
विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) के अनुसार, साइबर सुरक्षा दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रही स्किल कैटेगरी में AI और बिग डेटा के बाद दूसरे स्थान पर है। खास बात यह है कि इसकी जरूरत सिर्फ टेक्नोलॉजी सेक्टर तक सीमित नहीं है। मार्केटिंग, फाइनेंस, ऑपरेशंस और दूसरे क्षेत्रों में काम करने वाले प्रोफेशनल्स के लिए भी साइबर सुरक्षा की बुनियादी समझ जरूरी होती जा रही है, भले ही उन्होंने कभी कोडिंग न की हो।
एक समय था जब MBA को लगभग हर क्षेत्र के लिए एक उपयोगी डिग्री माना जाता था। इसका मतलब सिर्फ यह नहीं था कि व्यक्ति बिजनेस की पढ़ाई कर चुका है, बल्कि यह भी था कि वह किसी संगठन के काम करने के तरीके को समझता है। वह जानता है कि फैसले कैसे लिए जाते हैं, जोखिम को कैसे देखा जाता है और एक विभाग का फैसला दूसरे विभाग को किस तरह प्रभावित कर सकता है।
अब साइबर सुरक्षा की बुनियादी समझ भी कुछ इसी तरह की भूमिका निभाती दिखाई दे रही है। आज लगभग हर बिजनेस फैसला किसी न किसी डिजिटल सिस्टम से जुड़ा है और हर डिजिटल सिस्टम में कुछ न कुछ साइबर जोखिम मौजूद है। ऐसे में किसी कर्मचारी के लिए साइबर सुरक्षा उसके पद का हिस्सा न होने के बावजूद उसके काम से जुड़ी हो सकती है।
Technical Fluency: सिर्फ IT टीम के लिए नहीं है साइबर सुरक्षा
कंपनियां फायरवॉल या खतरे पहचानने वाले सिस्टम सिर्फ इसलिए नहीं लगातीं कि उनके पास बेहतर टेक्नोलॉजी हो। असल उद्देश्य कारोबार के जोखिम को कम करना होता है। इस जोखिम को समझना, उसकी जानकारी देना और उससे जुड़े फैसले लेना अब बिजनेस के दूसरे हिस्सों जितना ही जरूरी होता जा रहा है।
साइबर सुरक्षा से जुड़े कर्मचारियों की वैश्विक कमी भी इस जरूरत को दिखाती है। साइबर सुरक्षा से जुड़े वैश्विक वर्कफोर्स गैप का आंकड़ा 48 लाख खाली पदों तक पहुंच चुका है। आमतौर पर इसे सुरक्षा टीमों के लिए कर्मचारियों की कमी के तौर पर देखा जाता है। लेकिन इसका दूसरा पहलू यह भी है कि बाकी कर्मचारियों के बीच साइबर सुरक्षा की बुनियादी समझ कितनी जरूरी है।
उदाहरण के लिए, मार्केटिंग टीम जब ग्राहकों के डेटा से जुड़ा कोई कैंपेन चलाती है, फाइनेंस टीम किसी वेंडर के पेमेंट सिस्टम को मंजूरी देती है या ऑपरेशंस मैनेजर किसी नए क्लाउड प्लेटफॉर्म को कंपनी में शामिल करता है, तो इन सभी फैसलों में साइबर सुरक्षा का पहलू मौजूद होता है।
समस्या यह है कि कई बार ऐसे फैसले लेने वाले कर्मचारियों के पास जोखिम को पहचानने के लिए जरूरी साइबर सुरक्षा की भाषा और जानकारी नहीं होती।
जो प्रोफेशनल टेक्नोलॉजी और बिजनेस, दोनों के बीच बेहतर तरीके से बात कर सकता है, उसके लिए करियर में आगे बढ़ने के अवसर भी बढ़ सकते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को साइबर सिक्योरिटी इंजीनियर बनना होगा। जरूरत इतनी है कि वह किसी बड़े फैसले से पहले सही सवाल पूछ सके, न कि साइबर हमला होने के बाद सुरक्षा पर चर्चा शुरू करे।
Cybersecurity में सिर्फ Coding ही जरूरी नहीं
साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में तकनीकी विशेषज्ञता की जरूरत बनी हुई है, लेकिन इसके अंदर भी मांग कुछ खास क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रही है। Cloud Security, Identity and Access Management और AI आधारित साइबर डिफेंस जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञों की जरूरत बढ़ रही है।
लेकिन इन विशेषज्ञों के अलावा एक और बड़ा अंतर दिखाई देता है। जिन कर्मचारियों और मैनेजरों के विभागों की सुरक्षा साइबर विशेषज्ञों को करनी होती है, उनमें से बहुत से लोगों को साइबर जोखिम की बुनियादी जानकारी नहीं होती।
साइबर सुरक्षा में Governance और Risk Management का महत्व भी लगातार बढ़ रहा है। इन क्षेत्रों में केवल कोडिंग की जानकारी काफी नहीं होती। नियमों, कानूनों और संगठन से जुड़े फैसलों को समझना भी जरूरी होता है।
