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Are expensive degrees still necessary?

डिग्री बनाम स्किल: आज के भारत में असली जॉब सिक्योरिटी क्या है?

Are expensive degrees still necessary?

भारत में नौकरी तलाशना आज पहले से कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है। लाखों युवा डिग्री लेकर निकल रहे हैं, लेकिन नौकरी के मौके उस गति से नहीं बढ़ रहे। ऐसे समय में बड़ा सवाल यह है—क्या वाकई महंगी डिग्री लेना जरूरी है, जब बिना डिग्री वाले भी मार्केटिंग, कोडिंग, डिजाइनिंग और बिजनेस जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं?

7% से ज्यादा ग्रेजुएट बेरोजगारी—डिग्री का कम होता महत्व

भारत में युवा स्नातकों की बेरोजगारी दर लगातार 7% से ऊपर बनी हुई है। इसका मतलब यह है कि हर 100 डिग्रीधारी युवाओं में कम से कम 7 को नौकरी नहीं मिल रही।

उधर दूसरी तरफ, कंपनियां अब सिर्फ डिग्री देखकर हायरिंग नहीं कर रहीं। उन्हें चाहिए स्किल, चाहे उम्मीदवार ने वह कौशल कॉलेज से सीखा हो या ऑनलाइन कोर्स से।

आज LinkedIn, Indeed और Naukri जैसे प्लेटफॉर्म पर स्पष्ट ट्रेंड दिखता है। डिजिटल मार्केटिंग, ग्राफिक डिजाइन, डेटा एनालिटिक्स, वेब डेवलपमेंट, AI और ऑटोमेशन जैसे क्षेत्रों में ऐसे युवाओं की मांग ज्यादा है जो काम कर सके, न कि सिर्फ डिग्री दिखा सके।

नौकरी पाना इतना मुश्किल क्यों हो गया है?

  1. कॉलेज का पुराना कोर्स और इंडस्ट्री का नया सिस्टम

कई कॉलेज आज भी वही कोर्स पढ़ा रहे हैं जो 10–15 साल पहले प्रासंगिक था। जबकि इंडस्ट्री अब डेटा, डिजिटल और ऑटोमेशन की ओर बढ़ चुकी है। परिणाम—डिग्री नहीं, स्किल की कमी असली समस्या बनती जा रही है। 

  1. कंपनियां Lean Teams चाहती हैं

कंपनियां अब कम लोगों में ज्यादा काम पूरा करना चाहती हैं। इसलिए वे उन युवाओं को प्राथमिकता देती हैं जो मल्टी-स्किल्ड हों, सीखने में तेज़ हों, तकनीक अपनाने में सहज हों यानी, “डिग्रीधारी” नहीं, “सॉल्यूशन-ओरिएंटेड” उम्मीदवार की मांग ज्यादा है।

  1. फेक डिग्री और लो-क्वालिटी शिक्षा का डर

निजी कॉलेजों और ऑनलाइन डिग्री सिस्टम में बढ़ती अनियमितताओं ने कंपनियों को सतर्क कर दिया है। ऐसे माहौल में रिक्रूटर अब डिग्री कम और कैंडिडेट की पोर्टफोलियो, इंटर्नशिप और प्रोजेक्ट्स पर ज्यादा भरोसा करते हैं।

कंपनियां कैसे बदल रही हैं?

  1. स्किल टेस्ट अब डिग्री से ज्यादा जरूरी

Google, Tata, Infosys, Zoho, Swiggy जैसी कई कंपनियां बिना डिग्री के भी उम्मीदवारों को मौका दे रही हैं—अगर स्किल मजबूत है। 

  1. सर्टिफिकेशन आधारित हायरिंग बढ़ी

एक अच्छा ऑनलाइन कोर्स, प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन या प्रैक्टिकल पोर्टफोलियो आज डिग्री से ज्यादा प्रभावशाली बन चुका है।

  1. रिमोट और फ्रीलांस नौकरी का बूम

मार्केटिंग, कंटेंट राइटिंग, एडिटिंग, प्रोग्रामिंग, UI/UX—इन क्षेत्रों में हजारों युवा फ्रीलांसर बनकर महीने के 50,000–1 लाख रुपये तक कमा रहे हैं।

क्या कॉलेज डिग्री अब ‘यूज़लेस’ हो गई है?

इस सवाल का जवाब एकदम सीधा नहीं है। कई क्षेत्र में आज भी डिग्री जरूरी है। डॉक्टर, वकील, इंजीनियर, सरकारी नौकरी, अकादमिक/शोध जैसे क्षेत्रों में डिग्री अनिवार्य है।

जहां डिग्री का महत्व कम हो रहा है, उनमें IT और प्रोग्रामिंग, डिजिटल मार्केटिंग, मीडिया और कंटेंट, बिजनेस-सेल्स और स्टार्टअप, डिजाइनिंग-एडिटिंग और प्रोडक्शन जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इन क्षेत्रों में स्किल > डिग्री हो चुका है।

युवाओं के लिए बेहतर रास्ता क्या है?

  1. Degree + Skill = सबसे मजबूत संयोजन

डिग्री पूरी करें, लेकिन केवल डिग्री पर न टिकें। एक प्रैक्टिकल स्किल जोड़ें।

  1. पोर्टफोलियो बनाएं

चाहे मार्केटिंग हो या प्रोग्रामिंग, 4–5 अच्छे प्रोजेक्ट रिक्रूटर को तुरंत प्रभावित कर देते हैं।

  1. इंटर्नशिप जितनी हो सके करें

इंटर्नशिप अब वैकल्पिक नहीं, बल्कि जॉब मार्केट की अनिवार्यता बन चुकी है।

  1. सर्टिफिकेशन करें—लेकिन सही जगह से

Google, Meta, Microsoft, IBM, Coursera, Udemy जैसे प्लेटफॉर्म आपको सस्ती और प्रभावी ट्रेनिंग देते हैं।

  1. एक साइड-इनकम तैयार रखें

फ्रीलांसिंग, कंटेंट क्रिएशन या पार्ट-टाइम काम आपकी कमाई स्थिर रख सकता है।

डिग्री का युग खत्म नहीं हुआ—लेकिन स्किल का युग शुरू हो चुका है। भारतीय नौकरी बाजार में जो बदलाव हो रहे हैं, उन्हें समझना जरूरी है। डिग्री आज भी महत्वपूर्ण है, लेकिन डिग्री अकेली आपकी नौकरी नहीं तय करती। आज करियर में वही आगे बढ़ते हैं— जो सीखते रहते हैं, बदलावों को अपनाते हैं और मार्केट की जरूरतों को समझते हैं। 

भारत का युवा तभी सफल होगा, जब वह डिग्री के साथ-साथ खुद की स्किल, पर्सनैलिटी और प्रैक्टिकल अनुभव को मजबूत बनाए। यही आज के दौर का असली “जॉब सिक्योरिटी मॉडल” है।

 

एडइनबॉक्स टीम

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