतिकता
दूसरा वर्ष: कम्युनिकेशन, डॉक्यूमेंटेशन, टीमवर्क
तीसरा वर्ष: एजाइल मैनेजमेंट, CI/CD, समस्या समाधान
चौथा वर्ष: नेतृत्व, मेंटरशिप, क्रॉस-सेक्टर विशेषज्ञता

ग्रेजुएशन तक छात्र न केवल उद्योग और रिसर्च के लिए, बल्कि स्टार्टअप्स, इनोवेशन और सार्वजनिक सेवा के लिए भी तैयार होंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात—वे अपने सीखने की यात्रा को प्रोजेक्ट्स, सहकर्मियों की फीडबैक और नेतृत्व अनुभव के जरिए साबित कर पाएंगे।

इंजीनियरिंग संस्थानों में बदलाव की जरूरत
भविष्य की चुनौतियों के लिए छात्रों को तैयार करने के लिए इंजीनियरिंग कॉलेजों को भी अपनी पढ़ाई का ढर्रा बदलना होगा:
– पारंपरिक मार्कशीट की बजाय डिजिटल स्किल ग्राफ अपनाना, जिसमें प्रोजेक्ट्स और उपलब्धियां शामिल हों।
– हर प्रोग्राम में पीयर-मेंटरशिप को अनिवार्य करना।
– पुराने स्थिर विषयों के स्थान पर एडवांस्ड और इवॉल्विंग स्किल्स को करिकुलम का हिस्सा बनाना।
– हर स्तर पर रिसर्च, इनोवेशन और एक्सपेरिमेंट की संस्कृति को बढ़ावा देना।

निष्कर्ष यह है कि आने वाला इंजीनियर सिर्फ कोडर या तकनीशियन नहीं, बल्कि इन्वेंटर, लीडर और प्रॉब्लम-सॉल्वर होगा।

 

 

Asmita Sarkar

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