दुनिया के कई देशों में डेटा प्राइवेसी से जुड़े कानून लगातार मजबूत हो रहे हैं। ऐसे में कंपनियों को सिर्फ ज्यादा प्रोग्रामर की जरूरत नहीं है। उन्हें ऐसे कर्मचारी भी चाहिए जो समझ सकें कि किसी कानूनी या रेगुलेटरी जरूरत को रोजमर्रा के बिजनेस फैसले में कैसे लागू किया जाए।
यह स्थिति कुछ हद तक उसी तरह है जैसे किसी कंपनी में हर मैनेजर से बुनियादी वित्तीय जानकारी की उम्मीद की जाती है, भले ही वह फाइनेंस विभाग में काम न करता हो।
AI साइबर सुरक्षा की कमी को पूरी तरह खत्म नहीं कर सकता
यह मान लेना आसान है कि AI आधारित साइबर सुरक्षा टूल कर्मचारियों की जानकारी की कमी को पूरी तरह दूर कर देंगे। लेकिन ऐसा पूरी तरह संभव नहीं है।
आज ऑटोमेटेड सिस्टम कुछ ही सेकंड में डिजिटल कमजोरियों की पहचान कर सकते हैं। कंपनियां ऐसे सिस्टम का इस्तेमाल बड़ी मात्रा में आने वाले सुरक्षा अलर्ट को संभालने के लिए कर रही हैं।
लेकिन ऑटोमेशन इंसानी फैसले की जगह पूरी तरह नहीं ले सकता।
कई मामलों में यह समझना जरूरी होता है कि किसी सुरक्षा अलर्ट का वास्तविक बिजनेस पर क्या असर है, अलग-अलग जोखिमों के बीच किसे प्राथमिकता दी जानी चाहिए और कब किसी ऑटोमेटेड सिस्टम की सलाह मौजूदा स्थिति के हिसाब से सही नहीं है।
ऐसे में जिस ग्रेजुएट को यह बुनियादी समझ है कि AI का इस्तेमाल डिजिटल सिस्टम पर हमला करने और उन्हें सुरक्षित रखने, दोनों के लिए कैसे किया जा रहा है, वह आधुनिक डिजिटल संगठन में बेहतर तरीके से काम कर सकता है।
Career Readiness: छात्रों के लिए क्या है इसका मतलब?
इसका मतलब यह नहीं है कि हर छात्र को साइबर सुरक्षा में अलग से डिग्री करनी चाहिए। जरूरत बेसिक साइबर सिक्योरिटी लिटरेसी की है।
एक छात्र या प्रोफेशनल के लिए यह समझना जरूरी होता जा रहा है कि फिशिंग अटैक कैसे काम करता है, किसी वेंडर की डेटा पॉलिसी कंपनी के लिए क्यों महत्वपूर्ण है और GDPR जैसे डेटा प्राइवेसी नियम रोजमर्रा के बिजनेस फैसलों को किस तरह प्रभावित कर सकते हैं।
जिस तरह पिछले कई दशकों से मैनेजरों से बुनियादी वित्तीय जानकारी समझने की उम्मीद की जाती रही है, उसी तरह डिजिटल दौर में साइबर सुरक्षा की बुनियादी जानकारी भी एक जरूरी प्रोफेशनल स्किल बनती जा रही है।
ऑनलाइन सुरक्षित रहना अब केवल टेक्नोलॉजी से जुड़ा मामला नहीं है। यह प्रोफेशनल लाइफ स्किल बन चुका है। जैसे किसी व्यक्ति के लिए बैलेंस शीट पढ़ना या मार्केट रिपोर्ट समझना उपयोगी है, वैसे ही डिजिटल जोखिम को समझना भी जरूरी होता जा रहा है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की जरूरत फिर भी बनी रहेगी
साइबर सुरक्षा की सामान्य जानकारी बढ़ने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि विशेषज्ञ साइबर सिक्योरिटी प्रोफेशनल्स की जरूरत कम हो जाएगी। वास्तव में, विशेषज्ञों की कमी अभी भी काफी गंभीर है और इस क्षेत्र में विशेषज्ञता रखने वाले प्रोफेशनल्स की मांग बनी हुई है।
इसके साथ ही अब साइबर सुरक्षा से जुड़ी एक दूसरी और व्यापक जरूरत भी सामने आ रही है। कंपनियों को ऐसे कर्मचारियों की जरूरत है जो डिजिटल जोखिम की बुनियादी समझ रखते हों और अपने रोजमर्रा के काम में बेहतर सुरक्षा फैसले ले सकें।
MBA ने हर ग्रेजुएट को फाइनेंस एक्सपर्ट नहीं बनाया था। उसने बिजनेस की बुनियादी समझ जरूर दी, जिससे अलग-अलग क्षेत्र के लोग आधुनिक संगठन में बेहतर तरीके से काम कर सकें।
साइबर सुरक्षा की समझ भी धीरे-धीरे इसी दिशा में बढ़ रही है। यह विशेषज्ञ साइबर सुरक्षा की जगह लेने वाली स्किल नहीं है, बल्कि डिजिटल सिस्टम पर निर्भर होती जा रही दुनिया में हर ग्रेजुएट के लिए जरूरी होती एक बुनियादी प्रोफेशनल समझ बन रही है।




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