
कृषि, जिसे भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहा जाता है, आज भी देश की शिक्षा प्रणाली में अपेक्षाकृत कम प्रतिनिधित्व रखती है। जबकि कृषि, पशुपालन, कृषि अर्थशास्त्र, फार्म मैनेजमेंट और जेनेटिक प्लांट ब्रीडिंग जैसे विषय युवाओं के लिए उज्जवल भविष्य की दिशा में एक सशक्त कदम बन सकते हैं।
शिक्षा में कृषि की भूमिका
टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS), मुंबई की प्रोफेसर मधुश्री सेखर का मानना है कि अगर कृषि शिक्षा कार्यक्रमों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, तो अधिक छात्र इस क्षेत्र की ओर आकर्षित होंगे।
उन्होंने कहा, “जैसे ही कृषि क्षेत्र में हमारे कौशल आधारित शिक्षा कार्यक्रमों की जानकारी व्यापक रूप से फैलेगी, मुझे यकीन है कि कृषि विषयों में छात्रों की संख्या निश्चित रूप से बढ़ेगी।”
भारतीय शिक्षा प्रणाली पर प्रभाव
तेजी से बढ़ती तकनीकी प्रगति के इस दौर में कृषि शिक्षा एक नया आयाम लेकर आती है। एक शिक्षक के अनुसार, “इस कोर्स में छात्रों को यह सिखाया जाता है कि फसलों की बुवाई, देखभाल और कटाई के बाद की प्रक्रियाएँ कैसे की जाती हैं। मिट्टी से लेकर उत्पाद के प्रसंस्करण तक की जानकारी कोर्स में शामिल है।”
हालाँकि, हेमंत जाधव का कहना है, “अधिकांश छात्र इस क्षेत्र में केवल प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के उद्देश्य से आते हैं। बहुत कम छात्र वास्तव में कृषि क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि इस क्षेत्र में आर्थिक स्थिरता नहीं है।”
एसएनडीटी विमेन्स यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर मीरा के. देसाई का मानना है कि कृषि शिक्षा मानसिकता में बदलाव लाने का एक महत्वपूर्ण साधन है, जो शिक्षा का मूल उद्देश्य होना चाहिए।
छात्रों की मांग: समान अवसर और पहचान
कृषि इंजीनियरिंग के कुछ छात्रों ने समान अवसरों और पहचान की कमी की शिकायत की है। बी.टेक एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग के छात्र तुषार जोशी ने कहा कि कृषि इंजीनियरों के लिए अलग कैडर, समान अंक वितरण और विदेशी प्रशिक्षण फेलोशिप की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि B.Sc. कृषि छात्रों की तरह B.Tech कृषि इंजीनियरिंग के लिए भी समान अंक विभाजन हो। सिंचाई विभाग में कृषि इंजीनियरों के लिए अलग पद सृजित किए जाएँ, क्योंकि केवल कृषि छात्र ही यह समझते हैं कि फसलों को कितनी और किस मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। यह किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा। महाराष्ट्र में भी एमपी जैसे राज्यों की तरह कृषि इंजीनियरों का अलग कैडर होना चाहिए।”
कृषि शिक्षा की बढ़ती लोकप्रियता और अवसर
बदलते दृष्टिकोण और बढ़ती जागरूकता के कारण भारत में कृषि शिक्षा का दायरा निरंतर बढ़ रहा है। 2018 की एक रिपोर्ट के अनुसार, कृषि के सात तकनीकी स्नातक कोर्सों में दाखिले की संख्या 2017 में 51,822 से बढ़कर 2018 में 64,619 हो गई — यानी लगभग 25% की वृद्धि।
इसके अलावा, हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने वर्ष 2022-23 के लिए $23.56 बिलियन के कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात लक्ष्य को पार कर लिया है, और हालिया अनुमान लगभग $26 बिलियन के निर्यात का संकेत देते हैं।
कृषि शिक्षा अब सिर्फ खेती सिखाने तक सीमित नहीं है — यह तकनीक, नवाचार, और वैश्विक व्यापार के नए अवसरों के द्वार खोल रही है, जिससे भारत का कृषि क्षेत्र एक बार फिर नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर है।




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