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12वीं पास छात्र को ब्लॉग लिखने से मिली IIT कानपुर में नौकरी, जानिए क्या होता है Threat Intelligence Engineer

12वीं पास छात्र को ब्लॉग लिखने से मिली IIT कानपुर में नौकरी, जानिए क्या होता है Threat Intelligence Engineer

12वीं पास छात्र को ब्लॉग लिखने से मिली IIT कानपुर में नौकरी, जानिए क्या होता है Threat Intelligence Engineer

साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में प्रतिभा और कौशल का महत्व कितना बढ़ चुका है, इसका एक दिलचस्प उदाहरण हाल ही में सामने आया है। 19 वर्षीय निसर्ग अधिकारी, जिन्होंने हाल ही में 12वीं की पढ़ाई पूरी की है, को उनके तकनीकी कौशल और शोध आधारित ब्लॉग की वजह से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर के टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब C3iHub में नौकरी का अवसर मिला है।

निसर्ग अधिकारी उस समय चर्चा में आए थे जब उन्होंने सीबीएसई के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) पोर्टल में मौजूद कुछ सुरक्षा खामियों की पहचान की थी। साइबर सुरक्षा से जुड़े उनके विश्लेषण और तकनीकी समझ ने विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित किया। इसी दौरान उनके द्वारा लिखे गए एक विस्तृत ब्लॉग पोस्ट ने IIT कानपुर के अधिकारियों को प्रभावित किया और उन्हें ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) एवं थ्रेट इंटेलिजेंस इंजीनियर के पद पर अवसर प्रदान किया गया।

क्या होता है Threat Intelligence Engineer?

डिजिटल दुनिया में बढ़ते साइबर हमलों के बीच थ्रेट इंटेलिजेंस इंजीनियर की भूमिका तेजी से महत्वपूर्ण होती जा रही है। ये ऐसे साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ होते हैं जो संभावित साइबर खतरों, हैकिंग गतिविधियों और डिजिटल अपराधों से जुड़ी जानकारी एकत्र करते हैं, उसका विश्लेषण करते हैं और संस्थानों को सुरक्षा संबंधी रणनीति तैयार करने में मदद करते हैं।

इनका मुख्य उद्देश्य साइबर हमलों को होने से पहले समझना और उनसे बचाव के लिए जरूरी कदम सुझाना होता है। बड़े कॉर्पोरेट संगठनों, बैंकों, सरकारी एजेंसियों और रक्षा क्षेत्र में ऐसे विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है।

क्या-क्या जिम्मेदारियां निभाते हैं?

थ्रेट इंटेलिजेंस इंजीनियर साइबर अपराधियों की गतिविधियों पर नजर रखते हैं और नए खतरों की पहचान करते हैं। वे मालवेयर, रैनसमवेयर और फिशिंग जैसे हमलों का अध्ययन करते हैं। इसके अलावा ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT), साइबर फोरम, सार्वजनिक डेटा स्रोतों और अन्य डिजिटल माध्यमों से जानकारी जुटाकर संभावित खतरों का आकलन करते हैं।

इन विशेषज्ञों की ओर से तैयार की गई रिपोर्ट के आधार पर कंपनियां और संस्थान अपनी साइबर सुरक्षा रणनीति को मजबूत बनाते हैं। कई मामलों में ये विशेषज्ञ सुरक्षा टीमों को संभावित हमलों की पहले से चेतावनी भी देते हैं।

इस क्षेत्र में करियर कैसे बनाएं?

साइबर सुरक्षा और थ्रेट इंटेलिजेंस में करियर बनाने के लिए आमतौर पर कंप्यूटर साइंस, सूचना प्रौद्योगिकी या साइबर सुरक्षा से जुड़े विषयों में स्नातक डिग्री को प्राथमिकता दी जाती है। बीटेक, बीई, बीसीए, बीएससी कंप्यूटर साइंस, एमसीए और एमटेक जैसे कोर्स इस क्षेत्र में प्रवेश का मजबूत आधार बन सकते हैं।

हालांकि आज के समय में केवल डिग्री ही पर्याप्त नहीं मानी जाती। उम्मीदवारों के पास नेटवर्क सिक्योरिटी, एथिकल हैकिंग, लिनक्स, पाइथन प्रोग्रामिंग, क्लाउड सिक्योरिटी, मालवेयर एनालिसिस और थ्रेट हंटिंग जैसी व्यावहारिक स्किल्स होना भी जरूरी है।

शुरुआती स्तर पर कई ऑनलाइन और प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी उपलब्ध हैं, जो साइबर सुरक्षा की बुनियादी समझ विकसित करने में मदद करते हैं। अनुभव बढ़ने के साथ विशेषज्ञ उन्नत स्तर के साइबर सुरक्षा प्रमाणपत्रों के जरिए अपने करियर को आगे बढ़ा सकते हैं।

कितनी मिलती है सैलरी?

भारत में थ्रेट इंटेलिजेंस इंजीनियर के रूप में करियर शुरू करने वाले उम्मीदवारों को आमतौर पर 5 से 10 लाख रुपये सालाना तक का पैकेज मिल सकता है। अनुभव, तकनीकी विशेषज्ञता और संगठन के आधार पर यह पैकेज काफी अधिक भी हो सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार साइबर सुरक्षा क्षेत्र में कुशल पेशेवरों की कमी और बढ़ती मांग के कारण आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर और वेतन दोनों बढ़ने की संभावना है।

किन क्षेत्रों में हैं सबसे ज्यादा अवसर?

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की मांग केवल आईटी कंपनियों तक सीमित नहीं है। बैंकिंग, फिनटेक, ई-कॉमर्स, रक्षा, दूरसंचार, हेल्थकेयर और सरकारी एजेंसियां भी ऐसे पेशेवरों की भर्ती कर रही हैं।

दुनिया की कई बड़ी तकनीकी कंपनियां और साइबर सुरक्षा फर्म थ्रेट इंटेलिजेंस, डिजिटल फॉरेंसिक और सुरक्षा विश्लेषण से जुड़े विशेषज्ञों को प्राथमिकता देती हैं। यही कारण है कि आज साइबर सुरक्षा को भविष्य के सबसे तेजी से बढ़ते करियर विकल्पों में गिना जा रहा है।

निसर्ग अधिकारी की कहानी यह दिखाती है कि तकनीकी ज्ञान, रिसर्च क्षमता और वास्तविक समस्याओं को समझने की योग्यता कई बार पारंपरिक रास्तों से अलग अवसर भी दिला सकती है। साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्र में कौशल और व्यावहारिक अनुभव आज युवाओं के लिए नई संभावनाओं के दरवाजे खोल रहे हैं।

Asmita Sarkar

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